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Thursday, April 16, 2026

प्रशासनिक सरपरस्ती में नदियों का सौदा...? शिकायत के बाद भी लीज के बाहर तांडव अनूपपुर में कानून नहीं रेत ठेकेदार एसोसिएट कामरर्स का चलता है सिक्का



प्रशासनिक सरपरस्ती में नदियों का सौदा...? शिकायत के बाद भी लीज के बाहर तांडव अनूपपुर में कानून नहीं रेत ठेकेदार एसोसिएट कामरर्स का चलता है सिक्का



एसोसिएट कॉमर्स का सिंडिकेट राज- बिना CTO जारी हुईं करोड़ों की ई-टीपी, सोन-केवई के सीने पर अवैध प्रहार



नदियों की अंतिम सांसें- पोकलेन मशीनों ने बदला सोन-केवई का भूगोल, एनजीटी के नियम कागजों तक सिमटे


चचाई का अट्ठाइस करोड़ी सस्पेंस- जुर्माना ठोककर भूल गया प्रशासन, क्या वसूली में आड़े आ रहा है ऊपर का दबाव?



इंट्रो -अनूपपुर की पावन सोन और केवई नदियों के आंचल में विकास नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की डिजिटल लूट का खूनी खेल खेला जा रहा है। मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखाते हुए रेत ठेकेदार और सचिवालय के रसूखदार गठजोड़ ने सरकारी खजाने को अपनी निजी जागीर बना लिया है। यहाँ नियम नहीं बल्कि वल्लभ भवन में बैठे बड़े अधिकारियों  के 'कथित मौखिक आदेश' चलते हैं, जिसके चलते बिना संचालन अनुमति (CTO) के ही पोर्टल से करोड़ों की अवैध ई-टीपी (e-TP) काट दी गईं।​यह केवल रेत का उत्खनन नहीं, बल्कि प्रकृति और लोकतंत्र की हत्या है। जहाँ कागजों पर खदानें कहीं और हैं और हकीकत में नदियों का सीना कहीं और छलनी किया जा रहा है। माइनिंग कॉर्पोरेशन से लेकर उड़नदस्ता दल तक की 'मौन सहमति' चीख-चीख कर गवाही दे रही है कि लूट के इस सिंडिकेट में हिस्सेदारी बहुत ऊपर तक है। 



अनूपपुर। जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली सोन और केवई नदियों को रेत माफिया ने अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया है। 'एसोसिएट कॉमर्स' नामक ठेकेदार द्वारा खनिज विभाग के साथ मिलकर किए जा रहे इस सिंडिकेट राज ने सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को खुली चुनौती दी है। मामले में फर्जी ई-टीपी  से लेकर एनजीटी के नियमों की धज्जियाँ उड़ाने तक के चौंकाने वाले प्रमाण सामने आए हैं।


कागजों पर कदमसरा और पाषान, जमीन पर चंगेरी की लूट

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार सबसे बड़ा खुलासा डिजिटल डकैती के रूप में हुआ है। ठेकेदार द्वारा कागजों (e-TP) पर रेत का उठाव 'कदमसरा' और पाषान खदानों से दिखाया जा रहा है, जबकि हकीकत में रेत 'चंगेरी' (कोतमा) खदान से अवैध रूप से निकाली जा रही है। वाहन संख्या MP65GA1110 की टीपी और वास्तविक लोडिंग पॉइंट का मिलान न होना सीधे तौर पर करोड़ों की रॉयल्टी चोरी और सरकारी पोर्टल के साथ धोखाधड़ी का जीवंत प्रमाण है।


अनुमति से पहले ही 'अवैध' उत्खनन का कारोबार

दस्तावेजों के विश्लेषण से एक गंभीर विसंगति सामने आई है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने इस इकाई को Consent to Operate' (CTO) 27 जून 2024 को प्रदान की। चौंकाने वाली बात यह है कि खनिज विभाग ने इससे 20 दिन पहले यानी 7 जून 2024 को ही e-TP (संख्या 5483709102) एवं अन्य कई टीपी जारी कर दी थी। सवाल यह है कि जब इकाई का भौतिक अस्तित्व ही 27 जून से पहले 'अवैध' था तो खनिज विभाग ने परिवहन की अनुमति कैसे दी? और शिकायत के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं की गई जिम्मेदार विभाग द्वारा?


आधिकारिक आशीर्वाद से सड़कों पर दौड़ रही ओवरलोडिंग

खनिज विभाग का पोर्टल ठेकेदार की कठपुतली बन चुका है। जिस डंपर की क्षमता मात्र 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे पोर्टल के माध्यम से 14, 25 और यहाँ तक कि 29 क्यूबिक मीटर तक की अनुमति जारी की जा रही है। यह सीधे तौर पर ओवरलोडिंग को 'आधिकारिक संरक्षण' देने जैसा है, जिससे जिले की सड़कें तबाह हो रही हैं और राजस्व को भारी चपत लग रही है।


पोकलेन मशीनों से नदियों का सीना चीर रहा माफिया

एनजीटी (NGT) के स्पष्ट नियमों को ताक पर रखकर नदियों की प्राकृतिक धारा को रोक दिया गया है। भारी-भरकम पोकलेन मशीनों के जरिए नदी के बीचों-बीच 3 मीटर से ज्यादा गहरे कुएंनुमा गड्ढे खोदे जा रहे हैं। खनिज अधिनियम 1957 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का सरेआम उल्लंघन कर पारिस्थितिकी तंत्र को ऐसी क्षति पहुँचाई जा रही है जिसकी भरपाई असंभव है।


फाइलों में कैद इंसाफ- नदियों का सीना छलनी, जुर्माने की राशि लापता

 जिले में भ्रष्टाचार का एक ऐसा वीभत्स चेहरा सामने आया है जहाँ नियम केवल गरीबों के लिए हैं और रसूखदारों के लिए सरकारी खजाना एक खुली दुकान। ग्राम चचाई आबाद में सोन नदी की कोख उजाड़कर किए गए 94,390 घन मीटर के अवैध उत्खनन पर जिले के पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर ने 28,31,70,000 रुपये का भारी-भरकम जुर्माना तो ठोंक दिया, लेकिन यह राशि आज तक सरकारी खाते की राह देख रही है। एक ओर प्रशासन जनहित के कार्यों के लिए बजट का रोना रोता है वहीं दूसरी ओर विभाग की नाक के नीचे करोड़ों की यह 'मलाई' वसूली के इंतजार में सूख रही है। क्या यह महज लापरवाही है या फिर दोषियों को बचाने के लिए बिछाई गई भ्रष्टाचार की 'लाल कालीन'?


शिक्षा और स्वास्थ्य का सवर सकता है भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 28 करोड़ की राशि वसूल कि जाती है तो जिले की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत बदल सकती है। इस राशि से जिले में आधुनिक अस्पताल, स्कूलों में बुनियादी ढांचा और विकास की नई गति मिल सकती है।


विभाग की 'रहस्यमयी चुप्पी' कार्यवाही शून्य 

शिकायतकर्ता ने पीएमओ (PMO), मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव माइनिंग कॉरपोरेशन सहित 17 विभागों को सबूतों के साथ पत्र भेजा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि माइनिंग कॉर्पोरेशन और जिले संभाग के जिम्मेदार अधिकारी की चुप्पी 'मौन सहमति' का प्रतीक है। यदि समय रहते जांच व कार्यवाही कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की शरण में ले जाया जाएगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी !




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