भोलगढ़ के जंगल में जंगली हाथी का तांडव, कुचलने से महिला की दर्दनाक मौत, पति और मासूम बेटा गंभीर
महीनों से जिले में विचरण कर रहे हाथी, वन विभाग की घोर लापरवाही से गई एक बेकसूर की जान
दहशत में ग्रामीण, घटना के बाद सात गांवों में अलर्ट जारी, कागजी कार्रवाई तक सीमित जिम्मेदार
इंट्रो :- अनूपपुर जिले में वन विभाग की गहरी नींद और प्रशासनिक लापरवाही ने अंततः एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। महीनों से ग्रामीण जंगली हाथियों के मूवमेंट को लेकर चीख-चीख कर गुहार लगा रहे थे, लेकिन एसी कमरों में बैठे जिम्मेदारों ने एक न सुनी। नतीजा यह हुआ कि रविवार को भोलगढ़ के जंगल में एक हाथी ने खेत से लौट रहे परिवार पर जानलेवा हमला कर दिया। इस खौफनाक घटना में एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसका पति और छह साल का मासूम जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। यह हादसा महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और अधिकारियों की बेरुखी का जीता-जागता सबूत है।
अनूपपुर( प्रकाश सिंह परिहार) :- जिला मुख्यालय से महज आठ किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत बरबसपुर के भोलगढ़ जंगल में रविवार की दोपहर यह खौफनाक मंजर देखने को मिला। चटुआ गांव के पास स्थित अपने खेत से काम खत्म करके समयलाल पाव का परिवार वापस लौट रहा था। पगडंडी मार्ग पर अचानक एक विशालकाय जंगली हाथी ने उन पर धावा बोल दिया। हाथी के इस जानलेवा हमले में 30 वर्षीय प्रेमवती पाव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, उनके 32 वर्षीय पति राममनोज पाव और छह साल के बेटे दीपक पाव को हाथी ने बुरी तरह पटक कर घायल कर दिया।
मौके पर डटा रहा हाथी, ग्रामीणों के शोर से भागा
घटना का मंजर इतना खौफनाक था कि आसपास मौजूद लोगों की रूह कांप गई, क्योंकि हमला करने के बाद भी हाथी वहां से नहीं हटा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह काफी देर तक महिला के शव और घायलों के आसपास ही क्रोधित अवस्था में डटा रहा। जब दहशतजदा ग्रामीणों ने हिम्मत जुटाकर एक साथ भारी शोर मचाया, तब जाकर वह जंगल की ओर खिसका। इसके बाद ही लोग घायलों के करीब पहुंच सके और वन विभाग को इस भीषण त्रासदी की तत्काल सूचना दी गई।
कई महीनों से मंडरा रही थी मौत, सोता रहा वन विभाग
यह हृदयविदारक घटना अचानक नहीं घटी है बल्कि इसके पीछे वन अमले की लंबे समय से चली आ रही घोर लापरवाही है। अनूपपुर जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पिछले कई महीनों से जंगली हाथियों का झुंड लगातार विचरण कर रहा है और फसलें तबाह कर रहा है। ग्रामीण लगातार खतरे की आशंका जताते हुए विभाग से हाथियों को खदेड़ने की गुहार लगा रहे थे। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई भी ठोस रेस्क्यू प्लान बनाने के बजाय केवल मूकदर्शक बने रहना चुना, जिसकी कीमत एक महिला ने अपनी जान देकर चुकाई।
अस्पताल में भर्ती घायल, शव का कराया गया पोस्टमार्टम
हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस और वन विभाग का अमला भारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचा और राहत कार्य शुरू किया। वन विभाग की टीम ने गंभीर रूप से घायल पति राममनोज और मासूम दीपक को भोलगढ़ लाकर तत्काल निजी वाहन से जिला चिकित्सालय भेजा। अस्पताल में दोनों घायलों का सघन उपचार जारी है और उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। वहीं, पुलिस ने मृतका प्रेमवती पाव के क्षत-विक्षत शव को कब्जे में लेकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है।
हादसे के बाद जागी पुलिस-प्रशासन, सात गांवों में अलर्ट
जान जाने के बाद अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए वन विभाग और प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। वन विभाग ने आनन-फानन में भोलगढ़, चटुआ, खांड़ा, पौड़ी, मानपुर, बरबसपुर और सोनटोला सहित आसपास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। मुनादी कराकर ग्रामीणों से रात के समय घरों में रहने और हाथी से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की जा रही है। लेकिन ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है और उनका सवाल है कि समय रहते ये कदम क्यों नहीं उठाए गए?

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