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Sunday, August 23, 2026

मध्यप्रदेश के आदिवासी जिले अनूपपुर में खनिज विभाग का महाघोटाला- 7 वर्षों से अंगद की तरह जमे अफसरों ने लुटाया सरकारी खजाना



मध्यप्रदेश के आदिवासी जिले अनूपपुर में खनिज विभाग का महाघोटाला- 7 वर्षों से अंगद की तरह जमे अफसरों ने लुटाया सरकारी खजाना



 कागजों में गिट्टी का पहाड़, जमीन पर धान की फसल- 28 करोड़ की वसूली दबाकर 1 करोड़ की FD पर छोड़े राजसात वाहन



 सीएम-वल्लभ भवन तक शिकायतों के बाद भी तंत्र मौन- फर्जी ई-टीपी और बालू सिंडिकेट के दागी अफसरों पर निलंबन-FIR की दरकार


इंट्रो :-मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य अनूपपुर जिले में खनिज विभाग के अधिकारियों और रेत-पत्थर माफियाओं का संगठित सिंडिकेट बेखौफ होकर सरकारी राजस्व लूट रहा है। सात वर्षों से कुर्सी पर अंगद की तरह जमे मैदानी अफसरों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर जहां धान के लहलहाते खेतों पर फर्जी गिट्टी भंडारण दिखाकर लाखों की ई-टीपी काटी, वहीं सोन नदी में 28.31 करोड़ के ऐतिहासिक जुर्माने को सात साल से ठंडे बस्ते में दबा रखा है। हद तो तब हो गई जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा राजसात की कार्रवाई वाले भारी वाहनों को महज 1 करोड़ की संदिग्ध एफडी के नाम पर माफियाओं को गुपचुप सौंप दिया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रमुख सचिव और खनिज संचालनालय तक साक्ष्यों सहित स्मरण पत्र भेजे जाने के बावजूद वल्लभ भवन की चुप्पी मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। अब जनता और प्रशासनिक हलकों से इस महालूट तंत्र पर प्रहार करते हुए दागी अफसरों को तत्काल निलंबित कर आपराधिक एफआईआर दर्ज कराने एवं इनकी संपत्ति की भी जांच कराने की मांग तेज हो गई है।


भोपाल:-प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण अनूपपुर जिले में खनिज अमले ने पारदर्शी तबादला नीति की धज्जियां उड़ाते हुए अवैध उत्खनन को संस्थागत भ्रष्टाचार में तब्दील कर दिया है। ग्राम पसान में 0.255 हेक्टेयर कृषि भूमि पर बिना डायवर्सन 10 साल का फर्जी भंडारण स्वीकृत किया गया तो दूसरी तरफ चचाई में 94 हजार घन मीटर बालू चोरी का 28.31 करोड़ का रिकवरी आदेश रद्दी बना दिया गया। आदिवासियों के उत्थान, जर्जर सड़कों, अस्पतालों और स्कूलों के विकास का पैसा अफसरों और माफियाओं की निजी तिजोरियों में सिमट कर रह गया है। राजधानी भोपाल से लेकर जिला मुख्यालय तक लगातार शिकायतों के बाद भी किसी जिम्मेदार का न चेतना बताता है कि लूट की जड़ें मंत्रालय तक फैली हैं। सात साल की इस अवैध सल्तनत को ध्वस्त करने के लिए अब नए प्रशासनिक नेतृत्व से आर-पार की सख्त कार्रवाई की दरकार है।


7 साल से एक ही कुर्सी पर अंगद बने अफसर, पारदर्शी तबादला नीति और वल्लभ भवन मौन

अनूपपुर में खनिज विभाग के मैदानी अफसरों का सात वर्षों से एक ही पद पर अंगद की तरह जमे रहना भ्रष्टाचार के सबसे बड़े तंत्र का प्रमाण है। प्रदेश भर में नियमित तबादले होते रहे, मगर अनूपपुर का खनिज अमला रसूख और काली कमाई के दम पर हर प्रशासनिक फेरबदल को ठेंगा दिखाता रहा। मुख्यमंत्री से लेकर प्रमुख सचिव और खनिज निदेशक तक दर्जन भर प्रमाणित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन वल्लभ भवन में बैठे आला अफसरों की हिम्मत इन पर कार्रवाई करने की नहीं हुई। मैदानी भौतिक सत्यापन के नाम पर सिर्फ फर्जी कागजी कोरम पूरा कर हर महीने सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया गया। लंबे कार्यकाल के दौरान माफियाओं के साथ विकसित हुआ यह अभेद्य गठजोड़ अब पूरे जिले में खुली चर्चा का विषय बन चुका है। जब तक इन मठाधीश अफसरों को जिले से बाहर कर निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक खनिज संपदा की लूट पर रोक लगना नामुमकिन है।


