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Saturday, April 4, 2026

देख रहे हैं जिले का हाल मुख्यमंत्री महोदय.....!कलेक्टर साहब की साख पर भारी खनिज सिंडिकेट- अवैध निर्माण ने ली जान, अब रेत खदानों में मौत की बिछ रही बिसात



देख रहे हैं जिले का हाल मुख्यमंत्री महोदय.....!कलेक्टर साहब की साख पर भारी खनिज सिंडिकेट- अवैध निर्माण ने ली जान, अब रेत खदानों में मौत की बिछ रही बिसात



अनूपपुर में सिस्टम का सरेंडर-कागजों पर जीरो टॉलरेंस, जमीन पर माफिया का मैनेजमेंट राज- अवैध खनन कोकई वर्षो से जिले मे टिकी खनिज निरीक्षक निशा वर्मा का संरक्षण 



लाशों पर खड़ा प्रशासन और सीतापुर रेत के गहरे जख्म- क्या चंगेरी सहित संचालित अन्य रेत खदान में भी किसी बलि का इंतजार कर रहे हैं साहब?



कलेक्टर साहब जवाब दें-क्या अखबार की खबरें रद्दी हैं या आपकी कार्रवाई का डंडा कमजोर...?



...... तो क्या घटना के बाद जागती है मोहन सरकार में जिला प्रशासन?



इंट्रो -मुख्यमंत्री मोहन यादव के 'जीरो टॉलरेंस' के दावों की धज्जियां कहीं उड़ रही हैं, तो वह है अनूपपुर। यहाँ खनिज विभाग की मेहरबानी और रेत ठेकेदार 'एसोसिएट कॉमर्स' की मनमानी ने नदियों को 'मौत के कुएं' में तब्दील कर दिया है। पूर्व में सीतापुर खदान में दो मासूमों की जलसमाधि के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा के लंबे कार्यकाल और 'विशेष संरक्षण' के चलते आज सोन और केवई नदियों का कलेजा छलनी किया जा रहा है। कोतमा की हृदय विदारक घटना ने साफ कर दिया है कि जब रक्षक ही भ्रष्टाचार की चादर ओढ़ लें, तो आम जनता की जान की कीमत महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाती है।


अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार)। जिले के मुखिया हर्षल पंचोली के कार्यकाल में अनूपपुर खनिज राजस्व में भले ही पिछड़ गया हो, लेकिन अवैध उत्खनन और भ्रष्टाचार में 'अव्वल' नजर आ रहा है। एक तरफ कोतमा में अवैध निर्माण की लापरवाही ने मासूमों का खून बहाया, तो दूसरी तरफ एसोसिएट कॉमर्स के गुर्गे एनजीटी के नियमों को ठेंगा दिखाकर नदियों में पोकलेन से पाताल खोद रहे हैं। सालों से जिले में जमी खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल अब चीख-चीख कर कह रहे हैं कि अनूपपुर में 'सिस्टम' ठेकेदार की तिजोरी का गुलाम बन चुका है। क्या प्रशासन अगली किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा?

प्रशासन को बलि का इंतज़ार? कोतमा में मातम, चंगेरी मानपुर में मौत की तैयारी

कोतमा में अवैध निर्माण ने मासूमों का खून बहाया तो पूरा प्रशासनिक अमला रात भर रेस्क्यू और संवेदना करने पहुँचा । लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन को केवल हादसे और लाशों का इंतज़ार रहता है?एक तरफ कोतमा में चीख-पुकार मची है तो दूसरी तरफ एसोसिएट कॉमर्स के रेत माफिया सोन और केवई नदियों में मौत के 'गहरे कुएं' खोद रहे हैं। सीतापुर खदान में दो बच्चों की डूबने से हुई मौत की यादें आज भी ताजा हैं लेकिन  खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा और कलेक्टर हर्षल पंचोली की चुप्पी इशारा कर रही है कि नियम विरुद्ध चल रही हैवी पोकलेन मशीनों को सरकारी अभयदान प्राप्त है।अखबारों में लगातार छप रही चेतावनियों को रद्दी समझने वाले अधिकारी शायद तब जागेंगे, जब चंगेरी या किसी अन्य खदान में कोई और गरीब का लाल रेत की भेंट चढ़ जाएगा। कलेक्टर साहब....! संवेदना जताने मौके पर पहुँचने से बेहतर है कि समय रहते इन खदानों का भौतिक सत्यापन कर माफिया के रसूख को कुचला जाए। वरना याद रखिये अगली मौत की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन की होगी!


