अनूपपुर में मोहन सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को ठेंगा: कागजों पर कदमसारा, जमीनी हकीकत लोडिंग चंगेरी- शिकायत में कार्यवाही की जगह रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स को खुला संरक्षण
खनिज विभाग और एसोसिएट कॉमर्स का गठबंधन पोर्टल ही बांट रहा लूट की छूट- कलेक्टर की साख और कुर्सी को ठेकेदार की खुली चुनौती
इंट्रो -प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ कार्यवाही गरज रहा है लेकिन अनूपपुर में वही कार्यवाही और पोकलेन मशीनें एनजीटी (NGT) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नदियों का कत्लेआम कर रही हैं। ऐसी चर्चा है की माइनिंग विभाग के अधिकारियों ने अपनी ईमानदारी ठेकेदार की तिजोरी में गिरवी रख दी है तभी तो शिकायत और प्रमाणों के बाद भी साहब की कलम नहीं चल रही। जिले के तेजतर्रार कलेक्टर की चुप्पी और माइनिंग विभाग का संरक्षण यह बताने के लिए काफी है कि अनूपपुर में रेत सिंडिकेट का साम्राज्य संविधान से ऊपर हो चुका है। अब सवाल यह है कि क्या इस 'नापाक गठबंधन' पर शासन का डंडा चलेगा या कई करोडो मे राजस्व की यह बलि यूँ ही जारी रहेगी? और सरकार को नुकसान पहुंचता रहेगा!
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार )-मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और भ्रष्टाचार मुक्त शासन का ढोल पीट रहे हैं लेकिन अनूपपुर जिले में खनिज विभाग और रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स ने मिलकर इस नीति का 'अंतिम संस्कार' कर दिया है। जिले की जीवनदायिनी सोन और केवई नदियों के सीने पर हैवी मशीनों का प्रहार और डिजिटल पोर्टल के जरिए करोड़ों के राजस्व की चपत इस बात का प्रमाण है कि यहाँ कानून का नहीं बल्कि 'मैनेजमेंट' का राज चल रहा है।
डिजिटल इंडिया में डिजिटल लूट- ई-टीपी कहीं की, रेत चंगेरी की
अनूपपुर खनिज विभाग की तकनीक अब रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की गुलाम बन चुकी है। जिले में डिजिटल लूट का ऐसा खेल चल रहा है जिसे देखकर सिस्टम की रूह कांप जानी चाहिए। ई-टीपी (e-TP) 'कदमसारा' या 'पाषान' खदान की काटी जा रही है, जबकि रेत का अवैध उठाव 'चंगेरी' (कोतमा) से हो रहा है।प्रमाण-वाहन क्रमांक MP65GA1110 जैसे दर्जनों ट्रक इस सिंडिकेट की गवाही दे रहे हैं। जब हाथ से बने गुलाबी चालान पर लोडिंग पॉइंट 'चंगेरी' दर्ज है और सरकारी पोर्टल पर 'पाषान', तो यह तकनीकी चूक नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व चोरी है।
ओवरलोडिंग को 'सरकारी आशीर्वाद-13 की क्षमता पर 29 का पास
भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए जिस डंपर की आधिकारिक क्षमता महज 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे खनिज विभाग का पोर्टल 14, 25 और यहाँ तक कि 29 क्यूबिक मीटर तक के आधिकारिक पास (ओवरलोड पास) धड़ल्ले से जारी कर रहा है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और ओवरलोडिंग को डिजिटल मुहर लगा दें, तो सड़कों की बर्बादी और राजस्व की लूट को कौन रोकेगा?जब पोर्टल ही लूट का लाइसेंस बांटने लगे, तो समझ लीजिए कि जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदार की तिजोरी के पहरेदार बन चुके हैं।
NGT के नियमों की हत्या- पोकलेन से छलनी होता नदियों का कलेजा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और खनिज अधिनियम 1957 के प्रावधानों को ताक पर रखकर एसोसिएट कॉमर्स ने नदियों की धारा रोक दी है।
प्रतिबंधित मशीनें- नदी के जलस्तर के भीतर हैवी पोकलेन मशीनों का प्रयोग वर्जित है लेकिन यहाँ गहरे कुएं खोदकर पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह किया जा रहा है।
पर्यावरण की बलि- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का यह खुला उल्लंघन लीज निरस्त करने के लिए पर्याप्त है, फिर भी माइनिंग कॉर्पोरेशन भोपाल और स्थानीय प्रशासन ने 'मौन सहमति' की चादर ओढ़ रखी है।
रेत ठेकेदार के सामने रात के अंधेरे में उड़नदस्ता शून्य
रात होते ही चंगेरी खदान में ठेकेदार का उत्सव शुरू हो जाता है। नियम विरुद्ध रूट और अवैध लोडिंग के बावजूद खनिज विभाग का उड़नदस्ता कभी मौके पर नहीं फटकता। चर्चा आम है कि सिस्टम ने अपनी आँखों पर नोटों की पट्टी बांध ली है। सवाल यह है कि जब एक आम नागरिक मोबाइल ऐप से यह फर्जीवाड़ा पकड़ सकता है, तो करोड़ों का बजट डकारने वाला विभाग अंधा और बहरा कैसे बना हुआ है?
कलेक्टर साहब! क्या आपका डंडा चलेगा या ठेकेदार को मिलेगा अभयदान?
अनूपपुर की जनता अब संवेदनशील कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है। क्या जिला प्रशासन इस रेत सिंडिकेट के सामने बंधक बन चुका है? यह कृत्य केवल विभागीय उल्लंघन नहीं, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (जालसाजी) और 303(2) (खनिज चोरी) के तहत गंभीर अपराध है।
जनता का सवाल- यदि तत्काल FIR दर्ज कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया, तो यह माना जाएगा कि जिले में 'जीरो टॉलरेंस' केवल कागजी जुमला है।अब देखना यह है कि कानून का डंडा इस रेत सिंडिकेट को ध्वस्त करता है या फिर अधिकारी 'मैनेजमेंट' के आगे नतमस्तक होकर सरकार को करोड़ों की चपत लगवाते रहेंगे।

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