पसान में धान के खेत पर गिट्टी का फर्जीवाड़ा, पोर्टल से कटीं लाखों की फर्जी ई-टीपी

ग्राम पसान में भू-स्वामी रुकसाना बानो और खनिज कारोबारी विमल कुमार त्रिपाठी ने खनिज निरीक्षक से सांठगांठ कर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाईं। खसरा क्रमांक 1051 की 0.255 हेक्टेयर जिस कृषि भूमि पर धान की फसल लहलहा रही थी, उसे कागजों में गिट्टी-बोल्डर का भारी स्टॉक बताकर 10 साल की लीज दे दी गई। भू-स्वामी ने हलफनामा देकर भंडारण दिखाया और उसी रकबे का उपार्जन केंद्र में पंजीयन कराकर धान बेचते हुए दोहरा अवैध मुनाफा कमाया। धरातल पर बिना एक भी गिट्टी की मौजूदगी के ई-खनिज पोर्टल से लगातार फर्जी ई-टीपी काटकर अवैध खनन के पत्थरों को खुलेआम वैध बनाया गया। 6 अक्टूबर 2023 को डायवर्सन कराने का झूठा शपथपत्र देकर आज तक भू-व्यपवर्तन नहीं कराया गया, जो राजस्व चोरी का खुला प्रमाण है। विभाग के जिम्मेदारों ने आंख मूंदकर इस फर्जीवाड़े को संरक्षण दिया और सरकार को करोड़ों के टैक्स का सीधा नुकसान पहुंचाया।


28.31 करोड़ की राजस्व वसूली पर कुंडली, 1 करोड़ की FD के खेल में राजसात वाहन रिहा

सोन नदी के चचाई क्षेत्र में 94,390 घन मीटर अवैध रेत खनन पर तत्कालीन कलेक्टर ने प्रकरण क्रमांक 41/बी-121/2016-17 में 28.31 करोड़ का ऐतिहासिक जुर्माना ठोका था। आदेश में स्पष्ट प्रावधान था कि समयावधि में राशि जमा न होने पर भू-राजस्व संहिता के तहत माफियाओं की चल-अचल संपत्ति कुर्क और नीलाम की जाए। परंतु भ्रष्ट खनिज अफसरों ने इस फाइल को सात साल तक ठंडे बस्ते में दबाए रखा और सरकारी खजाने में एक धेला तक जमा नहीं कराया। हद तो तब पार हुई जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा राजसात की जद में आईं भारी-भरकम पोकलेन व जेसीबी मशीनों को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 1 करोड़ रुपये की एफडी गारंटी लेकर गुपचुप छोड़ दिया गया इस बात को हम यह इसलिए कह रहे हैं कि इसकी जानकारी आरटीआई के माध्यम से भी खनिज विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे हैं। जिस एफडी का ब्याज भी संबंधित वाहन मालिक की जेब में जाएगा, उससे शासन को क्या लाभ मिला, यह रहस्य बना हुआ है। कोर्ट के स्टे और कानूनी दांव-पेच की मनगढ़ंत आड़ लेकर 28 करोड़ की सरकारी वसूली को पूरी तरह दफन कर दिया गया।


जनता के हक पर डाका, नए कलेक्टर से चक्रवृद्धि ब्याज संग वसूली और एफआईआर की दरकार

खनिज संपदा से मिलने वाले करोड़ों के राजस्व पर डाका पड़ने से अनूपपुर के आदिवासी अंचलों में स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढांचे का विकास वर्षों पीछे चला गया है। समूचे जिले की नजरें अब नए कलेक्टर के प्रशासनिक तेवरों पर टिकी हैं कि क्या वे इस भ्रष्ट सिंडिकेट पर कड़ा प्रहार कर पाएंगे। जनहित में मांग उठ रही है कि 28.31 करोड़ के पुराने जुर्माने को 7 साल के चक्रवृद्धि ब्याज सहित वसूलने के लिए तत्काल कुर्की वारंट जारी किए जाएं। साथ ही 1 करोड़ की संदिग्ध एफडी पर राजसात वाहन छोड़ने वाले और फर्जी ई-टीपी जारी करने वाले खनिज अधिकारियों कि उच्चस्तरीय जांच करवा कर कानूनी कार्यवाही कि जाये। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति की साख बचाने के लिए ऐसे अधिकारियों को तत्काल निलंबन की कार्रवाई जरूरी है साथ ही इनके संपत्ति की भी जांच करवाया जाए। यदि अब भी तंत्र नहीं चेता, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि भ्रष्टाचार की काली कमाई के आगे वल्लभ भवन ने भी पूरी तरह घुटने टेक दिए हैं।

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