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Friday, August 19, 2022

भू-माफियाओं ने रेलवे की जमीन पर किया कब्जा रेलवे विभाग बना मूकदर्शक



भू-माफियाओं ने रेलवे की जमीन पर किया कब्जा रेलवे विभाग बना मूकदर्शक



 वैसे तो अनूपपुर जिले के कोतमा में भू माफियाओं के कारनामे एक से बढ़कर एक है, यहां पर भू माफियाओं ने सरकारी जमीन बेच दी, आवंटन की भूमि बेच दी अब इन भू माफियाओं की नजर रेलवे की जमीन पर पड़ चुकी है, रेलवे की जमीन पर खुले तौर पर अतिक्रमण किया जा रहा है धन्य है रेलवे विभाग जो अपनी जमीन को ही बचाने पर नाकाम साबित दिख रहा है, अगर ऐसा ही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब कोतमा में रेलवे की जमीन पर पूरी तरह से कब्जा भू माफियाओं के द्वारा कर लिया जाएगा !


अनूपपुर :-कोतमा नगर के एक व्यक्ति ने शिकायत करते हुए शासन-प्रशासन व सरकार से गुजारिश की है कि कोतमा में चल रहे भूमियों के क्रय-विक्रय व अन्य गतिविधियों की जांच की जाकर न्यायोचित कार्यवाही की जाए। शिकायतकर्ता ने प्रशासन को बताया कि एन एच 43 के बगल में पूर्व राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक आदिवासियों की भूमि, अहीर की भूमि, केवट की भूमि, जंगल की भूमि व अहस्तांतरणीय भूमि होने के बावजूद भी रशूखदारों ने पैनी निगाहें जमा रखी हैं और निरंतर इन भूमियों की खरीद-फरोख्त का खेल खेल रहे , आश्चर्य की बात तो यह है कि पुराने राजस्व रिकार्ड में जो भूमि जंगल या अहस्तांतरणीय या आदिवासी की भूमि दर्ज हैं तो इन भूमियों की खरीदी या बिक्री कैसे संभव है,यदि इस प्रकार की खरीदी बिक्री की गई है तो प्रशासन की कोई हरकत क्यों नही !


 पटवारी की मिलीभगत से गैर हक़दार भूमियों और अहस्तांतरणीय भूमियों कि हुईं रजिस्ट्री 

शासकीय भूमियों पर रशूखदारों के द्वारा कब्जा करने और शासकीय भूमियों के खरीदी व बिक्री की घटना कोई नई बात नहीं है और राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से कई रशूखदारों ने जंगल की भूमियों, आदिवासियों की भूमियों, गैर हक़दार भूमियों और अहस्तांतरणीय भूमियों पर कब्जा कर गोल माल करते हुए उसका पट्टा बनवा कर उस पर अपना आधिपत्य प्राप्त किया है, धीरे-धीरे उन अधिकारियों के तबादले होते गए या रिटायरमेंट होते गए। मामला शनैः शनैः लोगों के दिमाग से ओझल होता रहा और उन भूमियों पर इनके आधिपत्य की समय सीमा बढ़ती रही, वर्षों से यह प्रक्रिया जारी है। शिकायतकर्ता ने शासकीय सम्पत्ति के इस प्रकार से दोहन पर आपत्ति जताते हुए शिकायत दर्ज कराई है !

यह है मामला 

यहां पर भू माफियाओं की नजर- एन एच 43 के बगल में जंगल चौकी के निकट ग्राम कल्याणपुर पटवारी हलका कल्याणपुर रा. नि. मं. व तहसील कोतमा जिला अनूपपुर में आ. ख. नं. 295/2/1 रकवा 1.472 हे., आ. ख. नं. 296/9/ख रकवा 0.303 हे., ख. नं. 296/9/ग रकवा 0.303 हे., ख. नं. 296/11/क रकवा 0.636 हे., ख. नं. 297/8 रकवा 0.607 हे., ख. नं. 295/3/क/च रकवा 0.024 हे. भूमियों पर अजीमुद्दीन के द्वारा खरीदी-बिक्री  खेल कर राजस्व अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर अपने पुत्रों के नाम पर दर्ज करवा दी गई और अब इन भूमियों पर  अवैध कब्जा कर के अच्छा खासा गोदाम बना के अपने शौक के लिए कार्य लगातार कर रहे हैं। ग्राम कल्याणपुर पटवारी हलका कल्याणपुर की ख. नं. 295,296,297 की भूमियां वर्ष 1958-59 की वार्षिक खतौनी जमाबंदी में वर्ग 06 गैर हक़दार काश्तकार अंकित कर कोसई भरिया, गुरजुल भरिया, छोटू अहीर, भुलई अहीर, दद्दी अहीर, मोहन अहीर, सरला भरिया व जैराम केवट के नाम दर्ज हैं। उक्त भूमियों के तीन भूमि स्वामी आदिवासी व शेष अहीर व केवट जाति के थे लेकिन आदिवासियों की ज़मीन की इस तरह से खरीद फरोख्त और किसी अन्य के नाम पर नामांतरण होना समझ से परे है। एक ओर नियमों की बात करें तो आदिवासियों के नाम दर्ज भूमियों की खरीदी-बिक्री लगभग संभव नहीं है और यहां की परिस्थितियां कुछ अलग ही हैं। शिकायतकर्ता ने शिकायत की है कि राजस्व अधिकारियों व पटवारियों की मिलीभगत से इन भूमियों पर भारी विसंगति की है और शासन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है ।

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