अनूपपुर में अवैध खनन के सिंडिकेट एवं जीवन दायनी नदियों पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ कल से 'जल सत्याग्रह'
'केवई बचाओ' के नारे के साथ उतरेगी जनता खनिज व कलेक्टर की चुप्पी ने बढ़ाई रार
नियमों को ठेंगा दिखाकर नदियों का सीना छलनी करने वाले सिस्टम के विरुद्ध अब आर-पार की होगी जंग
इंट्रो:-अनूपपुर जिले में रेत के अवैध कारोबार ने अब एक भयावह 'महाघोटाले' का रूप ले लिया है, जहाँ खनिज विभाग और प्रशासन की मिलीभगत से नदियों का अस्तित्व दांव पर है। कदमसारा की अनुमति पर चंगेरी से रेत का अवैध उत्खनन और ई-टीपी पोर्टल में की जा रही हेराफेरी ने धैर्य का बांध तोड़ दिया है। तंत्र की इस खामोशी के खिलाफ कल से जिले के "केवई बचाओ" का उद्घोष करते हुए नदियों के बीच 'जल सत्याग्रह' शुरू करने जा रहे हैं। यह आंदोलन न केवल माफियाओं के खिलाफ है बल्कि उन सफेदपोश अधिकारियों के विरुद्ध भी है जिन्होंने अपनी जेबें भरने के लिए एनजीटी (NGT) के सख्त नियमों को रद्दी के ढेर में तब्दील कर दिया है।
अनूपपुर:-जिले की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक संपदा को माफियाओं ने अपना चारागाह बना लिया है, जहाँ प्रशासनिक संरक्षण के बिना एक पत्ता भी नहीं हिल सकता। यहाँ केवई और अन्य सहायक नदियों के बीचों-बीच पोकलेन मशीनें उतारकर पर्यावरण के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है, उसने जलस्तर और जलीय जीवन को गंभीर संकट में डाल दिया है। कोतमा के चंगेरी क्षेत्र में जिस तरह से पोर्टल के जरिए कागजों में हेरफेर कर कई करोड़ोंया लगभग अरबो का राजस्व चूना लगाया जा रहा है, वह किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। अब जब प्रशासन ने इस लूट पर आंखें मूंद ली हैं, तो स्थानीय युवाओं ने खुद मैदान में उतरकर इस प्राकृतिक डकैती को रोकने का फैसला किया है, जिसकी गूंज कल जल सत्याग्रह के रूप में सुनाई देगी।
पोर्टल का प्रपंच- अस्तित्व में आने से पहले ही जारी हो गई ई-टीपी
खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल उस समय खड़ा हुआ जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की अनुमति मिलने से 20 दिन पहले ही ई-टीपी जारी कर दी गई। यह जादुई प्रक्रिया बताती है कि माफियाओं के पास विभाग की चाबियाँ हैं, जहाँ बिना भौतिक सत्यापन के ही खनन की हरी झंडी दे दी गई। ई-टीपी संख्या 5483709102 इस भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। कागजों पर नियम-कायदे दिखाए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में सिर्फ अवैध वसूली और लूट का खेल चल रहा है।
लोकेशन का खेल- कदमसारा के नाम पर चंगेरी में मची है लूट
माफियाओं ने तकनीक का इस्तेमाल चोरी छिपाने के लिए किया है, जहाँ परमिशन कदमसारा खदान की दिखाई जाती है और उत्खनन चंगेरी (कोतमा) से किया जा रहा है। वाहन क्रमांक MP65GA1110 की जीपीएस लोकेशन और जारी टीपी का मिलान करने पर इस 'लोकेशन शिफ्टिंग' घोटाले का पर्दाफाश आसानी से हो जाता है। यह सीधा-सीधा राजस्व की चोरी है, जिसमें जीपीएस मॉनिटरिंग सेल की भूमिका भी संदिग्ध नजर आती है। प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा यह 'डिजिटल फ्रॉड' अब आम जनता की समझ में आ चुका है, जिससे आक्रोश चरम पर है।
क्षमता से प्रहार- ओवरलोडिंग के कारण सड़कें और पुल हुए जर्जर
नदियों से रेत निकालने के बाद उन्हें परिवहन करने वाले डंपरों में क्षमता से दोगुना माल लादा जा रहा है, जिसे पोर्टल द्वारा आधिकारिक तौर पर वैध बनाया जा रहा है। 13.49 क्यूबिक मीटर की क्षमता वाले डंपरों में 29 क्यूबिक मीटर रेत की एंट्री पोर्टल पर कैसे हो रही है, यह जांच का विषय है। इस ओवरलोडिंग ने जिले की मुख्य सड़कों और पुल-पुलियों की कमर तोड़ दी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। खनिज विभाग की मौन सहमति ने माफियाओं को इतना बेखौफ कर दिया है कि वे अब कानून को अपनी जेब में लेकर घूम रहे हैं।
केवई बचाओ आंदोलन-कल से पानी में उतरकर जवाब मांगेगी जनता
लगातार शिकायतों के बाद भी जब कलेक्टर और खनिज अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, तो जनता ने 'जल सत्याग्रह' का मार्ग चुना है। 'केवई बचाओ' नारा केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि मरती हुई नदियों को बचाने की आखिरी पुकार है, जिसमें युवा शांतिपूर्ण तरीके से नदी के पानी में खड़े होकर विरोध दर्ज कराएंगे। उनकी मांग स्पष्ट है कि दोषी अधिकारियों पर तत्काल जांच व कार्रवाई की जाए और पोकलेन मशीनों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।

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