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Friday, April 3, 2026

शहडोल के युवाओं की हुई राजनीतिक हत्या, युवा मोर्चा और मीडिया टीम से जिले का सूपड़ा साफ,राजनीति पर सवाल




 खुद को 'आलाकमान' समझने वाले स्थानीय नेतृत्व और दिग्गजों की खुली पोल, प्रदेश में हैसियत हुई शून्य।

क्या जुगाड़, वसूली और गुटबाजी की भेंट चढ़ी शहडोल भाजपा, संगठन में सिर्फ अपनी-अपनी खींचातानी।

आशीष अग्रवाल की टीम में भी नो एंट्री, स्वयंभू युवा चेहरों के मुंह पर प्रदेश नेतृत्व का करारा तमाचा।

कहा गए शहडोल के तथाकथित ऊंची पैठ वाले वरिष्ठ युवा नेता,नहीं चली नेतागिरी या नहीं हुई जेब गर्म...उठते सवाल

जन चर्चा: व्यक्तिगत स्वार्थ में अंधे हुए सत्ताधारी, झंडा ढोने और दरी बिछाने तक सिमटे जिले के युवा।

रिजवान खान की रिपोर्ट...

शहडोल। मध्य प्रदेश युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी और भाजपा के प्रदेश मीडिया विभाग की सूची जारी होने के बाद शहडोल जिले में सियासी घमासान मच गया है। इन दोनों ही अहम सूचियों से शहडोल का पूरी तरह से सूपड़ा साफ होना स्थानीय दिग्गजों और क्षत्रपों के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। कई होनहार युवा चेहरे इन पदों की दौड़ में पूरी ताकत से शामिल थे, लेकिन जिले के बड़े नेता अपने प्रभाव क्षेत्र से एक भी चेहरे को प्रदेश स्तर पर न तो स्थापित करा पाए और न ही उन्हें कोई पद दिला सके। क्या संगठन में जिले की यह भारी उपेक्षा और युवाओं की सरेआम अनदेखी स्थानीय नेताओं की घोर 'नेतृत्वहीनता' का परिचायक नहीं है? स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि जिले में नेतृत्व का भारी अभाव है और नेतृत्वकर्ता सिर्फ अपने स्वार्थ के बारे में सोच रहे हैं। सत्ता के केंद्र में बैठे इन नेताओं की यह नाकामी अब जिले भर में भारी जनाक्रोश और चर्चा का विषय बन चुकी है।

संगठन में शहडोल की कर दी गई राजनीतिक हत्या

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी और भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल द्वारा जारी मीडिया पैनलिस्टों की सूची ने शहडोल जिले की राजनीतिक हैसियत को सरेआम नंगा कर दिया है। दोनों ही महत्वपूर्ण सूचियों से शहडोल का नाम सिरे से गायब है। यह केवल एक संयोग नहीं, बल्कि प्रदेश संगठन द्वारा शहडोल के युवाओं की राजनीतिक हत्या और घोर उपेक्षा का जीता-जागता प्रमाण है। संभाग मुख्यालय होने के बावजूद संगठन के नक्शे से जिले को पूरी तरह से मिटा दिया गया है।



स्वयंभू 'आलाकमान' और स्थानीय नेतृत्व की नाकामी

इस सूपड़ा साफ स्थिति ने शहडोल भाजपा के स्थानीय नेतृत्व और उन कद्दावर पदाधिकारियों के मुंह पर कालिख पोत दी है, जो खुद को ही पार्टी का 'आलाकमान' समझ बैठे हैं। यहां स्पष्ट रूप से नेतृत्व का अभाव नजर आ रहा है, क्योंकि नेतृत्वकर्ता सिर्फ और सिर्फ अपने बारे में सोच रहे हैं। सत्ता के नशे में चूर इन नेताओं की राजधानी भोपाल में पकड़ और रसूख अब कौड़ी के भाव साबित हो रही है। जब बात जिले के युवाओं को प्रदेश स्तर पर अधिकार दिलाने की आई, तो इन स्वयंभू सूरमाओं की घिग्घी बंध गई। यह सीधे तौर पर साबित करता है कि ये नेता सिर्फ अपनी कुर्सी और रुतबा बचाने में लगे हैं, युवाओं के राजनीतिक भविष्य से इन्हें कोई सरोकार नहीं है।

वसूली, जुगाड़ और व्यक्तिगत स्वार्थ का बोलबाला

जिले के राजनीतिक गलियारों और आम जनता के बीच अब यह जन चर्चा आम हो गई है कि शहडोल भाजपा इन दिनों सिर्फ जुगाड़, व्यक्तिगत स्वार्थ और वसूली के सिस्टम पर चल रही है। संगठन के अंदर कार्यकर्ताओं के हित की कोई बात नहीं बची है, बल्कि हर कोई सिर्फ अपनी-अपनी ओर खींचातानी मचाए हुए है। किसे कहां सेट करना है और अपने करीबियों को कैसे उपकृत करना है, पूरा संगठन तंत्र बस इसी निजी एजेंडे में उलझ कर रह गया है।

स्वयंभू युवा चेहरों की खुली पोल

सबसे शर्मनाक स्थिति उन तथाकथित नेताओं की है जो दिन-रात खुद को युवाओं का मसीहा और 'खास युवा चेहरा' बताकर अपनी पीठ थपथपाते रहते हैं। अपने ही चेलों और वफादार कार्यकर्ताओं को प्रदेश में एक अदद पद तक न दिला पाना इनकी सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता को उजागर करता है। अब शहडोल के आम युवा कार्यकर्ता को यह समझ लेना चाहिए कि भाजपा संगठन में उनकी हैसियत सिर्फ झंडा ढोने और दरी बिछाने तक सीमित कर दी गई है। अगर जिले के युवा अब भी आंखें मूंदकर इन नाकारा नेताओं के पीछे घूमते रहे, तो उनका इस्तेमाल यूं ही होता रहेगा।

मोर्चा अध्यक्ष की कमान पर रार और पूंजीपतियों की घुसपैठ

प्रदेश की सूचियों में सूपड़ा साफ होने के बाद अब जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष की कमान किसे मिलेगी, इसे लेकर जिले में नया कीर्तन चालू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि इस पद की नियुक्ति में भी बड़े पैमाने पर भारी भेदभाव किया जा रहा है और सिर्फ अपने चहेतों को उपकृत करने का प्रयास चल रहा है। बताया जा रहा है कि जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर केवल 'खास लोगों' और 'पूंजीपतियों' को उपकृत करने की साजिश रची जा रही है। धनबल और जुगाड़ के दम पर संगठन पर कब्जा जमाने की इस रस्साकशी ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय नेतृत्व को आम कार्यकर्ताओं के भविष्य और संगठन की विचारधारा से कोई लेना-देना नहीं है।

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