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Wednesday, July 1, 2026

नगर परिषद डोला में सरकारी खजाने की खुली लूट -8 लाख के जिम झूले दो साल में ही बने कबाड़



नगर परिषद डोला में सरकारी खजाने की खुली लूट -8 लाख के जिम झूले दो साल में ही बने कबाड़



 परिषद दफ्तर के ठीक सामने भ्रष्टाचार की खुली नुमाइश, जनता पूछ रही- कब नपेगे भ्रष्ट साहब और इंजीनियर?



 'अधिकारी ही बने ठेकेदार' क्षेत्र में बना चर्चा का विषय, तकनीकी अनदेखी पर घिरे जिम्मेदार


 इंट्रो:-अनूपपुर जिले के नगर परिषद डोला में जनता की सेहत के नाम पर सरकारी राशि की बंदरबांट का एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां करीब दो साल पहले लाखों की लागत से लगाए गए ओपन जिम उपकरण आज पूरी तरह जमींदोज और जर्जर हो चुके हैं, जो सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की गवाही दे रहे हैं। विडंबना देखिए कि जिस परिसर में बैठकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) और उनके चहेते इंजीनियर विकास के बड़े-बड़े दावे ठोकते हैं, ठीक उसी दफ्तर की नाक के नीचे सरकारी पैसे को कबाड़ में तब्दील कर दिया गया। स्थानीय आक्रोशित जनता अब खुलकर आरोप लगा रही है कि जब जांच करने वाले अधिकारी खुद ही परदे के पीछे से ठेकेदारी की मलाई चाटने लगेंगे, तो फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की सुध भला कौन लेगा?


अनूपपुर/डोला :-नगर परिषद डोला द्वारा जनहित और स्वास्थ्य सुधार के बड़े-बड़े विज्ञापनों के बीच लगभग दो वर्ष पूर्व लाखों रुपये फूंक कर जो ओपन जिम उपकरण स्थापित किए गए थे, वे अब कमीशनखोरी की भेंट चढ़ चुके हैं। परिषद कार्यालय के ठीक सामने लगे इन महंगे झूलों और उपकरणों की हालत आज इतनी बदतर हो चुकी है कि अधिकांश लोहे के पाइप पूरी तरह टूट चुके हैं, उनका रंग-रोगन गायब है और पूरा ढांचा जंग खाकर खतरनाक हो चुका है। जनता की गाढ़ी कमाई के करीब 7 से 8 लाख रुपये को इस तरह मिट्टी में मिलाने के पीछे सीधे तौर पर परिषद के आला अधिकारियों और तकनीकी शाखा के इंजीनियरों की मिलीभगत साफ नजर आती है। शुरुआत से ही घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल होने के कारण ये उपकरण दो साल की समयावधि भी पूरी तरह नहीं झेल पाए और समय से पहले ही पूरी तरह कबाड़ में तब्दील हो गए।


 साहब की नाक के नीचे भ्रष्टाचार, फिर भी बने रहे अनजान

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि ये तमाम जर्जर उपकरण किसी सुदूर ग्रामीण इलाके में नहीं, बल्कि सीधे नगर परिषद डोला कार्यालय के मुख्य द्वार के सामने स्थापित हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी और उनके मातहत इंजीनियर हर रोज सुबह-शाम इसी रास्ते से गुजरते हैं और इन टूटे-फूटे झूलों को देखते हैं। इसके बावजूद महीनों से बदहाल पड़े इन सार्वजनिक संसाधनों की सुध लेने की फुर्सत किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को नहीं मिली, जो उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रोजाना आंखों के सामने हो रही इस बदहाली पर अधिकारियों का यह मौन साफ इशारा करता है कि वे जानबूझकर इस सच से मुंह चुरा रहे हैं। जब दफ्तर के ठीक सामने के विकास कार्यों का यह हश्र है, तो सुदूर वार्डों में चल रहे भ्रष्टाचार का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।


 इंजीनियरों की तकनीकी अनदेखी और कमीशनखोरी का खेल


क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का सीधा आरोप है कि नगर परिषद डोला में इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ और सिर्फ कमीशनखोरी और बंदरबांट का खेल धड़ल्ले से खेला जा रहा है। तकनीकी रूप से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने की पूरी जिम्मेदारी जिन इंजीनियरों के कंधों पर होती है, वे खुद ही वातानुकूलित कमरों में बैठकर फाइलों को हरी झंडी देने में व्यस्त हैं। जब करीब 8 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से खरीदे गए जिम उपकरण दो साल भी मजबूती से नहीं टिक पाए, तो यह साफ है कि सामग्री चयन में भारी हेरफेर की गई है। इंजीनियरों ने बिना किसी भौतिक और तकनीकी सत्यापन के इन घटिया लोहे के उपकरणों को पास कर दिया और ठेकेदार को भुगतान भी करा दिया। इस पूरे मामले में तकनीकी विंग की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध नजर आ रही है, जिनकी लापरवाही से सरकारी खजाने को सीधे तौर पर लाखों का चूना लगा है।


 जनता के तीखे सवाल, क्या दोषियों पर गिरेगी कार्रवाई की गाज?


इस खुली लूट को लेकर अब डोला की स्थानीय जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है और लोग सीधे तौर पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के गठजोड़ को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि इस घटिया निर्माण और खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष तकनीकी जांच नहीं की गई। जनता अब सीधे तौर पर प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर सरकारी पैसों की इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार भ्रष्ट इंजीनियरों और लापरवाह सीएमओ पर कानूनी शिकंजा कब कसा जाएगा? क्या शहडोल या भोपाल स्तर के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर मौके का भौतिक सत्यापन कराएंगे या फिर हमेशा की तरह इस घोटाले को भी फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा? फिलहाल इन जर्जर झूलों ने परिषद की साख को पूरी तरह मटियामेट कर दिया है और अब बड़ी कार्रवाई का इंतजार है।


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