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Monday, April 6, 2026

28 करोड़ का रेत जुर्माना कागजों में दफन, जिले के विकास पर भारी पड़ रही कमलेश सिंह चंदेल पर मेहरबानी



28 करोड़ का रेत जुर्माना कागजों में दफन, जिले के विकास पर भारी पड़ रही कमलेश सिंह चंदेल पर मेहरबानी

अनूपपुर में सिस्टम का सरेंडर पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर ने ठोका था 28 करोड़ का जुर्माना, नए साहबों ने फाइल पर डाली रेत

माफिया के आगे बौना हुआ प्रशासन- 28.31 करोड़ की महा-डकैती पर फाइल दफन क्या अनूपपुर का खजाना रसूखदारों की जागीर है


इंट्रो -जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा आम है क्या रसूखदारों के सामने सरकारी आदेशों की कोई कीमत नहीं? मामला पूर्व कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर के समय की गई उस 'सर्जिकल स्ट्राइक' से जुड़ा है जिसमें रेत माफिया पर 28 करोड़ 31 लाख 70 हजार रुपये का ऐतिहासिक जुर्माना लगाया गया था। अफसोस की बात यह है कि कलेक्टर तो बदल गए, लेकिन सरकार का करोड़ों रुपया आज भी रसूख की तिजोरी में बंद है। जिला प्रशासन इस महा-वसूली को अंजाम देने में पूरी तरह बौना साबित हो रहा है।


अनूपपुर। जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ कागजी कार्रवाई तो खूब होती है, लेकिन जब वसूली की बात आती है, तो सरकारी तंत्र के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ चचाई क्षेत्र के एक रसूखदार पर लगाया गया 28 करोड़ 31 लाख 70 हजार रुपये का जुर्माना सालों बाद भी सरकारी खजाने तक नहीं पहुँचा है। यदि यह राशि वसूल कर ली जाती तो आज अनूपपुर जिले की सड़कों स्कूलों और अस्पतालों की सूरत बदली जा सकती थी।


क्या है पूरा मामला....?

न्यायालय कलेक्टर जिला अनूपपुर के आदेश (प्रकरण क्रं. 3238/बी-121/2016-17) के अनुसार, खनिज निरीक्षक की जांच में पाया गया था कि ग्राम चचाई आबाद में बाबाकुटी शिथिलीकरण टैंक के पास स्वीकृत खदान क्षेत्र से बाहर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया गया था।कुल अवैध उत्खनन 94,390 घन मीटरजुर्माने की राशि रायल्टी की 30 गुना दर से 28,31,70,000 रुपये कमलेश सिंह चंदेल, निवासी चचाईमशीनें जब्त हुईं, पर खजाना खाली रहाकलेक्टर कोर्ट के आदेश दिनांक 05 मार्च 2019 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि अनावेदक ने अवैध उत्खनन की बात स्वीकारी नहीं और न ही जुर्माने की राशि जमा करने पर सहमति दी। प्रशासन ने मौके से हुंडई कंपनी की एक भारी एक्सेकेवेटर मशीन (N602D01637) भी जब्त की थी। आदेश में कहा गया था कि राशि जमा होने के बाद ही मशीन छोड़ी जाएगी लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या वह राशि कभी वसूल हो पाई?


कलेक्टर बदले पर नीयत नहीं- जुर्माना वसूली शून्य 

जब चंद्रमोहन ठाकुर जिले की कमान संभाल रहे थे, तब चचाई क्षेत्र के इस बड़े मामले (प्रकरण क्रं. 3238/बी-121/2016-17) में कार्रवाई कर संदेश दिया गया था कि अवैध काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। खनिज विभाग ने 94,390 घन मीटर अवैध रेत पकड़ी थी। रॉयल्टी से 30 गुना ज्यादा जुर्माना लगाकर यह स्पष्ट किया गया था कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों की लूट बर्दाश्त नहीं होगी।


विकास के पहिये जाम प्रशासन क्यों है मौन...?

