खनिज विभाग का महाघोटाला- कागजों पर चल रहा पत्थर का अवैध भण्डारण, जमीन पर लहलहा रही धान की फसल
खनिज निरीक्षक की मिलीभगत से लूटा जा रहा सरकारी खजाना, बिना डायवर्सन जारी कर दिया 10 साल का लाइसेंस
अनुज्ञप्तिधारी और भू-स्वामी का डबल गेम, फर्जी ई-टीपी से हो रहा खनिज परिवहन, कृषि के नाम पर भी उठाया मुनाफा
निलंबन के साथ खनिज निरीक्षक बने सह-आरोपी, दर्ज हो आपराधिक प्रकरण
इंट्रो :-खनिज विभाग के संरक्षण में भ्रष्टाचार का एक नया और शर्मनाक अध्याय लिखा जा रहा है। जहां एक ओर सरकार राजस्व बढ़ाने के दावे कर रही है, वहीं अनूपपुर में खनिज निरीक्षक और माफियाओं का गठजोड़ सरकारी खजाने में खुलेआम सेंध लगा रहा है। एक ही जमीन पर धान की खेती भी हो रही है और उसी जमीन से भारी मात्रा में गिट्टी-बोल्डर का फर्जी परिवहन भी दिखाया जा रहा है। यह पूरा खेल बिना किसी भौतिक स्टॉक और बिना जमीन के व्यपवर्तन के धड़ल्ले से चल रहा है। इस महाघोटाले ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली और उनके अधिकारियों की निष्ठा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों पर चल रहे इस फर्जीवाड़े ने पूरे सरकारी तंत्र और सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है।
शहडोल :- अनूपपुर जिले के ग्राम पसान में नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसा फर्जीवाड़ा अंजाम दिया जा रहा है, जिसकी परतें खुलने पर कई सफेदपोश बेनकाब होंगे। खनिज माफिया विमल कुमार त्रिपाठी और भू-स्वामी रुकसाना बानो ने खनिज विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों के साथ मिलकर एक अभूतपूर्व घोटाला किया है। खसरा नंबर 1051 की 0.255 हेक्टेयर कृषि भूमि को रातों-रात कागजों में व्यावसायिक भण्डारण का केंद्र बना दिया गया। बिना मौके पर जाए और बिना वास्तविक स्थिति परखे, खनिज निरीक्षक ने अपनी आंखें मूंदकर इस अवैध कारोबार को हरी झंडी दे दी। यह रिपोर्ट उस पूरे सुनियोजित षड्यंत्र का पर्दाफाश करती है, जो सिस्टम की नाक के नीचे पनप रहा है।
कागजों में पत्थर जमीन पर धान
अनूपपुर जिले के पसान गांव स्थित खसरा क्रमांक 1051 की भूमि पर भ्रष्टाचार की अजब-गजब फसल काटी जा रही है। एक तरफ भू-स्वामी रुकसाना बानो ने इसी जमीन पर धान की फसल बोई और उसे उपार्जन केंद्र में बेचकर मुनाफा कमाया। दूसरी तरफ, खनिज विभाग ने इसी जमीन को पत्थर, गिट्टी और स्टोन डस्ट के भण्डारण के लिए अधिकृत कर दिया। सवाल यह है कि जब जमीन पर धान लहलहा रही थी, तो वहां खनिजों का पहाड़ कैसे खड़ा हो गया। यह विरोधाभास सीधे तौर पर एक बड़े फर्जीवाड़े की गवाही दे रहा है, जिसे जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। विभागीय अधिकारियों ने अपनी जेबें गर्म करने के लिए इस असंभव कृत्य को कागजों पर संभव बना दिया।
खनिज निरीक्षक की संदिग्ध भूमिका
