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Friday, January 23, 2026

वन विभाग के 'अहंकार' और 'ठसक' के बीच पिसती जनता- वन मंत्री के जिले में रेंजर का 'तांडव'



वन विभाग के 'अहंकार' और 'ठसक' के बीच पिसती जनता- वन मंत्री के जिले में रेंजर का 'तांडव' 



.....तो क्या प्रभारी मंत्री की चुप्पी ही रसूखदार अधिकारी का बना कवच....?


 खाली ट्रैक्टर पकड़कर ड्राइवर को पीटने का आरोप- 8 दिनों से न्याय की आस में वन दफ्तर की चौखट पर बैठा 'लोकतंत्र' 



चर्चाओं का बाजार गर्म तो क्या वन मंत्री व पालक मंत्री के संरक्षण में फल-फूल रही है रेंजर की दबंगई?



मोहन सरकार में बिजुरी रेंजर का 'जंगलराज'- टॉर्चर रूम बना दफ्तर, गेट बंद कर ड्राइवर को जानवरों की तरह पीटा



इंट्रो-जिस जिले की कमान खुद प्रदेश के वन मंत्री और प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार के हाथों में हो, उसी जिले के बिजुरी में वन विभाग गुंडागर्दी का पर्याय बन चुका है। वन परिक्षेत्र अधिकारी पवन ताम्रकार की दबंगई ने न केवल सरकार के सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी तार-तार कर दिया है। एक खाली ट्रैक्टर को जबरन पकड़ना और उसके चालक के साथ बेरहमी से मारपीट करना क्या अब वन विभाग का नया वर्किंग स्टाइल है?​न्याय की उम्मीद में पिछले 8 दिनों से वन कार्यालय की चौखट पर भूखे-प्यासे बैठे ग्रामीणों का सब्र अब टूट रहा है। चर्चाओं के बाजार में यह कड़वा सच तैर रहा है कि रेंजर की इस तानाशाही को सत्ता के गलियारों से सीधा संरक्षण प्राप्त है। क्या प्रभारी मंत्री व कैबिनेट में वन मंत्री का मौन इस रसूखदार अधिकारी को शह दे रहा है? यह सवाल आज बिजुरी के हर चौक-चौराहे पर चीख-चीख कर पूछा जा रहा है। सरकार की जमकर हो रही किरकिरी के बीच अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता को न्याय मिलता है या रेंजर की 'पहुंच' के आगे लोकतंत्र एक बार फिर घुटने टेकेगा!

अनूपपुर-मुख्यमंत्री मोहन यादव के eसुशासन के दावों को अनूपपुर जिले के बिजुरी वन परिक्षेत्र में खुलेआम चुनौती दी जा रही है। यहाँ रक्षक ही भक्षक बन चुके है। रेंजर पवन ताम्रकार की कार्यप्रणाली ने सरकारी दफ्तर को 'टॉर्चर रूम' में तब्दील कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो (जिसकी पुष्टि हम नहीं करते जो जांच का विषय है) में बंद गेट के पीछे ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई की चीखें सुनाई दे रही हैं लेकिन वन विभाग के आला अफसर और जिले के प्रभारी और कैबिनेट में वन मंत्री मौन साधे बैठे हैं।


वन मंत्री का जिला रेंजर की गुंडागर्दी-न्याय के लिए तरस रही जनता



अनूपपुर जिला जहाँ की कमान स्वयं प्रदेश के वन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार के हाथों में है वहां के बिजुरी वन परिक्षेत्र से आती तस्वीरें सरकार के 'सुशासन' पर गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर रही हैं। क्षेत्र में जोरों पर चल रही चर्चाओं की मानें तो, रेंजर पवन ताम्रकार की कार्यशैली से न केवल आम जनता त्रस्त है, बल्कि यह भी संदेश जा रहा है कि अधिकारी को 'ऊपर' से खुली छूट प्राप्त है। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें न्याय न मिलना रेंजर के रसूख और मंत्री के संरक्षण का परिणाम है जिसकी निष्पक्ष जांच होना अभी बाकी है।


