निगवानी के जंगलों पर तस्करों का साया-रात के अंधेरे में हो रही नीलगिरी (लिप्टिस) की अवैध कटाई, चचाई पेपर मिल तक पहुंच रही खेप
कोतमा/अनूपपुर-क्षेत्र की वन संपदा पर लकड़ी तस्करों की नजरें गड़ गई हैं। कोतमा के आसपास के जंगलों, निगवानी क्षेत्र और वन विभाग के विभिन्न बीटों से इन दिनों बड़े पैमाने पर नीलगिरी (लिप्टिस) के पेड़ों की अवैध कटाई की खबरें सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस पूरी तस्करी को अंजाम देने के लिए 'रात के अंधेरे' और 'छोटे वाहनों' का एक सुनियोजित नेटवर्क काम कर रहा है।
पिकअप वाहनों से तस्करी का नया पैंतरा
पकड़े जाने के डर से तस्कर अब बड़े ट्रकों के बजाय पिकअप जैसे छोटे मालवाहक वाहनों का सहारा ले रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, रात के सन्नाटे में इन पेड़ों को काटकर तुरंत छोटे वाहनों में लाद दिया जाता है, जिससे गश्ती दल की नजरों से बचना आसान हो जाता है। ये वाहन मुख्य सड़कों के बजाय ग्रामीण और कच्चे रास्तों का उपयोग कर रहे हैं।
चचाई स्थित पेपर मिल है मुख्य ठिकाना?
क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध रूप से काटी गई इन लकड़ियों को खपाने के लिए चचाई (अमलाई) स्थित पेपर मिल का इस्तेमाल किया जा रहा है। बिना वैध दस्तावेजों और ट्रांजिट पास (TP) के, रात के वक्त लकड़ियों की खेप मिल तक पहुंचाई जा रही है।
अंधेरे में सिस्टम की सुस्ती
वन विभाग और निगवानी क्षेत्र के जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर रात में जंगलों की सुरक्षा और नाकों पर सघन जांच की जाए, तो इन छोटे वाहनों को आसानी से पकड़ा जा सकता है। लगातार हो रही इस कटाई से न केवल राजस्व की हानि हो रही है, बल्कि पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।अब देखना यह है कि क्या वन विभाग और स्थानीय प्रशासन इन छोटी गाड़ियों के पहियों को रोकने के लिए कोई सख्त कदम उठाता है, या फिर तस्करों का यह 'काला खेल' यूं ही जारी रहेगा।

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