भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा वार्ड 11 का विकास कार्य- एस्टीमेट के विपरीत नाली निर्माण कार्य
बिना 40 एमएम गिट्टी के ही बिछा दिया नाली का बेस, एस्टीमेट को दिखाया ठेंगा
80 करोड़ के महा-बजट में कमीशनखोरी का खेल, जिम्मेदार अधिकारियों ने मूंदी आंखें
इंट्रो :-नगर पालिकाबिजुरी क्षेत्र में विकास के नाम पर सरकारी धन का खुलेआम बंदरबांट हो रहा है।वार्ड क्रमांक 11 में चल रहा नाली निर्माण कार्य पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर ठेकेदार द्वारा सरेआम घटिया निर्माण किया जा रहा है।जनता के टैक्स के पैसों की इस बर्बादी पर जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह मौन साधे हुए हैं।कमीशनखोरी के इस खुले खेल ने नगर पालिका के दावों की पोल खोलकर रख दी है।इस मनमानी से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश और प्रशासनिक व्यवस्था के प्रति तीखा रोष है।
अनूपपुर:- नगर पालिका बिजुरी क्षेत्र के अंतर्गत विकास कार्यों के लिए लगभग 80 करोड़ का महा-बजट स्वीकृत है।इस भारी-भरकम राशि से शहर के विभिन्न वार्डों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाना था।लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत और अत्यंत चिंताजनक नजर आ रही है।वार्ड 11 में चल रहे नाली निर्माण में गुणवत्ता से किया गया समझौता इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।स्थानीय नागरिकों ने जब निर्माण कार्य की जमीनी हकीकत देखी, तो उनके होश उड़ गए।लाखों की लागत से बन रही यह नाली पहली बारिश भी झेलने की स्थिति में नहीं दिख रही है!
तकनीकी मापदंडों की उड़ाई जा रही धज्जियां
निर्माण कार्य में नियमों और तकनीकी गाइडलाइंस का रत्ती भर भी पालन नहीं किया जा रहा है।नियमानुसार नाली के बेस को मजबूती देने के लिए 40 एमएम गिट्टी का उपयोग अनिवार्य होता है।परंतु ठेकेदार ने लागत बचाने के चक्कर में बिना गिट्टी डाले ही सीधे कंक्रीट मिक्स डाल दिया।इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों को ताक पर रखकर यह पूरा ढांचा खड़ा किया जा रहा है।इस लापरवाही के कारण नाली का आधार अंदर से खोखला और बेहद कमजोर रह गया है।या फिर सीधे तौर पर सरकारी गाइडलाइंस की अवहेलना और जनता के साथ धोखा है।
अधिकारियों की 'मौन सहमति' और गायब मॉनिटरिंग
इतने बड़े स्तर पर हो रहे घटिया निर्माण के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुँचा।उपयंत्री और तकनीकी टीम ने काम शुरू होने से लेकर अब तक साइट का निरीक्षण नहीं किया है।ऐसा लगता है कि पूरी तकनीकी टीम ने एअर कंडीशंड कमरों से ही काम को मंजूरी दे दी है।नियमों के अनुसार हर चरण पर जांच होनी चाहिए थी, जो यहाँ पूरी तरह नदारद दिखी।अधिकारियों का यह लापरवाह रवैया ठेकेदार के हौसलों को और अधिक बुलंद कर रहा है।बिना किसी डर और रोक-टोक के धड़ल्ले से पीलापन और घटिया सामग्री का इस्तेमाल जारी है।
प्रतिशत के खेल में ठगी गई वार्ड की जनता
स्थानीय गलियारों में चर्चा है कि इस घटिया निर्माण के पीछे मोटा कमीशन काम कर रहा है।सूत्रों का दावा है कि ठेकेदार द्वारा संबंधित विभाग के जिम्मेदारों को 'तय प्रतिशत' पहुँचाया जा चुका है।यही कारण है कि वार्डवासियों की बार-बार की शिकायतों को भी सिरे से नजरअंदाज किया गया।जनता के खून-पसीने की कमाई से दिए गए टैक्स का इस्तेमाल अफसरों की जेबें भरने में हो रहा है।मजूदती के नाम पर सिर्फ ऊपरी हिस्से पर सीमेंट की पतली परत चढ़ाकर लीपापोती की गई है।इस भ्रष्टाचार के खेल में आम जनता खुद को ठगा हुआ और असहाय महसूस कर रही है!
प्रशासन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।क्या उच्च अधिकारी इस खुले भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने का साहस दिखा पाएंगे?बिना किसी गुणवत्ता प्रमाण पत्र के ठेकेदार के बिलों का भुगतान आखिर किस आधार पर होगा?इस संबंध में मुख्य नगरपालिका अधिकारी से संपर्क का प्रयास करने पर उनका फोन बंद मिला।यदि समय रहते इस घटिया निर्माण को नहीं रोका गया, तो यह नाली कुछ ही महीनों में धंस जाएगी।अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कोई सख्त कदम उठाता है या भ्रष्टाचार का खेल जारी रहेगा।




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