रक्षक बना भक्षक-बंद गेट के पीछे कस्टोडियल टॉर्चर



मानवाधिकारों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धज्जियां उड़ाते हुए रेंजर कार्यालय में ड्राइवर को बंधक बनाकर पीटने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 'रेत चोरी' का जुर्म कबूल करवाने के लिए रेंजर ने कानून को हाथ में लिया। वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद सीसीएफ और डीएफओ की चुप्पी यह संकेत देती है कि या तो सिस्टम पंगु है या फिर भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत ऊपर तक हैं।


खाली ट्रैक्टर बना अपराधी, वसूली का नया खेल



पीड़ित रवि सिंह बघेल के अनुसार उनका ट्रैक्टर (MP65ZA7949) खाली था जिसे बिना किसी सर्च वारंट के उठाया गया। नियम कहते हैं कि वाहन तभी जब्त होगा जब उसमें अवैध वनोपज हो। आरोप है कि ट्रैक्टर छोड़ने के बदले 25 हजार रुपये की मांग की गई। रेंजर का यह अहंकार कि "अपराधी कैसे बनाना है मुझे पता है" विभाग की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।


प्रभारी मंत्री और वन मंत्री के जिले में न्याय को तरसती जनता



अनूपपुर जिले के प्रभारी मंत्री और प्रदेश के वन मंत्री दिलीप अहिरवार के होने के बावजूद पीड़ितों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। न्याय की आस में ग्रामीण और वाहन मालिक पिछले 8 दिनों से बिजुरी वन कार्यालय के बाहर टेंट लगाकर धरने पर बैठे हैं। कड़ाके की ठंड में जनता आक्रोशित है और चर्चा है कि रेंजर को किसी 'बड़ी शक्ति' का संरक्षण प्राप्त है जिससे सरकार की छवि धूमिल हो रही है।


साजिश का जाल- विरोध दबाने को SC-ST एक्ट का सहारा

जब अपनी बर्बरता छिपती नजर नहीं आई तो विभाग ने नया पैंतरा चला। आरोप है कि शांतिपूर्ण धरने को बदनाम करने के लिए रेंजर और उनके अधीनस्थ डिप्टी रेंजर सतीश बैगा द्वारा महिलाओं-बच्चों को आगे कर प्रदर्शनकारियों पर SC-ST एक्ट लगवाने की साजिश रची जा रही है। अधिकारियों का यह  गेम अब जन-चर्चा का विषय बन चुका है।


प्रमुख सचिव को चुनौती- व्हाट्सएप पर जांच की खानापूर्ति

हैरानी की बात है कि जमीनी हकीकत जानने के बजाय विभाग अज्ञात नंबरों से व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर जांच की औपचारिकता पूरी कर रहा है। पीड़ित पक्ष ने प्रमुख सचिव अशोक बर्णवाल (IAS) को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है  कि यदि दोषियों पर कार्रवाई और ट्रैक्टर की रिहाई नहीं हुई तो धरना जारी रहेगा और न्याय के लिए मामला उच्च न्यायालय जाएगा!

पीड़ित व ग्रामीणों का आरोप जनता का सीधा सवाल



पीड़ित व ग्रामीणों का आरोप है कि बिजुरी में वन विभाग की नाक के नीचे असली माफिया सुरक्षित हैं और निर्दोषों को निशाना बनाया जा रहा है। यदि रेंजर का निलंबन नहीं हुआ तो यह जन-आक्रोश भोपाल तक गूंजेगा। साथ ही सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या डीएफओ और सीसीएफ ने रेंजर की तानाशाही को अपनी मूक सहमति दे दी है...? क्या बर्णवाल के सुशासन में 'टॉर्चर' ही नया कानून है....?  मंत्री जी, आप कैबिनेट के वन मंत्री आपके प्रभार वाले जिले में जनता कब तक धरने पर बैठी रहेगी...?


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