28 करोड़ के शासकीय बकायेदार कमलेश सिंह चंदेल को आबकारी विभाग ने सौंपा शराब का ठेका-पैसे के बल पर सरकारी तंत्र का मज़ाक?
राजपत्र के नियमों को ताक पर रखकर आवंटन का आरोप -खनिज विभाग की देनदारी दबाकर मिला नया व्यापार लाइसेंस
खनिज विभाग के सबसे बड़े डिफॉल्टर पर मेहरबानी को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल -रसूख के आगे बौने साबित हुए सरकारी नियम
इंट्रो:- अनूपपुर जिले में आबकारी विभाग द्वारा नियमों को दरकिनार कर भारी बकायेदार को मदिरा दुकान का ठेका आवंटित करने का गंभीर मामला शिकायत के जरिए सामने आया है। जिला आबकारी अधिकारी को सौंपी गई लिखित शिकायत के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के 28 करोड़ 31 लाख से अधिक राजस्व के बकायेदार ठेकेदार को चचाई कंपोजिट शराब दुकान का नया लाइसेंस जारी कर दिया गया है। आबकारी नीति और राजपत्र क्रमांक 45 के स्पष्ट प्रावधानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए इस आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की गई है। शिकायतकर्ता का दावा है कि अवैध खनन में भारी अर्थदंड जमा किए बिना ही नियम विरुद्ध प्रक्रिया के तहत यह लाइसेंस जारी किया गया है। इस पूरे मामले की आधिकारिक शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचने से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार) :-ग्राम केल्हाउरी निवासी संतोष कुमार पानसरे द्वारा जिला आबकारी अधिकारी को सौंपी गई शिकायत के बाद यह मामला सुर्खियों में आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ग्राम चचाई स्थित कंपोजिट मदिरा दुकान के वर्ष 2026-27 के आवंटन में भारी अनियमितता बरती गई है। चचाई निवासी ठेकेदार कमलेश सिंह चंदेल पर मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग का करोड़ों रुपया बकाया होने का दावा किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि शासकीय राजस्व बकाया होने के बावजूद आबकारी विभाग द्वारा ठेका आवंटित करना गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है। राजपत्र के स्पष्ट नियमों के बावजूद शासकीय बकायेदार को अनुग्रह प्रदान करना शासन के राजस्व के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जा रहा है।
रेत का अवैध उत्खनन और 28 करोड़ का अर्थदंड
शिकायत पत्र में उल्लेख किया गया है कि संबंधित ठेकेदार ने पूर्व में सोन नदी चचाई आबाद क्षेत्र में रेत खदान का ठेका लिया था। खदान संचालन के दौरान निर्धारित सीमा से बाहर जाकर भारी मशीनों से अवैध उत्खनन करने का आरोप है। तत्कालीन खनिज निरीक्षक की जांच के बाद कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 41/बी-121/2017-18 दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार, कलेक्टर अनूपपुर ने 04 अक्टूबर 2019 को आदेश जारी कर ठेकेदार पर 28,31,70,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया था। साथ ही अवैध उत्खनन में प्रयुक्त एक्सकेवेटर मशीन को राजसात करने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी यह राशि जमा नहीं की गई।
राजपत्र के बिंदु क्रमांक 15 की अनदेखी का आरोप
शिकायतकर्ता ने आबकारी विभाग द्वारा 20 फरवरी 2026 को जारी राजपत्र क्रमांक 45 के निर्देशों का हवाला दिया है। राजपत्र के बिंदु क्रमांक 15 में स्पष्ट प्रावधान है कि जिस व्यक्ति पर भी शासकीय राजस्व बकाया होगा, वह शराब विक्रय ठेके के लिए पूरी तरह अयोग्य माना जाएगा। यह नियम इसलिए लागू किया गया है ताकि शासन के डिफॉल्टर और दागी पृष्ठभूमि के लोग नए ठेके हासिल न कर सकें। शिकायत में दावा किया गया है कि चचाई मदिरा दुकान के आवंटन में इस अति महत्वपूर्ण नियम को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। इतने बड़े डिफॉल्टर को नया लाइसेंस थमाने से आबकारी विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पैसे के बल पर साठगांठ और राजस्व क्षति की आशंका
शिकायत में सीधा आरोप लगाया गया है कि शासन के सख्त नियमों को अनदेखा कर नया व्यापार लाइसेंस हासिल कर लिया गया है। खनिज विभाग और आबकारी विभाग के बीच तालमेल की कमी के कारण शासन को भारी राजस्व क्षति पहुंचने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि ऐसे बकायेदारों को नए ठेके मिलते रहे तो शासन की 28 करोड़ से अधिक की बकाया राशि की वसूली कभी संभव नहीं हो पाएगी। यह मामला केवल एक दुकान के आवंटन तक सीमित न होकर पूरी आबकारी व्यवस्था की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल उठाता है। विभागीय अनदेखी के चलते स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन की भूमिका पर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
ठेका निरस्त करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता संतोष कुमार पानसरे ने 24 जुलाई 2026 को जिला आबकारी अधिकारी को शिकायत सौंपकर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है। इस शिकायत की प्रतियां आबकारी आयुक्त ग्वालियर तथा कलेक्टर जिला अनूपपुर को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं। ज्ञापन के जरिए मांग की गई है कि नियम विरुद्ध तरीके से स्वीकृत किए गए चचाई कंपोजिट शराब ठेके को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही 28 करोड़ 31 लाख रुपये के बकाया राजस्व की शीघ्र वसूली करते हुए ठेकेदार पर वैधानिक कार्रवाई की जाए। शिकायत के साथ कलेक्टर आदेश की प्रति भी संलग्न की गई है, जिसके बाद अब जिला प्रशासन के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं।






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