अनूपपुर में राजस्व 'इमरजेंसी' पटवारियों की हठधर्मिता ने जिले को किया बंधक, विकास की रफ्तार पर लगा ब्रेक
पटवारियों की जिद और प्रशासन की सख्ती अनूपपुर में राजस्व युद्ध छिड़ा
इंट्रो -जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और जनसेवा की शपथ लेने वाली कलम हठधर्मिता की स्याही से लिखी जाने लगे तो समझ लीजिए कि व्यवस्था आईसीयू में है। अनूपपुर जिला इस वक्त ऐसे ही प्रशासनिक लकवे का शिकार है जहाँ पटवारियों की 'अघोषित इमरजेंसी' ने विकास के पहियों में जंजीरें डाल दी हैं। एक तरफ हक की मांग का तंबू है, तो दूसरी तरफ कलेक्टर की सख्ती का चाबुक लेकिन इस 'राजस्व युद्ध' के बीच पिस रहा है वो आम आदमी, जिसका कसूर सिर्फ इतना है कि उसे अपनी जमीन और अपने हक के लिए इन साहबों के हस्ताक्षर की दरकार है। जनता जिले के कलेक्टर से सख्त कदम उठाने की मांग कर रही है!
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार )। जिले के तहसीलों में पसरा सन्नाटा किसी शांति का प्रतीक नहीं बल्कि एक बड़े प्रशासनिक तूफान की आहट है। अनूपपुर में पटवारियों की कलम क्या रुकी जिले की साख और जनता की उम्मीदें दोनों वेंटिलेटर पर आ गईं। फार्मर रजिस्ट्री में पिछड़ता जिला और दफ्तरों के चक्कर काटते हताश किसान यह तस्वीर है उस अनूपपुर की जिसे पटवारियों ने अपनी मांगों की आड़ में बंधक बना लिया है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन का हंटर इस गतिरोध को तोड़ेगा या पटवारियों की यह जंग अनूपपुर को विकास की दौड़ में मीलों पीछे धकेल देगी!
सीमांकन-बंटवारा ठप्प, छात्र और किसान बेहाल
पटवारियों की कलम क्या रुकी जिले की धड़कनें थम गईं। पिछले 14 दिनों से तहसीलों में सन्नाटा है। किसान अपने सीमांकन और बंटवारे के लिए भटक रहे हैं, तो वहीं छात्र EWS और जाति प्रमाण पत्र न बनने के कारण अपने भविष्य को लेकर आशंकित हैं। नक्शा तरमीम से लेकर नामांतरण तक, हर फाइल पर धूल जम रही है।
प्रदेश में फिसड्डी हुआ अनूपपुर फार्मर रजिस्ट्री में जिले की भारी किरकिरी
राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'फार्मर रजिस्ट्री' योजना में अनूपपुर जिला प्रदेश में 13वें पायदान पर लुढ़क गया है। जहां प्रदेश के अन्य जिले लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं अनूपपुर में मात्र 26% कार्य ही हो पाया है। पटवारियों की लापरवाही का खामियाजा अब पूरे जिले की साख को भुगतना पड़ रहा है।
कलेक्टर का सर्जिकल स्ट्राइक काम नहीं तो दाम नहीं
कलेक्टर हर्षल पंचोली ने इस बार स्पष्ट संदेश दे दिया है कि मुफ्त की तनख्वाह नहीं मिलेगी। उन्होंने दो टूक आदेश जारी किया है कि जिन पटवारियों ने अपने क्षेत्र में कम से कम 30% फार्मर रजिस्ट्री का काम पूरा नहीं किया है, उनका वेतन आहरण प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन के इस कड़े रुख से पटवारी संघ में हड़कंप मचा है।
प्रशासन बनाम पटवारी तंबू उखड़ा, पर रार बरकरार
पुराने तहसील परिसर में अवैध रूप से तंबू गाड़कर बैठे पटवारियों को SDM कमलेश पुरी ने सख्ती दिखाते हुए वहां से खदेड़ दिया। प्रशासन का यह 'रूड अवतार' साफ बताता है कि अब हड़ताल के नाम पर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बावजूद पटवारी झुकने को तैयार नहीं हैं, जिससे गतिरोध और गहरा गया है।
दबाव की राजनीति या कर्तव्य से गद्दारी?
लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन अनूपपुर में जो हो रहा है वह ब्लैकमेलिंग जैसा प्रतीत होता है। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की सरेआम अवहेलना करना और संगठन के नाम पर शासन को घुटनों पर लाने की कोशिश करना कहां तक जायज है? जनता पूछ रही है कि आखिर उनकी क्या गलती है?अनूपपुर की जनता अब इस दबाव की राजनीति से तंग आ चुकी है। सवाल यह है कि क्या पटवारी अपनी जिम्मेदारियों को समझेंगे या जिला प्रशासन को और कड़े कदम उठाने पर मजबूर करेंगे?



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