ऑपरेशन चंगेरी अनूपपुर में 'सफेद सोने' की डकैती, अब क्या कलेक्टर रोक पाएंगे माइनिंग सिंडिकेट का यह 'कागजी खेल'?
NGT व माइनिंग के नियमों की तिलांजलि सोन-केवई के सीने पर पोकलेन का तांडव
क्षमता से दोगुना ओवरलोडिंग को सरकारी आशीर्वाद- धड़ल्ले से ओवरलोड टी.पी हो रही जारी
इंट्रो - मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में यहाँ रेत खनन नहीं बल्कि खनिज विभाग व जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स के नापाक सिंडिकेट का लूट-उत्सव चल रहा है। रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स ने सरकार के खजाने में सेंध लगाने का ऐसा डिजिटल सिंडिकेट रचा है जिसने राजस्व की जड़ों को खोखला कर दिया है। ताज्जुब है कि जिस जिले के मुखिया कलेक्टर हर्षल पंचोली से जीरो टॉलरेंस की उम्मीद थी वहां उनकी नाक के नीचे ऑपरेशन चंगेरी मानपुर पाषान के जरिए करोड़ों का चूना खुलेआम लगाया जा रहा है। कदमसारा की टीपी पर चंगेरी में डकैती और क्षमता से दोगुना ओवरलोडिंग का यह खेल चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि जिम्मेदार विभाग अब रक्षक नहीं बल्कि इस संगठित लूट का मूक साझीदार बन चुका है। क्या सरकार को लगने वाली इस चपत पर कलेक्टर हर्षल पंचोली का हंटर चलेगा या रसूखदार ठेकेदार के आगे सिस्टम नतमस्तक ही रहेगा?
अनूपपुर। जिले में रेत खनन के नाम पर जो चल रहा है उसे व्यापार नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व डकैती कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की मनमानी और खनिज विभाग की संदेहास्पद खामोशी ने अनूपपुर को भ्रष्टाचार का चारागाह बना दिया है। डिजिटल इंडिया के दौर में यहाँ कागजों पर जादूगरी दिखाई जा रही है और जमीनी हकीकत में नदियों का कत्लेआम हो रहा है। ताज्जुब है कि जो फर्जीवाड़ा आम जनता एक मोबाइल ऐप पर पकड़ ले रही है, वह एसी कमरों में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को नजर क्यों नहीं आ रहा है इस पूरे मामले की शिकायत जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से लेकर राजधानी तक गूंज रही है लेकिन किसी के हिम्मत नहीं की रेत ठेकेदार के इस संगठित कई करोड़ के भ्रष्टाचार व सरकार को पहुंच रही छती को रोकने की हिमाकत कर सके!
डिजिटल टीपी का लोकेशन स्कैम खदान कदमसारा, लोडिंग चंगेरी
रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स ने सिस्टम की आँखों में धूल झोंकने का नायाब तरीका खोज निकाला है। पोर्टल पर कदमसारा खदान की ई-टीपी (e-TP) काटी जाती है लेकिन असलियत में गाड़ियाँ चंगेरी रेत खदान से लोड की जा रही हैं। ऐसा ही जीता जागता मामला वाहन क्रमांक MP65GA1110 इसका जीता-जागता सबूत है।यह न केवल तकनीकी धोखाधड़ी है बल्कि करोड़ों के राजस्व की सीधी चोरी है। जब खदान और लोडिंग पॉइंट में जमीन-आसमान का अंतर है तो माइनिंग विभाग का अमला हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठा है हालांकि उक्त पूरे मामले की जानकारी जिले के संवेदनशील कलेक्टर को भी दी गई है!
ओवरलोडिंग का सरकारी सिंडिकेट 13 की क्षमता, 26 का पास
भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि खुद पोर्टल ही रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स का पार्टनर नजर आता है। जिस ट्रक की आधिकारिक क्षमता 13.49 क्यूबिक मीटर है उसे 14 और 26, 29 क्यूबिक मीटर के पास धड़ल्ले से जारी किए जा रहे हैं। अब सवाल यह खड़ा हों रहा है कि क्या यह महज तकनीकी चूक है या ठेकेदार को क्षमता से अधिक रेत ले जाने की वैध छूट? इस खेल से न केवल सरकार को चूना लग रहा है बल्कि ओवरलोड ट्रकों से जिले की सड़कें दम तोड़ रही हैं। और यदि सड़क पर ठेकेदार के अलावा दूसरी गाड़ी ओवरलोड दिख जाए तो माइनिंग विभाग कार्यवाही कर वाहवाही ठोक लेती है!नियमों को तिलांजलि देकर जारी है सोन और केवई नदी का सीना छलनी
NGT के स्पष्ट निर्देश हैं कि नदी के भीतर मशीनों का प्रयोग वर्जित है लेकिन चंगेरी और मानपुर में एसोसिएट कॉमर्स के रसूख के आगे कानून बौना साबित हो रहा है। भारी-भरकम पोकलेन मशीनें जीवनदायिनी सोन और केवई नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रही हैं। न खदान पर सीमांकन के बोर्ड हैं न लाल झंडियां बस है तो ठेकेदार का बेखौफ तांडव।
बिना डायवर्सन भंडारण-राजस्व का नुकसान
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजस्व को सीधी चपत नियमों को ठेंगा दिखाते हुए बिना किसी भूमि डायवर्सन के रेत का विशाल भंडारण किया जा रहा है। ई-टीपी में दर्ज रूट (कदमसारा से गोहान्ड्रा) का खुला उल्लंघन कर माफिया चंगेरी के शॉर्टकट से माल खपा रहे हैं। यह सब अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है जिससे विभाग की निष्पक्षता पूरी तरह कटघरे में है।
कलेक्टर की चुप्पी या फिर बड़ी कार्यवाही की आहट?
कई करोड़ों के इस राजस्व सिंडिकेट की खबरें अब सुर्ख़ियों में हैं। जिम्मेदार अधिकारियों के संज्ञान में मामला होने के बावजूद ठेकेदार का रसूख उन पर भारी पड़ता दिख रहा है।अब सबकी नजरें जिले के मुखिया कलेक्टर हर्षल पंचोली पर टिकी हैं -
1.-क्या इस रेत सिंडिकेट पर शासन के कार्यवाही का बुलडोजर चलेगा?
2.- क्या कागजी जादूगरी करने वालों पर FIR दर्ज होगी?
3.- या फिर खनिज विभाग की इस संदिग्ध खामोशी को जिला प्रशासन की मौन स्वीकृति मान लिया जाए?जनता जवाब मांग रही है। लूट के इस उत्सव पर विराम कब लगेगा?







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