मासूमों की सांसें दांव पर- अनूपपुर सहित पूरे शहडोल संभाग में बच्चों के लिए वेंटिलेटर एम्बुलेंस का अभाव..❓
गंभीर हालत में नवजातों को शहडोल और बिलासपुर रेफर करना मजबूरी, सामान्य एम्बुलेंस से लंबा सफर तय करने में बढ़ जाता है खतरा..
अनूपपुर- जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी अब बेहद चिंताजनक रूप लेती जा रही है। खासकर नवजात और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के इलाज को लेकर व्यवस्था में बड़ी खामियां सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि अनूपपुर ही नहीं बल्कि पूरे शहडोल संभाग में आज तक बच्चों के लिए वेंटिलेटर सुविधा से लैस एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं हो सकी है। ऐसे में आपात स्थिति में मासूमों की जिंदगी दांव पर लग जाती है। जिला अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में जब किसी नवजात शिशु की हालत अत्यंत गंभीर हो जाती है, तो डॉक्टरों को उसे तत्काल बेहतर इलाज के लिए शहडोल या छत्तीसगढ़ के बिलासपुर मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ता है। लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन बच्चों को ले जाने के लिए वेंटिलेटर युक्त विशेष एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में सामान्य एम्बुलेंस के सहारे ही नवजातों को लंबी दूरी तक ले जाया जाता है, जिससे रास्ते में उनकी हालत और ज्यादा बिगड़ने का खतरा बना रहता है।
वेंटिलेटर सपोर्ट, ऑक्सीजन कंट्रोल मॉनिटरिंग की सख्त जरूरत
डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का भी मानना है कि नवजात शिशुओं की स्थिति कई बार बेहद नाजुक होती है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित रूप से रेफर करने के लिए वेंटिलेटर सपोर्ट, ऑक्सीजन कंट्रोल और लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। लेकिन जिले में इस तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई बार रास्ते में ही बच्चों की सांसें थम जाने का खतरा बना रहता है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी खामी को भी उजागर करती है।
दूरदराज इलाकों में कभी सुविधा
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की परेशानी इससे और बढ़ जाती है। जिले के कई गांव ऐसे हैं जहां से जिला अस्पताल तक पहुंचने में ही घंटों लग जाते हैं। जब ऐसे इलाकों से किसी नवजात को गंभीर हालत में रेफर किया जाता है, तो समय पर इलाज मिल पाना और भी मुश्किल हो जाता है। परिजनों को उम्मीद रहती है कि एम्बुलेंस में जीवन रक्षक सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन वेंटिलेटर जैसी अहम सुविधा न होने से उनकी चिंता और बढ़ जाती है।
क्षेत्र के स्थानीय लोगों एवं समाजसेवी ने दो वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस व्यवस्था की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि जिले में कम से कम एक या दो वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस की व्यवस्था कर दी जाए तो कई बच्चों की जान बचाई जा सकती है। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए यह सुविधा बेहद जरूरी है, क्योंकि नवजात शिशुओं को रेफर करते समय हर मिनट कीमती होता है।गौरतलब है कि अनूपपुर जिला आदिवासी बहुल और भौगोलिक रूप से बड़ा क्षेत्र है, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ही सीमित हैं। ऐसे में नवजात शिशुओं के लिए विशेष एम्बुलेंस की व्यवस्था न होना प्रशासन की गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि लंबे समय से मांग उठने के बावजूद शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस दिशा में अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर कब ध्यान देंगे। क्या जिले के मासूमों को सुरक्षित इलाज के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा, या फिर प्रशासन जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा। लोगों को उम्मीद है कि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए जल्द वेंटिलेटर युक्त एम्बुलेंस जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराएंगे, ताकि आपात स्थिति में नवजात शिशुओं को समय पर सुरक्षित और बेहतर इलाज मिल सके।

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