इस पूरे घोटाले का मुख्य सूत्रधार खनिज विभाग का वह मैदानी अमला है, जिस पर अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है। खनिज निरीक्षक ने अपनी 6 अक्टूबर 2023 की निरीक्षण रिपोर्ट में साफ लिखा था कि भूमि का डायवर्सन होना चाहिए। लेकिन इसके बावजूद, डायवर्सन प्रक्रिया पूरी हुए बिना ही भण्डारण अनुज्ञप्ति की बेशर्म अनुशंसा कर दी गई। स्थल पर कोई खनिज मौजूद न होने के बाद भी हर महीने फर्जी तरीके से स्टॉक की रिपोर्टिंग होती रही। निरीक्षक महोदय ने स्थल का भौतिक सत्यापन किए बिना ही माफियाओं को ई-खनिज पोर्टल चलाने की खुली छूट दे दी। यह स्पष्ट करता है कि निरीक्षक ने अपनी ड्यूटी निभाने के बजाय भ्रष्टाचार को सीधा संरक्षण दिया।
फर्जी ई टीपी से हो रही राजस्व चोरी
अनुज्ञप्तिधारी विमल कुमार त्रिपाठी ने इस पूरे खेल में नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। बिना भौतिक रूप से एक भी पत्थर रखे, ई-खनिज पोर्टल के माध्यम से लगातार फर्जी ई-टीपी काटी जा रही हैं। यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि राज्य सरकार के खजाने को सीधे तौर पर लगाया जा रहा बड़ा चूना है। त्रिपाठी ने 6 अक्टूबर 2023 को खुद लिखित आश्वासन दिया था कि वह डायवर्सन की प्रति जमा करेंगे, जो कभी नहीं हुआ। बिना स्टॉक के टीपी कटना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह अनुज्ञप्ति सिर्फ अवैध परिवहन को वैध बनाने का हथियार है। खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह करोड़ों का खेल एक दिन भी नहीं चल सकता।
भू -स्वामी का दोहरा मुनाफा और धोखाधड़ी
इस षड्यंत्र में जमीन की मालकिन रुकसाना बानो की भूमिका भी पूरी तरह से आपराधिक और संदिग्ध है। उन्होंने 25 सितंबर 2023 को नोटरी के समक्ष अपनी जमीन पर वाणिज्यिक भण्डारण के लिए शपथ पत्र देकर सहमति दी। इसके बाद उसी जमीन पर 10 अप्रैल 2024 को धान की फसल का शासकीय पंजीयन करा लिया और सरकार को उपज बेची। यह प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर एक ही भूखंड से दोहरे लाभ उठाने की स्पष्ट धोखाधड़ी है। एक किसान द्वारा सरकारी तंत्र का ऐसा बेजा इस्तेमाल प्रमाणित करता है कि योजनाबद्ध तरीके से सरकार को लूटा गया। इस धांधली में शामिल भू-स्वामी और अनुज्ञप्तिधारी दोनों के खिलाफ सख्त कानूनी और आपराधिक कार्यवाही होनी चाहिए।
निलंबन के साथ खनिज निरीक्षक बने सह-आरोपी, दर्ज हो प्रकरण
खनिज माफियाओं को खुला संरक्षण देने वाले इस दागी खनिज निरीक्षक पर सिर्फ निलंबन की दिखावटी कार्यवाही काफी नहीं है। जब एक ही जमीन पर धान की खेती और पत्थर का व्यावसायिक भण्डारण एक साथ चल रहा था, तो अधिकारी ने जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं। यह स्पष्ट रूप से शासन के साथ की गई धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का संगीन मामला है, जिसमें इस अधिकारी की पूरी संलिप्तता है। बिना किसी देरी के, इस भ्रष्ट खनि निरीक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच बिठाई जानी चाहिए। इसके साथ ही, सरकारी खजाने को लूटने के जुर्म में इसे इस महाघोटाले में सह-आरोपी बनाकर एफआईआर (FIR) दर्ज होनी चाहिए, ताकि प्रशासन भ्रष्टाचार पर एक सख्त नजीर पेश कर सके।

No comments:
Post a Comment