अध्यक्ष-सीएमओ-लेखपाल की 'त्रिमूर्ति' ने किया सरकारी राशि का बंदरबांट, कमिश्नर की गाज गिरते ही भ्रष्टाचार का सिंडिकेट हुआ बेनकाब
नगर परिषद बनगवां (राजनगर) में भ्रष्टाचार का खुलासा प्रभारी CMO राममिलन तिवारी निलंबित
इंट्रो-नगर परिषद बनगवां इन दिनों विकास कार्यों के लिए नहीं बल्कि सरकारी खजाने में सेंधमारी के 'अमृत खेल' के लिए सुर्खियों में है। अमृत 2.0 योजना के तहत तालाबों और पार्कों के कायाकल्प के नाम पर हुए लाखों के वित्तीय बंदरबांट ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। जहाँ एक ओर शहडोल कमिश्नर ने पोर्टल पर आईडी के दुरुपयोग और गलत भुगतान के पुख्ता सबूत मिलने पर प्रभारी सीएमओ राममिलन तिवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, वहीं दूसरी ओर नगर का एक बड़ा सवाल प्रशासन के चेहरे पर कालिख पोत रहा है भ्रष्टाचार की इस पूरी पटकथा को तकनीकी रूप से लिखने वाला लेखपाल (Accountant) अब तक सुरक्षित क्यों है?
प्रकाश सिंह परिहार की कलम से
अनूपपुर-शहडोल संभाग की कमिश्नर सुरभि गुप्ता ने नगर परिषद बनगवां (राजनगर) के प्रभारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) राममिलन तिवारी को पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के आरोप में निलंबित कर दिया है। यह आदेश दिनांक 03 फरवरी 2026 को संभागीय समीक्षा बैठक के बाद जारी किया गया।
लेखापाल और अध्यक्ष की संदिग्ध चुप्पी
सूत्रों का कहना है कि पोर्टल पर किसी भी प्रकार का भुगतान बिना लेखपाल (Accountant) की तकनीकी अनुमति और अध्यक्ष की सहमति के संभव नहीं होता। प्रभारी सीएमओ ने अपनी लॉगिन आईडी से सीधे गलत भुगतान किए, जो यह दर्शाता है कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि निलंबन केवल सीएमओ का ही क्यों हुआ? पोर्टल के तकनीकी विशेषज्ञ और फाइल आगे बढ़ाने वाले लेखपाल पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अमृत 2.0 योजना के भुगतान में करोड़ों की हेरफेर
जांच में पाया गया कि अमृत 2.0 योजना के तहत तालाब जीर्णोद्धार और पार्क निर्माण कार्यों के भुगतान में भारी गड़बड़ी की गई। संविदाकारों को देय लाखों रुपये की राशि के विरुद्ध मात्र कुछ हजार रुपये का भुगतान किया गया जबकि शेष राशि अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी गई।
पोर्टल पर आईडी का दुरुपयोग और गलत भुगतान
प्रभारी CMO राममिलन तिवारी ने SNA Sparsh Portal पर अपनी लॉगिन आईडी से बिना किसी परीक्षण के गलत भुगतान किए। उन्होंने मेकर/चेकर की आईडी का उपयोग कर संविदाकारों की वास्तविक राशि म.प्र. कर्मकार मण्डल के खाते में और मण्डल की राशि संविदाकारों के खाते में अंतरित कर दिया!
संविदाकारों का भुगतान अटका, निर्माण कार्य हुए प्रभावित
अधिकारियों की इस मनमानी के कारण संविदाकार को उनकी वाजिब राशि का भुगतान नहीं हो सका। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस वित्तीय गड़बड़ी की वजह से नगर परिषद के महत्वपूर्ण निर्माण कार्य अनावश्यक रूप से प्रभावित हुए हैं।
सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन, कलेक्ट्रेट कार्यालय अनूपपुर नीयत
CMO राममिलन तिवारी का यह कृत्य म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम-1965 के विरुद्ध पाया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कलेक्टर कार्यालय अनूपपुर तय किया गया है और उनके विरुद्ध 07 दिवस के भीतर आरोप पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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