विकास की 'प्यास' और हमारी 'सूखी' कि़स्मत बधाई हो कोतमा विधानसभा के वासियों....! आपके हिस्से का पानी अब 'सेलिब्रिटी' बनने जा रहा है। केवई नदी पर बन रहे इस स्टॉपडैम के साथ ही आपके सुनहरे भविष्य की "सूखी" पटकथा लिखी जा चुकी है।
1. अडानी जी का 'परोपकार'
कहते हैं प्यासे को पानी पिलाना पुण्य का काम है लेकिन यहाँ तो पूरा का पूरा 'पावर प्लांट' ही प्यासा है! अडानी जी की कंपनी को बिजली बनानी है और बिजली के लिए चाहिए पानी। अब बेचारा कोतमा विधानसभा का आम आदमी क्या करेगा पानी का...? वैसे भी ज्यादा पानी पीना सेहत के लिए हानिकारक है कम पिएंगे तो 'फिल्टर' कम करना पड़ेगा।
2. नदी की 'कैद' और हमारा 'मौन'
केवई नदी अब आजाद नहीं रहेगी उसे 'स्टॉपडैम' की हथकड़ियों में जकड़ा जा रहा है। यह विकास की वह गंगा है जो उल्टी बह रही है। हमें गर्व होना चाहिए कि हमारी नदी का पानी घरों के नलों में जाने के बजाय बड़ी-बड़ी चिमनियों से धुआं बनकर उड़ने की तैयारी कर रहा है। आखिर धुआं देखना पानी पीने से ज्यादा 'रोमांटिक' जो है!
3. भविष्य का मैन्यू कार्ड
आने वाले सालों में कोतमा विधानसभा के लोग मेहमानों का स्वागत कुछ इस तरह करेंगे-
नमस्ते.............! बैठिए, ठंडा पानी तो नहीं है क्या आप अडानी प्लांट से निकली ताजी गर्म राख (ऐश) लेना पसंद करेंगे....? या फिर प्रदूषण की शुद्ध 'कार्बन डाईऑक्साइड' का एक कश....?
4. चेतावनी का अलार्म
आज अगर हम खामोश हैं तो यकीन मानिए कल हमारी आवाज भी नहीं निकलेगी-इसलिए नहीं कि हम डरपोक हैं बल्कि इसलिए क्योंकि गला सूखकर कांटा हो चुका होगा। जब नदी का गला घोंटा जाएगा तो प्यास आपके दरवाजे पर दस्तक देगी। तब न अडानी जी का पावर प्लांट आपको पानी देगा और न ही प्रशासन की फाइलें आपकी प्यास बुझाएंगी।
जागिए वरना............... P?
अभी तो सिर्फ स्टॉपडैम बन रहा है कल आपके आंसुओं पर भी टैक्स लग सकता है क्योंकि वो भी तो पानी हैं। अगर आज आपके स्वर ऊंचे नहीं हुए, तो कल सिर्फ खाली बाल्टियां बजेंगी और उन बाल्टियों के शोर में आपकी शिकायतें दब जाएंगी।
नोट -याद रखिये बिजली की चमक में अगर नदी खो गई, तो अंधेरा दीयों से नहीं आपकी प्यास से होगा।


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