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Saturday, January 10, 2026

अमृत भारत मिशन पर अफसरशाही का हमला- सरकार की मंशा पर पानी फेरता ठेकेदार



अमृत भारत मिशन पर अफसरशाही का हमला- सरकार की मंशा पर पानी फेरता ठेकेदार 



अमृत भारत योजना में अफसर–ठेकेदार गठजोड़, सरकार की साख पर बट्टा



बिजुरी स्टेशन बना भ्रष्टाचार का अड्डा, 6.29 करोड़ की योजना सवालों मे



इंट्रो-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना बिजुरी रेलवे स्टेशन पर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जिस योजना का उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं देना था, वही आज घटिया निर्माण, समयसीमा की धज्जियां और अधिकारियों की मूक सहमति के कारण सवालों के घेरे में है।करीब 6.29 करोड़ रुपये की लागत से होने वाला स्टेशन कायाकल्प अब विकास नहीं बल्कि सरकारी खजाने की खुली लूट का प्रतीक बन गया है।



 प्रकाश सिंह परिहार की कलम से


अनूपपुर /बिजुरी-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'अमृत भारत स्टेशन योजना' को बिलासपुर जोन के जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों ने भ्रष्टाचार की दीमक से खोखला करना शुरू कर दिया है। बिजुरी रेलवे स्टेशन जिसे आधुनिक सुविधाओं से लैस होना था आज भ्रष्टाचार के मलबे में तब्दील हो चुका है। 6.29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि से होने वाला निर्माण कार्य अब गुणवत्ता नहीं बल्कि कमीशनखोरी की मिसाल पेश कर रहा है।


अमृत भारत योजना को पलीता लगाने वाले कौन?



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना बिजुरी रेलवे स्टेशन पर दम तोड़ती नजर आ रही है। 6.29 करोड़ की स्वीकृत राशि से होने वाला कायाकल्प अब विकास नहीं बल्कि रेलवे अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत का प्रतीक बन चुका है। सवाल यह है कि क्या यह सब बिना जिम्मेदार अफसरों की जानकारी के संभव है?


रेलवे एस्टीमेट को ठेंगा, अफसर बने मूक दर्शक

रेलवे द्वारा तय एस्टीमेट और तकनीकी मानकों को खुलेआम नजरअंदाज किया जा रहा है। घटिया रेत कम सीमेंट और असुरक्षित निर्माण के बावजूद बिलासपुर जोन के अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। निरीक्षण और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाले अफसरों की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है।


समयसीमा खत्म जवाबदेही शून्य

फरवरी 2025 तक पूर्ण होना वाला कार्य आज भी अधूरा है। तय समयसीमा पार होने के बावजूद न तो ठेकेदार पर पेनल्टी लगी और न ही किसी अधिकारी से जवाब तलब किया गया। यह लापरवाही नहीं, बल्कि अफसरशाही की खुली शह का प्रमाण है।


पेटी कॉन्ट्रैक्टर राज - अफसरों की मिलीभगत उजागर



स्थानीय सूत्रों के अनुसार मुख्य ठेकेदार ने कार्य पेटी कॉन्ट्रैक्टरों के हवाले कर दिया है न साइट इंजीनियर मौजूद न तकनीकी सुपरविजन यह सब रेलवे अधिकारियों की अनुमति और जानकारी के बिना संभव नहीं। सवाल उठता है क्या अफसरों ने जानबूझकर स्टेशन को ठेकेदार के हवाले कर दिया?


यात्रियों की जान से खिलवाड़ सुरक्षा मानक ताक पर

पुरानी दीवारों पर नई दीवारें खड़ी कर दी गईं बिना स्ट्रक्चरल टेस्ट के निर्माण जारी है। पहली बारिश में ढांचा टिकेगा या नहीं इस पर भी संदेह है। यदि कोई हादसा होता है तो जिम्मेदारी किसकी होगी-ठेकेदार की या आंख मूंदे बैठे रेलवे अधिकारियों की?


कमीशनखोरी का सवाल - अफसर चुप क्यों ?

इतनी बड़ी अनियमितताओं पर कार्रवाई न होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या रेलवे अधिकारियों  का ठेकेदार को खुला समर्थन प्राप्त है अगर नहीं तो फिर घटिया मटेरियल के सैंपल अब तक क्यों नहीं लिए गए और भुगतान कैसे हो रहा है?


सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाते जिम्मेदार अफसर

एक ओर केंद्र सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण का दावा कर रही है वहीं बिलासपुर जोन के जिम्मेदार अधिकारी सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। अमृत भारत योजना को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाकर अफसरशाही ने सरकार के सपनों को पलीता लगा दिया है।


जनता का अल्टीमेटम - जांच नहीं तो दिल्ली तक आवाज

अब बिजुरी की जनता खामोश नहीं है। स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उच्च स्तरीय जांच गुणवत्ता परीक्षण और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह मामला रेल मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाया जाएगा।


जिम्मेदारों पर टिकी की जनता की नजर

बिजुरी रेलवे स्टेशन आज केवल निर्माण स्थल नहीं बल्कि रेलवे अधिकारियों की ईमानदारी और जवाबदेही का आईना बन चुका है। अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई करता है या फिर अमृत भारत योजना को यूं ही लुटने देता है। ऐसी महत्वपूर्ण योजना जिस प्रकार भ्रष्टाचार की भेंट चल रही है उससे सरकार सहित देश के यशस्वी प्रधानमंत्री रेल मंत्री की भी छवि धूमिल हो रही है!

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