चंगेरी मानपुर में नदियों का 'कत्लेआम', पोर्टल बना लूट का हथियार

जिले में मुख्यमंत्री मोहन यादव की भ्रष्टाचार मुक्त नीति का सरेआम गला घोटा जा रहा है। खनिज विभाग और रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स के बीच ऐसा नापाक गठबंधन हुआ है कि सरकारी पोर्टल ही अब लूट का लाइसेंस बांट रहा है। डिजिटल इंडिया के दौर में यहाँ डिजिटल डकैती चल रही है। ई-टीपी (e-TP) कदमसारा या पाषान खदान की काटी जा रही है, जबकि रेत का अवैध उत्खनन चंगेरी (कोतमा) से हो रहा है। वाहन संख्या MP65GA1110 जैसे दर्जनों ट्रक इस सिंडिकेट का जीवंत प्रमाण हैं। जब गुलाबी चालान पर लोडिंग पॉइंट चंगेरी और पोर्टल पर 'पाषान' दर्ज हो, तो साफ है कि माइनिंग विभाग ने अपनी साख ठेकेदार की तिजोरी में गिरवी रख दी है।


 रक्षक ही भक्षक- 13 की क्षमता पर 29 का पास, सड़कों और राजस्व की बलि

भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा तो खनिज विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर दिखती है। जिस डंपर की आधिकारिक क्षमता महज 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे विभाग का पोर्टल 25 से 29 क्यूबिक मीटर तक के ओवरलोड पास धड़ल्ले से जारी कर रहा है। यह तकनीकी चूक नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व चोरी है। ओवरलोडिंग को मिली इस 'सरकारी मुहर' ने जिले की सड़कों को बर्बाद कर दिया है और शासन को करोड़ों के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब एक आम नागरिक मोबाइल ऐप से यह फर्जीवाड़ा देख सकता है, तो भारी-भरकम वेतन लेने वाला खनिज विभाग अंधा और बहरा क्यों बना हुआ है?

 NGT के नियमों की हत्या, मौत का कुआं खोद रहा ठेकेदार

सोन और केवई नदियों के सीने को हैवी पोकलेन मशीनों से छलनी किया जा रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों को ठेंगे पर रखकर नदियों के बीचों-बीच गहरे कुएं खोद दिए गए हैं, जो भविष्य में होने वाली जनहानि को खुला निमंत्रण दे रहे हैं। पूर्व में सीतापुर में डूबने से दो बच्चों की मौत के बावजूद प्रशासन ने सबक नहीं लिया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का यह उल्लंघन लीज निरस्त करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन ठेकेदार के रसूख के आगे उड़नदस्ता रात के अंधेरे में 'शून्य' साबित हो रहा है। प्रशासन की यह मौन सहमति नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रही है। जिसमें सीधे-सीधे कई वर्षों से टिकी खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा के क्षेत्र में या घटना होना आम बात माना जा रहा है जहां अवैध खनन होता है वहां खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा का विशेष योगदान होता है इनकी टूल डायरी व निरीक्षण की विशेष टीम गठित करने की हिम्मत प्रशासन के पास नहीं है क्योंकि अवैध खनन के जिम्मेदार हुआ रासुकदारों का विशेष संरक्षण इनको प्राप्त है हम इसलिए कह रहे हैं कि समय रहते माइनिंग विभाग प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के पास है यदि समय रहते ध्यान नहीं दिए तो सीतापुर रेत खदान के तर्ज पर दूसरी बड़ी अनहोनी हुई तो कोतमा में हुई घटना की तरह संवेदना ही रह जाएगा और किसी गरीब का घर उजड़ जाएगा!

 हादसों का इंतजार करता प्रशासन- क्या खून बहने के बाद ही जागेगा तंत्र..?

जिले में नियम विरुद्ध बिल्डिंग निर्माण और अवैध प्लाटिंग का खेल चरम पर है। हाल ही में कोतमा में बिल्डिंग ढहने से हुई मौत और रेस्क्यू ऑपरेशन इस प्रशासनिक लापरवाही का ताजा उदाहरण है। यदि कलेक्टर और मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने पूर्व में अखबारों के माध्यम से उजागर हुए अवैध निर्माणों पर ध्यान दिया होता तो शायद आज यह नौबत न आती। क्या जिला प्रशासन प्रमुख रूप से कलेक्टर और प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार केवल मौतों के बाद शोक संवेदना जताने के लिए हैं? रेत माफिया द्वारा खोदे जा रहे खाईनुमा कुएं और अवैध निर्माणों के खिलाफ कब FIR होगी और कब इन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा? जनता अब मुख्यमंत्री से पूछ रही है कि क्या 'मैनेजमेंट' के आगे संविधान हार चुका है?


कोतमा घटना मे युद्ध स्तर पर जारी है बचाव कार्य

घटना की सूचना विधायक मध्य प्रदेश शासन के मंत्री दिलीप जायसवाल को मिलते ही जिले के कलेक्टर हड़ताल पंचोली व जिम्मेदार अधिकारियों को राहत कार्य के निर्देश दिए गए और घटनास्थल पर स्वयं पहुंचे मौके पर कलेक्टर हर्षल पंचोली और  पुलिस अधीक्षक मोतीउर्र रहमान भारी पुलिस बल के साथ मौजूद हैं। मलबे में दबे अन्य लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है।राहत कार्य में न केवल सरकारी तंत्र बल्कि निजी कंपनियों की टीमें भी जुटी हुई हैं NDRF की टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है। प्राइवेट कोल माइंस (GMS) और अदानी कंपनी की रेस्क्यू टीमें। SECL के अंतर्गत हसदेव एवं जमुना कोतमा की अनुभवी रेस्क्यू टीमें मौके पर निरंतर कार्य कर रही हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासनिक तौर पर पूरी तरह राहत कार्य में लगी हुई है!



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