अनूपपुर यातायात का बड़ा खेल जय-वीरू की जोड़ी दो आरक्षकों के भरोसे 'वसूली' का साम्राज्य, साहब बने धृतराष्ट्र
शादी के सीजन में जाम से जनता त्रस्त, एंट्री और डायरी के खेल में यातायात पुलिस मस्त
प्रभारी बने धृतराष्ट्र...! क्या ईमानदार एसपी की साख को मिट्टी में मिला रहे हैं ये दो प्यादे और अधिकारी..?
इंट्रो-नगर की यातायात व्यवस्था ठप्प, अधिकारी बने धृतराष्ट्र नगर में शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है और इसके साथ ही अनूपपुर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है। ऐसे में घर से निकला आम आदमी हर चौराहे में जाम में फँस जा रहा है। मैरिज गार्डन के सामने या प्रमुख चौराहों पर जाम में फँसना अब आम हो चुका है, जिससे आम आदमी का मिनटों का काम घंटों में हो रहा है। लेकिन यातायात विभाग के अधिकारियों के कान में जूं भी नहीं रेंग रही है। बताया जाता है कि विभाग में अलग-अलग वसूलीबाज अपना-अपना उल्लू सीधा करने में व्यस्त हैं। रेत, मिट्टी हो या गिट्टी की गाड़ी व बलकर सभी पर ₹5,000 महीने की दिहाड़ी लादी जा रही है जिसमें आला अधिकारी धृतराष्ट्र बन गए हैं। जन चर्चा के आधार पर ऐसा प्रतीत होता है कि यातायात पुलिस अपने मूल दायित्व से भटककर यातायात व्यवस्था सुरक्षित करने के स्थान पर अपनी निजी उद्देश्यों की पूर्ति में लग गई है।
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार ) - नगर की यातायात व्यवस्था इन दिनों भगवान भरोसे है। एक ओर जहाँ शादी-ब्याह के सीजन में आम आदमी हर चौराहे पर घंटों जाम में सिसक रहा है वहीं दूसरी ओर यातायात विभाग के लिए यह सीजन 'कमाई' का उत्सव बन गया है। जन चर्चा है कि विभाग के जिम्मेदार अधिकारीयों के आंखों में धूल झोक कर ईमानदारी का गाना सुनाते हुए हाईवे में दो आरक्षकों के भरोसे रोजाना वसूली का खेल खेला जा रहा है जिससे ईमानदार जिम्मेदार अधिकारी की छवि भी जमकर धूमिल हो रही है जो जन चर्चा का विषय भी बना हुआ है जबकि पर्दे के पीछे वसूली का एक संगठित सिंडिकेट काम कर रहा है।
आरक्षकों के कंधों पर 'उगाही' का दारोमदार
सूत्रों की मानें तो अनूपपुर यातायात व्यवस्था की कमान सड़कों पर ट्रैफिक सुधारने के बजाय दो खास आरक्षकों एवं प्रधान आरक्षक के इर्द-गिर्द सिमट गई है। बताया जाता है कि ये आरक्षक ही विभाग के 'कलेक्शन एजेंट' के रूप में सक्रिय हैं। पूरे नगर और हाईवे की अवैध वसूली का लेखा-जोखा इन्हीं के इशारों पर तय होता है। साहब भले ही नए हों लेकिन इन आरक्षकों का पुराना नेटवर्क 'जुगाड़' और 'एंट्री' के खेल को बखूबी अंजाम दे रहा है।
दुबे साहब को प्रभार मिलते ही जोरों पर वसूली की चर्चा
यातायात थाना प्रभारी अनूपपुर के बदलते उसके बाद से वसूली की चर्चा जमकर जोरों से आम है। मुखबिरों के आधार पर यातायात पुलिस अनूपपुर पर आए दिन हाइवे मे चेकिंग लगाकर अवैध वसूली करने के आरोप लगाए जाते हैं। बताया जाता है कि इस समय वसूली का काम जोरों पर जारी है और विशेष रूप से उन भारी वाहनों से एंट्री वसूली जाती है जो अनूपपुर शहर के अंदर घुसते हैं। जन चर्चा है कि कमर्शियल और जुगाड़ के वाहनों की गिनती तक ही विभाग सिमटा हुआ है।
'वसूली डायरी' और मासिक नजराने का संगठित खेल
सूत्रों के अनुसार, यातायात विभाग में वसूली का काम कुछ कर्मचारीयों की विशेष संगठित रूप ले चुका है। बताया जाता है कि यातायात प्रभारी के पास एक कथित 'खास डायरी' है। इस डायरी में मोजर वेयर और मुख्यालय व हाइवे की ओर जाने वाले और वहाँ से आने वाले सभी भारी मालवाहक वाहनों के नाम, नंबर और उनके मालिकों की सूची दर्ज है। इसी सूची के आधार पर वाहनों से कथित तौर पर मासिक नजराना वसूला जाता है। आरोप है कि हाईवे पर भी ऐसे वाहनों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता है जिनसे प्रतिमाह ₹5,000 से ₹8,000 तक की राशि ली जाती है, जिससे उन्हें बेखौफ नो-एंट्री ज़ोन में चलने की अप्रत्यक्ष अनुमति मिल जाती है।
