मंत्री दिलीप जायसवाल से ग्रामीण एवं ट्रैक्टर मालिकों ने की शिकायत- निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की मांग
वर्दी की धौंस या कानून का उल्लंघन...? रेंज कार्यालय गेट बंद कर मारते दिखे अधिकारी- सोशल मीडिया में वायरल हो रही वीडियो
बिजुरी रेंजर की 'कस्टोडियल टॉर्चर' वाली तानाशाही- खाली ट्रैक्टर जब्त कर ड्राइवर को दफ्तर में बेरहमी से पीटा
इंट्रो-बिजुरी वन विभाग का दफ्तर इन दिनों सरकारी कार्यालय कम और टॉर्चर रूम ज्यादा नजर आ रहा है। पद के नशे में चूर रेंजर पवन ताम्रकार पर आरोप है कि उन्होंने कानून की मर्यादाओं को ताक पर रखकर बंद गेट के पीछे एक बेबस ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की, जिसका दर्दनाक वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है इससे चर्चाओं की बाजार गर्म हो चुका है और तेजी से जांच की मांग भी उठ रही है जनता जिसकी जांच की मांग उठ रही है। खाली ट्रैक्टर को 'अपराधी' बनाने की रेंजर की इस जिद और 'कस्टोडियल टॉर्चर' ने न केवल मानवाधिकारों की धज्जियाँ उड़ाई हैं बल्कि शासन के सुशासन के दावों पर भी कालिख पोत दी है। इस बर्बरता के खिलाफ अब पीड़ित पक्ष ने राज्यमंत्री दिलीप जायसवाल का दरवाजा खटखटाया है!
प्रकाश सिंह परिहार कि कलम से
अनूपपुर /बिजुरी - 13 जनवरी 2026 को बिजुरी वन परिक्षेत्र अधिकारी पवन ताम्रकार पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम कोठी में खड़े एक खाली ट्रैक्टर को न केवल अवैध रूप से जब्त किया बल्कि ड्राइवर ओम कुशवाहा को वन कार्यालय के बंद कमरे में लात-घूसों से इतना पीटा कि उसे अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। रेंजर द्वारा ड्राइवर से कथित तौर पर जबरन 'रेत चोरी' का जुर्म कबूल करवाने का प्रयास किया गया जो मानवाधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का सीधा उल्लंघन है। पीड़ित पक्ष का दावा है कि उनके पास निर्दोष होने के पर्याप्त सबूत जैसे सीसीटीवी फुटेज और संविदा के कागजात मौजूद हैं।
अपराधी कैसे बनाना है मुझे पता है-रेंजर पवन ताम्रकार
रेंजर की खुली चुनौती ट्रैक्टर खाली हो या भरा, अपराधी बनाना मेरे हाथ में रक्षक ही बना भक्षक कहना गलत नहीं होगा जब ट्रैक्टर मालिक रवि सिंह बघेल ने रेंजर से वाहन छोड़ने का निवेदन किया तो रेंजर पवन ताम्रकार ने पद की गरिमा के विपरीत जवाब दिया कि उन्हें अपराधी बनाना आता है और मालिक जो चाहे कर ले। यह बयान दर्शाता है कि अधिकारी खुद को न्यायपालिका से ऊपर समझ रहा है। अडानी कंपनी में अनुबंधित कार्य कर रहे वाहन को बिना किसी 'सर्च वारंट' या ठोस आधार के जब्त करना प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग को प्रदर्शित करता है।
विरोध को दबाने की गंदी राजनीति
धरने को बदनाम करने की साजिश के साथ रेंजर पर प्रदर्शनकारियों को 'SC-ST एक्ट' में फंसाने के लिए ढाल बनाने का आरोप है 15 जनवरी से जारी शांतिपूर्ण धरने को खत्म करने के लिए कथित तौर पर रेंजर की शह पर कुछ लोगों को महिलाओं और बच्चों के साथ भेजा जा रहा है ताकि विवाद पैदा कर प्रदर्शनकारियों पर गंभीर कानूनी धाराएं लगवाई जा सकें। 16 जनवरी को डिप्टी रेंजर सतीश बैगा नामक व्यक्ति द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ गाली-गलौज की गई और मोबाइल छीनकर तोड़ दिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उन्हें महिला संबंधी अपराधों में फंसाने की धमकियां दी जा रही हैं। क्योंकि उक्त व्यक्ति यही बिजुरी का लोकल रहवासी हैं और कई वर्षों से बिजुरी परिक्षेत्र में जमे हुए है आखिर विभाग कई वर्षों से जमे कर्मचारियों एवं लोकल होने के नाते कैसे पोस्टिंग कर देती है यह भी एक चिंता का विषय है इस पर भी जांच होना अनिवार्य है!
