शहडोल में धान खरीदी का महाअभियान: पिछली अव्यवस्थाओं को पीछे छोड़ पारदर्शिता की नई इबारत लिख रही नई व्यवस्था
आर.बी. एसोसिएट्स के सर्वेयरों की पैनी नजर: 'FAQ' मानकों पर खरी उतरने वाली धान ही पहुंचेगी गोदाम तक, भ्रष्टाचार पर लगाम
इंट्रो। शहडोल जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत धान खरीदी का महाअभियान अपनी पूरी गति और पारदर्शिता के साथ संचालित हो रहा है। शासन के कड़े दिशा-निर्देशों के बीच इस बार गुणवत्ता परीक्षण की कमान आर.बी. एसोसिएट्स ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के हाथों में है, जिनके सर्वेयर केंद्रों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। पिछले वर्षों के कड़वे अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम कसी गई है, बल्कि पूरी खरीदी प्रक्रिया को नियमबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है। आर.बी. एसोसिएट्स के प्रशिक्षित सर्वेयर प्रत्येक ढेर की बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि शासन की 'FAQ' नीति का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित हो सके। इस नई व्यवस्था से जहाँ एक ओर बिचौलियों की भूमिका खत्म हुई है, वहीं दूसरी ओर वास्तविक किसानों को उनकी उपज का सही लाभ मिलना सुनिश्चित हुआ है।
शहडोल। इस वर्ष उपार्जन प्रक्रिया को दोषमुक्त बनाने के लिए प्रशासन और सर्वेयर टीम द्वारा "जीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाई जा रही है। केंद्रों पर तैनात सर्वेयर न केवल धान की नमी और सफाई की जांच कर रहे हैं, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि किसानों को किसी भी स्तर पर असुविधा न हो। शासन की मंशा के अनुरूप, खरीदी प्रक्रिया में तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ाया गया है ताकि मानवीय हस्तक्षेप और त्रुटियों की गुंजाइश कम हो सके। आर.बी. एसोसिएट्स की टीम द्वारा की जा रही यह सघन मॉनिटरिंग जिले में सरकारी खरीदी के मानकों को एक नए स्तर पर ले जा रही है, जिससे भविष्य में भंडारण के दौरान होने वाले नुकसान की संभावना भी न्यूनतम हो गई है।
शहडोल जिले में बदली व्यवस्था की तस्वीर
शहडोल जिले के लिए यह वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले खरीफ सीजन में धान उपार्जन के दौरान व्यापक अनियमितताएं और अव्यवस्था देखी गई थी। विगत वर्ष NCCF के माध्यम से एक गैर-अनुभवी निजी कंपनी को गुणवत्ता परीक्षण का जिम्मा मिला था, जिसके कारण केंद्रों पर सर्वेयरों की अनुपस्थिति और किसानों को उपज बेचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। यहाँ तक कि भर्ती प्रक्रिया में वसूली के आरोप भी लगे थे। लेकिन इस बार मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉरपोरेशन द्वारा चयनित नई कंपनी ने शहडोल जिले में धान उपार्जन की लगाम संभालते ही व्यवस्था को सुदृढ़ किया है। जिले के प्रत्येक केंद्र पर मुस्तैद सर्वेयर अब शासन की मंशा के अनुरूप कार्य कर रहे हैं।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया और मुस्तैद सर्वेयर
आर.बी. एसोसिएट्स ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म करने के लिए सर्वेयरों का चयन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया है। शिक्षा, दक्षता और कार्य अनुभव के आधार पर चयनित ये सर्वेयर अब उपार्जन केंद्रों पर धान की नमी, सफाई और रंग की विधिवत जांच कर रहे हैं। भंडारण केंद्रों पर भी दोहरे सर्वेयरों की तैनाती की गई है, ताकि केवल उच्च गुणवत्ता वाली 'FAQ' स्तर की धान ही गोदामों तक पहुंचे और रिजेक्शन की स्थिति न बने।
किसानों की सुविधा को दी गई प्राथमिकता
खरीदी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए अनुभवी सर्वेयर मौके पर ही तत्काल निर्णय ले रहे हैं। किसानों की सहूलियत के लिए नियमों में बदलाव किया गया है; यदि धान मानक के अनुरूप नहीं पाई जाती, तो केंद्रों पर ही पंखे और छरने उपलब्ध कराए गए हैं। इससे किसान अपनी उपज को तुरंत साफ कर और नमी सुखाकर मौके पर ही बेच पा रहे हैं। नमी का स्तर 17% तक रखने और कचरा व मिट्टी की मात्रा को नियंत्रित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सूरज पटेल प्रकरण और कंपनी का पक्ष
हाल ही में सर्वेयर सूरज पटेल द्वारा कलेक्ट्रेट और कमिश्नर कार्यालय में की गई शिकायतों के बाद कंपनी की टीम शहडोल पहुंची। कंपनी के फील्ड ऑफिसर रजनीश कुमार कौरव ने स्पष्ट किया कि सूरज पटेल को कंपनी ने नहीं हटाया था, बल्कि जिला प्रबंधक द्वारा हटाए जाने के बाद भ्रम की स्थिति पैदा हुई थी। कंपनी ने जांच में पाया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और किसी भी कर्मी द्वारा पैसों की मांग या भ्रष्टाचार की पुष्टि नहीं हुई है।
इनका कहना है
"मुझे जिला प्रबंधक द्वारा बिना कारण बताए हटाया गया था और कंपनी के खिलाफ गुमराह किया गया था। अब सच्चाई सामने आने पर मैं अपनी शिकायतें वापस लेता हूँ, लेकिन यह जानना जरूरी है कि प्रशासन ने मुझे किस आधार पर हटाया।"
— सूरज पटेल (पीड़ित सर्वेयर)
"हमारे पास सूरज पटेल के खिलाफ कोई शिकायत नहीं थी और न ही कंपनी ने उन्हें हटाया है। ऑनलाइन भर्ती प्रक्रिया के कारण भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं है। ऑडियो वायरल होने या वसूली के आरोप बेबुनियाद हैं और यह कंपनी की छवि बिगाड़ने की साजिश है।"
— रजनीश कुमार कौरव (फील्ड ऑफिसर, आर.बी. एसोसिएट्स)

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