हाईवे पर वसूली की चर्चा- कप्तान की ईमानदारी पर बट्टा
यातायात पुलिस अनूपपुर का मुख्य टारगेट नेशनल हाईवे 43 में दौड़ रहे कमर्शियल वाहन होते हैं जिन्हें जांच के नाम पर रोका जाता है। गौर तलब है कि बीते दिनों एक वीडियो पूरे भारत में वायरल हुआ था जिसमें ड्राइवर ने यातायात पुलिस अनूपपुर पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि कप्तान (वरिष्ठ अधिकारी) की कार्यशैली ऐसी है कि उन पर सीधा आरोप लगाना व्यर्थ है, वह निहायती ईमानदार माने जाते हैं। लेकिन चर्चा रहती है कि उनकी इस ईमानदारी पर यातायात पुलिस कहीं न कहीं बट्टा लगाती प्रतीत हो रही है। बताया जाता है कि हाईवे पर वसूली का यह खेल जोरों पर चलता रहता है। यह भी ज्ञात होता है कि यातायात पुलिस प्रतिदिन चेकिंग लगाती है और बड़े वाहन रोके जाते हैं और यह खेल लंबे समय से चला आ रहा है।
शंकर मंदिर चौराहे पर हर घंटो जाम
अनूपपुर शहर के सबसे व्यस्त और हृदय स्थल माने जाने वाले शंकर मंदिर चौराहे के पास शाम के बाद यातायात जाम की समस्या एक रोज़मर्रा का सिरदर्द बन चुकी है। यह चौराहा शहर की कई मुख्य सड़कों को जोड़ता है जिसके कारण शाम के समय यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है लेकिन यातायात व्यवस्था संभालने वाले कर्मियों की लापरवाही और अनुपस्थिति इस समस्या को और भी गंभीर बना देती है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम 5 बजे के बाद यहाँ हर घंटे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। अक्सर देखने में आता है कि जाम लगने के बावजूद यातायात पुलिस के जवान मौके पर मौजूद नहीं होते हैं।
नो एंट्री में बेधड़क दौड़ते हैं भारी वाहन
अनूपपुर से बस स्टैंड के अलावा अन्य स्थानों पर, जहाँ स्टेशन है वहां आसपास भारी वाहनों का प्रवेश निषेध है। शहर की मुख्य सड़कों और रिहायशी इलाकों में नो-एंट्री के सख्त नियम होने के बावजूद, रेत, गिट्टी (पत्थर), और मिट्टी लेकर आने वाले भारी मालवाहक छोटे वाहन हैवी ट्रेफिक के दौरान दिन-रात बेखौफ घूम रहे हैं। नियम विरुद्ध तरीके से नगर के अंदर इन बड़े वाहनों के प्रवेश से जहाँ सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था खतरे में है वहीं जन चर्चा में यातायात पुलिस की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिकों का कहना है कि इसके बावजूद पुलिसकर्मी इन नियमों के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं करते हैं।
जनता की मांग- वरिष्ठ अधिकारी लें संज्ञान
शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था और वसूली के संगठित नेटवर्क की चर्चाओं ने आम जनता को परेशान कर दिया है। नागरिकों का स्पष्ट मानना है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से निजी लाभ का जरिया बन चुकी है। अनूपपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/कप्तान को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि वसूली के कथित खेल में शामिल कर्मचारियों और अधिकारियों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए ताकि यातायात व्यवस्था को निजी उद्देश्यों की पूर्ति के बजाय जन सुरक्षा के मूल दायित्व की ओर वापस लाया जा सके।


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