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Saturday, March 28, 2026

28 करोड़ का जुर्माना फाइलों में दफन, जिले के विकास में लगा रोक -खनन माफिया पर मेहरबान खनिज विभाग...?



28 करोड़ का जुर्माना फाइलों में दफन, जिले के विकास में लगा रोक -खनन माफिया पर मेहरबान खनिज विभाग...?



जहाँ दिखेगी जिले में रेत, वहीं खोदेगा 'एसोसिएट कॉमर्स का सेठ....!सीमा लांघती मशीनें और 'ओवरलोडिंग' का तांडव- चंगेरी मे एसोसिएट कॉमर्स का टीपी सर्कस



सवाल-करोड़ों की राजस्व हानि पर मौन रहना क्या पद का दुरुपयोग और साठगांठ नहीं है...?



इंट्रो -सरकारी तिजोरी खाली है और विकास के काम ठप्प, लेकिन अनूपपुर का खनिज विभाग कुंभकर्णी नींद में मस्त है! पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर ने ₹28,31,70,000 का जो रिकवरी ऑर्डर जारी किया था वह आज विभाग की फाइलों में दीमकों का निवाला बन रहा है। सवाल बड़ा है क्या यह विभाग सरकार के लिए काम कर रहा है या अवैध खनन करने वालों के लिए 'कवच' बनकर खड़ा है? वहीं दूसरे और रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स द्वारा  दूसरे खदान की टीपी इस्तेमाल कर चंगेरी रेत खदान से सीमा के बाहर खनन किया जा रहा है एक तरफ रेट ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स खेल रहा टी.पी का खेल वोही दूसरी ओर खदान में सीमा के बाहर अवैध खनन, बिना डायवर्शन रेत का भंडारण वाहन क्षमता से अधिक की काटी जा रही टी.पी का खेल में बेधड़क जारी है  जिसकी जानकारी जिले के जिम्मेदार अधिकारीयों को भी दिया गया है लेकिन एसोसिएट कॉमर्स के मैनेजमेंट के सामने अवैध भी वैध नजर आ रहा है!




अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार)। जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कागजी घोड़े तो खूब दौड़ाए जा रहे हैं लेकिन जब वसूली की बात आती है तो प्रशासन की सुस्ती कई बड़े सवाल खड़े करती है। ताज़ा मामला पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर के कार्यकाल के दौरान हुई एक बड़ी कार्रवाई से जुड़ा है जहाँ ₹28 करोड़ से अधिक का जुर्माना लगाया गया था लेकिन सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सालों बीत जाने के बाद भी खनिज विभाग फूटी कौड़ी वसूल नहीं पाया है।


क्या है पूरा मामला...?

प्राप्त दस्तावेजों व मिली जानकारी के अनुसार चचाई आबाद क्षेत्र में बाबाकुटी शिथिलीकरण टैंक के पास बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन का मामला सामने आया था। खनिज विभाग की जांच में पाया गया कि निर्धारित खदान क्षेत्र से बाहर लगभग 94,390 घन मीटर रेत का अवैध उत्खनन किया गया।इस गंभीर उल्लंघन पर मध्य प्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 के तहत कार्रवाई करते हुए तत्कालीन जिला कलेक्टर ने आरोपी कमलेश सिंह चंदेल पर रॉयल्टी की 30 गुना राशि, यानी कुल ₹28,31,70,000 (अट्ठाइस करोड़ इकतीस लाख सत्तर हजार रुपये) का अर्थदंड आरोपित किया था।


मशीनें जब्त, पर सरकारी खजाना खाली

आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि जब्त की गई 'हुंडई' कंपनी की पोकलेन मशीन को तभी छोड़ा जाएगा जब आरोपी जुर्माने की पूरी राशि सरकारी खजाने में जमा कर चालान प्रस्तुत करेगा। बावजूद इसके आज तक इस भारी-भरकम राशि की वसूली नहीं हो सकी है।


विकास कार्यों में लग सकता था ब्रेक

जानकारों का मानना है कि यदि यह ₹28 करोड़ की राशि वसूल ली गई होती तो इसे जिले के बुनियादी ढांचे, शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाओं जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों में लगाया जा सकता था। जिले के विकास के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि साबित होती, लेकिन विभाग की निष्क्रियता के कारण यह राशि आज भी फाइलों में दफन है।


28 करोड़ की वसूली पर ब्रेक- पूर्व कलेक्टर का आदेश रद्दी की टोकरी में

तत्कालीन कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर ने चचाई आबाद क्षेत्र में बाबाकुटी शिथिलीकरण टैंक के पास हुए भीषण अवैध उत्खनन पर ऐतिहासिक कार्रवाई की थी। 94,390 घन मीटर अवैध रेत चोरी पर 30 गुना रॉयल्टी का जुर्माना (₹28.31 करोड़) लगाया गया था। लेकिन सालों बाद भी विभाग एक 'फूटी कौड़ी' नहीं वसूल पाया। क्या रसूखदारों के दबाव में प्रशासन के हाथ बंधे हैं?


