Breaking

Post Top Ad

Your Ad Spot

Wednesday, February 4, 2026

एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र बांट रहा 'मौत': मवेशियों की लगातार मौत जारी, अमलाई ओसीएम में 8 मवेशियों की संदिग्ध मौत

 



अभी ठंडा भी नहीं हुआ था ऑपरेटर के डूबने और 87 दिन तक रेस्क्यू न होने का मामला, कि रामपुर के बाद अब अमलाई में फिर प्रबंधन का खूनी खेल

सुलगते सवाल: कौन हैं गौरव और नीलेश? क्या बारूद की आड़ में घोला जा रहा है मवेशियों के लिए जहर?

शहडोल - विशेष संवाददाता गजेंद्र सिंह 

एसईसीएल (SECL) का सोहागपुर क्षेत्र अब कोयला नहीं, बल्कि 'मौत' बांटने का कारखाना बन चुका है। अमलाई ओसीएम (Amlai OCM) में लापरवाही की इंतहा देखिए कि पहले एक ऑपरेटर की खदान के पानी में डूबने से मौत हुई, जिसका रेस्क्यू 87 दिनों तक नहीं हो पाया था। उस गंभीर मामले में अभी डीजीएमएस (DGMS) की जांच चल ही रही है कि अब 8 मवेशियों की सामूहिक मौत ने प्रबंधन को फिर कटघरे में खड़ा कर दिया है। पहले मजदूर की मौत लापरवाही की वजह से हुई और अब लगातार हो रही मवेशियों की मौत से पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।

अमलाई ओसीएम: पहले ऑपरेटर, अब मवेशियों का कब्रिस्तान

अमलाई ओसीएम के कांटा घर के पास 4 गाय, 3 बछड़े और 1 बैल के शव मिलने से हड़कंप मच गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, खदान परिसर का जहरीला पानी पीने से ये मौतें हुईं। यह वही खदान है जिसने कुछ दिन पहले एक ऑपरेटर को निगल लिया था और निष्ठुर प्रबंधन 87 दिनों तक लाश भी नहीं निकाल पाया था। डीजीएमएस की जांच की तलवार लटकी होने के बावजूद प्रबंधन सुधरा नहीं है। इंसान के बाद अब बेजुबानों की जान से खिलवाड़ यह साबित करता है कि एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र में सुरक्षा नाम की कोई चीज नहीं बची है।

सुलगते सवाल: आखिर कौन हैं वे 'गौरव और नीलेश' जो फिजा में घोल रहे हैं बारूद?

मवेशियों की लगातार हो रही मौत ने एक गहरे षड्यंत्र की ओर इशारा किया है। आखिर बारूद के सप्लायर और फिजा में बारूद घोलने वाले ये लोग कौन हैं? मवेशियों की लगातार मौत के जिम्मेदार वे गौरव और नीलेश और उनके सहयोगी कौन हैं, जो लगातार मौत बांट रहे हैं? चर्चा है कि बारूद खोलने और सप्लाई करने की आड़ में यह गिरोह सक्रिय है, जिसकी लापरवाही से पूरा वातावरण जहरीला हो रहा है। क्या प्रबंधन ने गौरव और नीलेश को मवेशियों की जान लेने का लाइसेंस दे रखा है? इस बात का खुलासा होना ही चाहिए कि आखिर बारूद की आड़ में चल रहे इस खूनी खेल के असली मास्टरमाइंड कौन हैं। जल्द ही गौरव और नीलेश के कारनामों के भी बड़े खुलासे किए जाएंगे।

रामपुर से अमलाई तक: फेंसिंग नदारद, मौत का खुला निमंत्रण

रामपुर बटुआ और खुली खदान में हुई मवेशियों की मौत के बाद अब अमलाई ओसीएम में इस तरह की घटना का दोहराव एसईसीएल की कार्यप्रणाली पर कालिख पोत रहा है। खदानों के चारों ओर फेंसिंग न होने से यह पूरा इलाका 'ओपन डेथ जोन' बन चुका है। चाहे ऑपरेटर का डूबना हो या मवेशियों का जहरीला पानी पीना, हर हादसे की जड़ प्रबंधन की लापरवाही और फेंसिंग का न होना है। अगर इस 'मौत बांटने' वाले सिस्टम पर जल्द लगाम नहीं लगाई गई, तो यह हड़कंप एक बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगा।

No comments:

Post a Comment

Post Top Ad

Your Ad Spot

Pages