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Sunday, March 22, 2026

मोहन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को अनूपपुर में ठेंगा -कागजों पर कदमसारा जमीन पर चंगेरी रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की डिजिटल लूट



मोहन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को अनूपपुर में ठेंगा -कागजों पर कदमसारा जमीन पर चंगेरी रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की डिजिटल लूट 



ओवरलोडिंग को सरकारी मुहर- जब पोर्टल ही बांटने लगे लूट की छूट तो कैसे बचेगा सरकार का राजस्व...?



कलेक्टर की साख और कुर्सी को चुनौती-सोन-केवई के सीने पर हैवी मशीनों का प्रहार,एनजीटी के नियमों की हत्या कर रेत ठेकेदार का अवैध साम्राज्य



इंट्रो -मुख्यमंत्री मोहन यादव की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को अनूपपुर में रेत माफिया और खनिज विभाग के 'नापाक गठबंधन' ने खुली चुनौती दे दी है। जिले में एसोसिएट कॉमर्स नामक रेत ठेकेदार का आतंक और रसूख इस कदर हावी है कि नियम-कायदे और एनजीटी (NGT) के निर्देश फाइलों में दफन हो चुके हैं। यहाँ डिजिटल इंडिया का ढोल पीटने वाला विभाग डिजिटल लूट  का मूक गवाह बना बैठा है जहाँ ई-टीपी (e-TP) कहीं की कटती है और रेत कहीं और से निकाली जा रही है।​सबसे बड़ा सवाल संवेदनशील कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है क्या जिला प्रशासन रेत सिंडिकेट के सामने बंधक बन चुका है या फिर इस करोड़ों के राजस्व की लूट में मौन सहमति दे दी गई है? जब 13 क्यूबिक मीटर की क्षमता वाले डंपर को खनिज विभाग का पोर्टल 29 क्यूबिक मीटर का आधिकारिक आशीर्वाद (ओवरलोड पास) बांट रहा हो तो समझ लीजिए कि रक्षक ही अब भक्षक की भूमिका में हैं। करोड़ों का राजस्व रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स की तिजोरी में स्वाहा हो रहा है यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रमाण व शिकायत के बाद भी कार्यवाही ना होना इस और इंगित कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी मैनेजमेंट के आगे नतमस्तक हैं। क्या अनूपपुर का यह रेत सिंडिकेट कानून के बुलडोजर से टूटेगा या फिर कागजी खानापूर्ति कर ठेकेदार को अभयदान मिलता रहेगा?



अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार)। मुख्यमंत्री मोहन यादव की भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जीरो टॉलरेंस' नीति को अनूपपुर के खनिज विभाग और रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स ने मिलकर मखौल बना दिया है। जिले की जीवनदायिनी सोन और केवई नदियों का सीना हैवी पोकलेन मशीनों से छलनी किया जा रहा है। आलम यह है कि नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ठेकेदार का 'मैनेजमेंट' जिले के जिम्मेदार अधिकारियों के ईमान पर भारी पड़ रहा है। करोड़ों के राजस्व की चपत और पर्यावरण की बलि चढ़ाकर माफिया की तिजोरी भरी जा रही है।


 कागजी 'कदमसारा' और जमीनी 'चंगेरी' टीपी का फर्जीवाड़ा और डिजिटल सेंधमारी

अनूपपुर में खनिज विभाग की तकनीक अब रेत ठेकेदार की गुलाम नजर आती है। जिले में डिजिटल डकैती का ऐसा खेल चल रहा है जहाँ ई-टीपी (e-TP) कदमसारा या पाषान खदान की कटती है लेकिन रेत का अवैध उठाव चंगेरी (कोतमा) से किया जा रहा है। वाहन क्रमांक MP65GA1110 जैसे दर्जनों उदाहरण चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि जीपीएस और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के दावों में कितनी सच्चाई है। जब हाथ से बने गुलाबी चालान पर लोडिंग पॉइंट चंगेरी दर्ज हो और पोर्टल पर पाषान, तो यह तकनीकी चूक नहीं बल्कि सुनियोजित राजस्व चोरी है।


ओवरलोडिंग को सरकारी आशीर्वाद -13 की क्षमता पर 29 का पास

भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा देखिए जिस डंपर की आधिकारिक क्षमता महज 13.49 क्यूबिक मीटर है, उसे सरकारी पोर्टल से 14, 25 और 29 क्यूबिक मीटर तक के पास धड़ल्ले से जारी किए जा रहे हैं। खनिज विभाग का पोर्टल अब नियमों से नहीं, बल्कि ठेकेदार की मर्जी से संचालित हो रहा है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं और ओवरलोडिंग को आधिकारिक मुहर लगा दें तो फिर सड़कों की बर्बादी और राजस्व की लूट को रोकना नामुमकिन है।


एनजीटी के आदेशों की हत्या- पोकलेन के बकेट से छलनी नदियों का कलेजा

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और खनिज अधिनियम 1957 के प्रावधानों को ताक पर रखकर एसोसिएट कॉमर्स ने नदियों की धारा रोक दी है। नियमों के मुताबिक नदी के जलस्तर के भीतर मशीनरी का प्रयोग वर्जित है लेकिन यहाँ हैवी पोकलेन मशीनें गहरे कुएं खोदकर पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर रही हैं। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 का यह खुला उल्लंघन लीज निरस्त करने का पर्याप्त आधार है फिर भी माइनिंग कॉर्पोरेशन भोपाल और स्थानीय प्रशासन ने मौन सहमति की चादर ओढ़ रखी है।


 सिस्टम का सरेंडर- रात के अंधेरे में उड़नदस्ता 'ब्लैकआउट'

रात होते ही चंगेरी खदान में रेत ठेकेदार एसोसिएट कॉमर्स का उत्सव शुरू हो जाता है। नियम विरुद्ध रूट और अवैध लोडिंग के बावजूद खनिज विभाग का उड़नदस्ता कभी मौके पर नहीं फटकता। चर्चा आम है कि सिस्टम ने ठेकेदार की गाड़ियों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए खुद को ब्लैक आउट मोड में डाल लिया है। सवाल यह है कि जब एक आम नागरिक मोबाइल ऐप से यह फर्जीवाड़ा पकड़ सकता है तो करोड़ों का बजट डकारने वाला विभाग अंधा और बहरा कैसे बना हुआ है?


मोहन सरकार के साख पर सवाल- कलेक्टर का  चलेगा डंडा या  अभयदान...?

अनूपपुर की जनता अब संवेदनशील कलेक्टर की ओर देख रही है। क्या जिला प्रशासन एसोसिएट कॉमर्स का पार्टनर है या बंधक? यह कृत्य केवल विभागीय उल्लंघन नहीं बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (जालसाजी) और 303(2) (खनिज चोरी) के तहत गंभीर अपराध है। यदि तत्काल एफआईआर दर्ज कर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया और उसकी सुरक्षा राशि राजसात नहीं की गई, तो यह माना जाएगा कि मोहन सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का अनूपपुर में अंतिम संस्कार हो चुका है।जनता जिम्मेदारों से सीधा सवाल करते देखी जा रही है कि जब टीपी और जीपीएस लोकेशन का मिलान ही नहीं है, तो कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति क्यों? क्या रेत सिंडिकेट के रसूख के सामने कानून ने घुटने टेक दिए हैं?


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