जनता के हक पर डकैती- शिक्षा-स्वास्थ्य के बजट पर माफिया का कब्जा

जानकारों का मानना है कि यदि यह ₹28 करोड़ की राशि वसूल ली गई होती, तो अनूपपुर के स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों की सूरत बदल सकती थी। खनिज विभाग की निष्क्रियता सीधे तौर पर जिले के बुनियादी विकास को 'अंधेरे' में धकेल रही है। जो सीधे-सीधे जिले के विकास कार्यों को अवरुद्ध करने का कार्य दर्शाया जा रहा है यदि यह पैसा सरकार के खजाने पर जमा हो जाता तो निश्चित तौर पर जिला विकास के लिए एक विशेष योगदान साबित होता!

उठ रहे हैं गंभीर सवाल

इतनी बड़ी रिकवरी बकाया होने के बावजूद खनिज विभाग ने अब तक सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या रसूखदार खनन माफियाओं को बचाने के लिए जानबूझकर वसूली में देरी की जा रही है? जब्त मशीनों की वर्तमान स्थिति क्या है और क्या वे बिना जुर्माना भरे ही सिस्टम की मिलीभगत से मुक्त हो गई हैं?न्यायालय कलेक्टर द्वारा पारित आदेश का पालन कराना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। यदि करोड़ों की राजस्व हानि हो रही है तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।इस मामले में अब वर्तमान प्रशासन और खनिज विभाग की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं। क्या शासन अपने करोड़ों के राजस्व की वसूली करेगा या फिर यह मामला भी 'ठंडे बस्ते' की भेंट चढ़ रेड्डी के टोकरी में पड़ा रह जाएगा? 


जहाँ दिखेगी जिले में रेत, वहीं खोदेगा 'एसोसिएट कॉमर्स का सेठ....!



चंगेरी की सरजमीं पर खनिज एवं NGT व कानून  खत्म हो चुका है और 'एसोसिएट कॉमर्स' के रसूख का सिक्का चल रहा है। यहाँ नियम कागजों पर दम तोड़ रहे हैं और पोकलेन मशीनें नदी का सीना छलनी कर 'सेठ' की तिजोरियां भर रही हैं। जहाँ दिखेगी रेत, वहीं खोदेगा सेठ के अघोषित नारे के साथ चंगेरी में शुरू हुआ टीपी सर्कस! नदियों के स्वरूप से हाईवे पोकलेन मशीन उतार कर जीवन दायिनी नदियों का सीना छलनी  करने का कार्य बेधड़क जारी है जो जलीय जीव जंतुओं सहित पीने के पानी के लिए कॉल बनता एसोसिएट कॉमर्स का पोकलेन मशीन! ओवरलोडिंग के यमराज सड़कों पर तांडव कर रहे हैं और जिम्मेदार विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया है।


गांधी की चमक में धुंधलाया कानून का चश्मा


क्या खनिज विभाग के दफ्तरों तक पहुँचते-पहुँचते नियमों की फाइलें दीमक चाट जाती हैं? चंगेरी में मचे तांडव पर विभाग का मौन यह इशारा करता है कि 'एसोसिएट कॉमर्स' की मशीनों का शोर शायद साहबों के कानों तक नहीं पहुँचता क्योंकि वहाँ सफेद कागज की खनक ज्यादा तेज है। यह चुप्पी महज इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सुनियोजित साझेदारी की बू दे रही है।


कागजी शेर और मैदान में 'ढेर' जिम्मेदार 

​जब भी ओवरलोडिंग या अवैध उत्खनन की शिकायत होती है विभाग 'जांच का भरोसा' देकर पल्ला झाड़ लेता है। सवाल यह है कि जो डंपर आम जनता को खुली आँखों से 'यमराज' की तरह दिख रहे हैं, वो विभाग की 'उड़नदस्तों' को नजर क्यों नहीं आते? क्या विभाग की कार्यप्रणाली अब केवल 'मैनेजमेंट' के टेबल तक सीमित रह गई है?


इनका कहना है 

इस पूरे मामले की जानकारी के लिए प्रभारी खनिज अधिकारी ईशा वर्मा को कॉल किया गया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ!



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