जांच प्रणाली पर सवाल- बिना मौका-मुआयना भेजे कारण बताओ नोटिस
घर बैठे व्हाट्सऐप पर जांच पूरी...? बिना किसी जमीनी निरीक्षण के रेंजर ने थमाया कारण बताओ नोटिस- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 16 जनवरी की शाम को अज्ञात मोबाइल नंबरों से रवि सिंह को व्हाट्सऐप के माध्यम से कारण बताओ नोटिस भेजे गए। तकनीकी दृष्टिकोण से किसी भी प्रकार की निष्पक्ष जांच किए बिना और मौका-मुआयना किए बिना घर बैठे नोटिस जारी करना केवल कागजी खानापूर्ति और डराने की एक तकनीक है। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का इस तानाशाही पर मौन रहना मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
टॉर्चर रूम बना सरकारी दफ्तर-चीखें सुन कांप उठा बिजुरी
सोशल मीडिया पर वायरल एक विचलित करने वाले वीडियो ने प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि वन कार्यालय का मुख्य गेट अंदर से बंद कर एक व्यक्ति को जानवरों की तरह पीटा जा रहा है पीड़ित जान बचाने के लिए गिड़गिड़ा रहा है लेकिन रेंजर की टीम ने रहम नहीं दिखाया। जोकि नगर हुआ ग्रामीण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि जबरन 'रेत चोरी' का जुर्म कबूलवाने के लिए इस 'कस्टोडियल टॉर्चर' का सहारा लिया गया। हालांकि उक्त वायरल वीडियो की हम व हमारी टीम पुष्टि नहीं करती है लेकिन जनता के माध्यम से हम प्रशासन ताकि यह बात पहुंचाना चाहते हैं कि इस तरह कुर्तापूर्ण पिटाई वाली वायरल वीडियो कि जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिससे जनता को प्रशासन व सरकार पर विश्वास जम रहे!
अंतिम चेतावनी अब इंसाफ नहीं तो चक्का जाम
पिछले चार दिनों से कड़ाके की ठंड में कोठी और आसपास के ट्रैक्टर मालिक धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि रेंजर पवन ताम्रकार को तत्काल निलंबित किया जाए और ड्राइवर के साथ मारपीट करने वाले दोषियों पर आपराधिक मुकदमा चले।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही न्याय नहीं मिला तो वे 'चक्का जाम' कर विरोध प्रदर्शन को उग्र करेंगे जिसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी।
असली माफियाओं से साठगांठ, निर्दोषों पर बरपा रहे कहर
वन विभाग बिजुरी की टीम इन दिनों अपनी 'पीठ थपथपाने' के लिए फर्जी कार्रवाइयों का सहारा ले रही है। रेंजर पवन ताम्रकार जिस क्षेत्र में कार्रवाई का दावा कर रहे हैं, वहां बीट गार्डों की नाक के नीचे सैकड़ों गाड़ियों से अवैध रेत का उत्खनन धड़ल्ले से जारी था। चर्चा है कि विभाग की मिलीभगत से यह काला कारोबार फल-फूल रहा है।सूत्रों की मानें तो अवैध खनन की शिकायत होने पर जब रेंजर को मौके पर असली माफिया नहीं मिले तो अपनी खाल बचाने के लिए उन्होंने कोठी गांव में अडानी कंपनी के काम में लगे निर्दोष ट्रैक्टर को ही दबोच लिया।
इनका कहना है
पीड़ित ड्राइवर ओम कुशवाहा ने बताया कि वह कंपनी से अपनी गाड़ी लेकर लौट रहे थे तभी वन विभाग की टीम ने उन्हें रोक लिया। वन कर्मियों ने उन पर रेत के अवैध परिवहन का झूठा आरोप लगाते हुए मारपीट शुरू कर दी।मुझे गाड़ी से उतारकर बुरी तरह पीटा गया। उसके बाद वे मुझे अपनी बोलेरो गाड़ी में डालकर ले गए, जहाँ रास्ते भर और फिर चौकी पहुँचने पर शाम तक लगातार मारा-पीटा गया। अधिकारी मामले को रफा-दफा करने के लिए 25,000 रुपये की मांग कर रहे हैं। मैं निर्दोष हूँ और सिर्फ अपनी कंपनी की गाड़ी ला रहा था। मुझे न्याय चाहिए।
ओम कुशवाहा, पीड़ित युवक
घटना पर आक्रोश जताते हुए गाड़ी मालिक ने कहा कि वन विभाग ने कोठी गांव से उनकी गाड़ी को अवैध तरीके से और जबरन अपने कब्जे में लिया है।मेरी गाड़ी को कोठी गांव से बिना किसी ठोस कारण के जबरन उठा लिया गया। इसके बाद वन विभाग के कर्मचारियों ने ड्राइवर के साथ न केवल मारपीट की बल्कि उसे वन चौकी में काफी समय तक बंधक बनाकर भी रखा। हम इस अन्याय के खिलाफ पीड़ित ड्राइवर के लिए न्याय चाहते हैं और विभाग से मांग करते हैं कि हमारी गाड़ी को तुरंत मुक्त किया जाए।
रवि सिंह बघेल, गाड़ी मालिक
वन विभाग की टीम अवैध उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए नियमित गश्त पर थी। इस दौरान कोठी गांव के पास वाहन को संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया, जिसके बाद नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसे जब्त कर वन चौकी लाया गया है। मारपीट या अवैध पैसे की मांग के आरोप पूरी तरह से गलत और जांच को प्रभावित करने की कोशिश हैं। विभाग कानून के दायरे में काम कर रहा है और मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
पवन ताम्रकार, वन परिक्षेत्र अधिकारी बिजुरी

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