28 करोड़ रुपये की यह राशि कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है। अनूपपुर जैसे आदिवासी बहुल जिले के लिए यह राशि गेम चेंजर साबित हो सकती थी। इस पैसे से जिले के दर्जनों गांवों में पक्की सड़कें बन सकती थीं या स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड किया जा सकता था। आदेश जारी हुए सालों बीत गए, लेकिन जिला प्रशासन और खनिज विभाग इस मोटी रकम को वसूलने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहा है।


सिस्टम का खेल जब्ती गायब, वसूली शून्य

हैरानी की बात यह है कि इस केस में भारी-भरकम पोकलेन मशीनें जब्त हुई थीं। नियम कहता है कि बिना जुर्माना भरे फूटी कौड़ी का सामान भी नहीं छूटना चाहिए। लेकिन यहाँ तो माफिया बेखौफ घूम रहा है और विभाग के साहब 'फाइल-फाइल' का खेल खेल रहे हैं। यह अनूपपुर के इतिहास का सबसे बड़ा राजस्व घोटाला साबित होने जा रहा है, जहाँ आदेश होने के बावजूद वसूली की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


आम जनता को भारी पड़ रही मेहरबानी

आज अनूपपुर जिला प्रशासन की इस ढिलाई का खामियाजा यहाँ की जनता भुगत रही है। जिस 28 करोड़ रुपये से जिले में दर्जनों हाई-टेक स्कूल या बड़ी सड़कें बन सकती थीं, उसे वसूलने में प्रशासन का असमर्थ दिखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या वर्तमान प्रशासन को सरकार के राजस्व की चिंता नहीं है? या फिर फाइल को दबाने के लिए पीछे से मैनेजमेंट का खेल चल रहा है?सवाल यह है कि यदि यही जुर्माना किसी गरीब किसान या छोटे व्यापारी पर होता, तो क्या प्रशासन अब तक कुर्की की कार्रवाई नहीं कर चुका होता? फिर 28 करोड़ के इस मामले में इतनी नरमी क्यों?


जनता पूछ रही सवाल

क्या नियम और कायदे केवल आम आदमी के लिए हैं? जब एक आम नागरिक का मामूली टैक्स बकाया होता है तो विभाग कुर्क करने पहुँच जाता है लेकिन 28 करोड़ के इस बड़े मामले में प्रशासन की खामोशी कई संदेह पैदा करती है। क्या प्रशासन किसी दबाव में है या फिर रसूखदारों को जानबूझकर अभयदान दिया जा रहा है?अवैध उत्खनन से पर्यावरण और राजस्व को जो चोट पहुँची है उसकी भरपाई केवल कागजी आदेशों से नहीं होगी। प्रशासन को जवाब देना होगा कि आखिर यह पैसा सरकारी खाते में क्यों नहीं पहुँचा?

शिकायत के बाद भी कार्यवाही शून्य - उच्च न्यायालय पहुंचेगा मामला 

अगर प्रशासन ने इस खबर के बाद भी अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार की जड़ें कलेक्टरेट की नींव तक पहुँच चुकी हैं। 28 करोड़ की इस महा-वसूली को दबाने वाले चेहरे अब बेनकाब होने वाले हैं। सवाल सिर्फ एक है- साहब, आप माफिया के साथ हैं या मध्य प्रदेश के खजाने के साथ? कई बार शिकायत करने के बाद भी जुर्माने की वसूली न करना कहीं ना कहीं संरक्षण देने का कार्य प्रशासन द्वारा किया जा रहा है जो शासन को भारी राजस्व की हानि पहुंचाते हुए जिले के विकास में पीछे डकेलना का कार्य कर रही है जिसको लेकर उच्च न्यायालय जाने की तैयारी शिकायतकर्ता द्वारा की जा रही है!


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