नई कार या जी का जंजाल! 17 हजार कि.मी. में जवाब दे गए टायर, शहडोल में मारुति के अफसरों की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश
टायर चाट रही नई डिजायर! हब बदलकर कंपनी ने खुद स्वीकारी 'मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट' की बात, फिर भी समाधान देने में कतरा रहे अधिकारी
अगर आप मारुति सुजुकी और शुभ मोटर्स से गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाएं, क्योंकि यहां ‘चमचमाती गाड़ियों’ की आड़ में ‘डिफेक्टिव कचरा’ बेचा जा रहा है। गाड़ी खरीदने के पहले दिन से ही उपभोक्ता सर्विस सेंटर के चक्कर काट रहा है, लेकिन ‘लूट’ में मस्त कंपनी के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। हद तो तब हो गई जब शिकायत के बाद गाड़ी को शोरूम में खड़ा करवा लिया गया और अब पिछले 3 दिनों से सुधारने के बजाय सिर्फ ‘मेल-मेल’ का खेल खेला जा रहा है। लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी उपभोक्ता पैदल चलने को मजबूर है, और जिम्मेदार अधिकारी व्हाट्सएप-फोन से नदारद होकर तमाशबीन बने हुए हैं।
शहडोल। देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी होने का दावा करने वाली मारुति सुजुकी और उसके स्थानीय डीलर शुभ मोटर्स की असलियत अब उजागर हो गई है। शहडोल संभाग में घटिया दर्जे की डिफेक्टिव गाड़ियां बेचकर और उपभोक्ताओं को गुमराह कर यह कंपनी अपनी साख खो रही है। एक ताजा मामले में, एक आम उपभोक्ता को ‘‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’’ वाली नई मारुति डिजायर थमा दी गई, जिसके चलते न केवल उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई, बल्कि उनकी जान पर भी बन आई। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बाद गाड़ी को तीन दिनों से शहडोल शोरूम में खड़ा कर लिया गया है, लेकिन शुभ मोटर्स और मारुति सुजुकी का कोई भी अधिकारी समाधान देने के बजाय जवाब देने से कतरा रहा है।
मारुति सुजुकीः डिफेक्टिव गाड़ियों का ‘सौदागर’
मारुति सुजुकी की नई डिजायर की गुणवत्ता अब गंभीर संदेह के घेरे में है। मात्र 17,000 किलोमीटर चलने पर ही गाड़ी के चारों टायर पूरी तरह घिसकर नष्ट हो गए, जो यह साबित करता है कि कंपनी दोषपूर्ण पार्ट्स का इस्तेमाल कर रही है। उपभोक्ता की शिकायत पर जब मामला बढ़ा, तो कंपनी ने आनन-फानन में गाड़ी का ‘हब’ बदला। यह तकनीकी बदलाव अपने आप में एक स्वीकारोक्ति है कि गाड़ी के सस्पेंशन सिस्टम में गंभीर ‘‘मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट’’ था। मारुति सुजुकी जैसी प्रतिष्ठित कंपनी द्वारा इस तरह के जानलेवा उत्पाद बेचना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ विश्वासघात है।
शुभ मोटर्सः बदहाल सर्विस और लूट का केंद्र
डीलरशिप शुभ मोटर्स की कार्यप्रणाली उपभोक्ता हितों के विरुद्ध दिखाई दे रही है। उपभोक्ता द्वारा हर सर्विसिंग पर ‘‘टायर चाटने’’ की स्पष्ट शिकायत के बाद भी वहां के स्टाफ ने समस्या को हल करने के बजाय केवल गुमराह किया। उपभोक्ता की परेशानी को समझने के बजाय उसे टरकाना और गलत जानकारी देना शुभ मोटर्स की विश्वसनीयता खत्म कर रहा है। आज स्थिति यह है कि उपभोक्ता की गाड़ी शोरूम में खड़ी है और प्रबंधन मौन साधे बैठा है।
अधिकारियों की तानाशाही और असहयोग
इस पूरी लापरवाही में मारुति सुजुकी के क्षेत्रीय अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार हैं। टीएसएम विवेक चौहान और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को इस गंभीर समस्या की पूरी जानकारी दी गई, लेकिन वे व्हाट्सएप और कॉल्स का जवाब देना भी उचित नहीं समझ रहे हैं। अधिकारियों की यह चुप्पी साबित करती है कि कंपनी और डीलर के बीच साठगांठ है, जिससे आम उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।
उपभोक्ता आयोग में घसीटने की चेतावनी
मारुति सुजुकी और शुभ मोटर्स के इस अड़ियल रवैये से तंग आकर अब उपभोक्ता ने कानूनी लड़ाई का मन बना लिया है। उपभोक्ता ने अंतिम चेतावनी देते हुए 3 दिन का समय दिया है। यदि टायर निशुल्क नहीं बदले गए और गाड़ी की तकनीकी ‘ओके रिपोर्ट’ नहीं मिली, तो मामला जिला उपभोक्ता आयोग में दर्ज कराया जाएगा। वहां टायरों की कीमत के साथ 2 लाख रुपये का हर्जाना और मानसिक प्रताड़ना का दावा पेश किया जाएगा। साथ ही, प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मारुति सुजुकी की इन डिफेक्टिव गाड़ियों की हकीकत जनता के सामने रखी जाएगी।
इनका कहना है
उपभोक्ता की शिकायत के आधार पर गाड़ी को बिजुरी से शहडोल शोरूम लाया गया है। पिछले 2 दिनों से गाड़ी शहडोल शोरूम में ही खड़ी है। इस संबंध में मारुति सुजुकी को मेल कर दिया गया है और अब मेल के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। मेल के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। जहां तक उपभोक्ता को जानकारी देने का सवाल है, तो वर्कशॉप मैनेजर को आज निर्देशित किया गया है कि 2 दिनों बाद उपभोक्ता को पूरी जानकारी दे दे।
विवेक चौहान,
टीएसएम, मारुति सुजुकी सर्विस

No comments:
Post a Comment