अनूपपुर में ₹1 और ₹2 के सिक्कों पर अघोषित 'प्रतिबंध', दुकानदार लौटा रहे वैध मुद्रा, आम जनता परेशान
आरबीआई के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बाजार में मनमानी, खुले पैसों के बदले थमा रहे जबरन टॉफी
प्रशासन की चुप्पी से दुकानदारों के हौसले बुलंद, भारतीय मुद्रा का अपमान करने वालों पर सख्त कार्रवाई की दरकार
इंट्रो :-जिले भर के बाजारों में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ₹1 और ₹2 के वैध सिक्के अघोषित रूप से चलन से बाहर किए जा रहे हैं। चाय-पान के ठेलों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक छोटे सिक्के लेने से सीधे तौर पर मना किया जा रहा है। देश की वैध मुद्रा का यह खुला तिरस्कार जिले में रोजमर्रा की बात बन चुका है, जिससे आम उपभोक्ता बुरी तरह त्रस्त हैं। विशेषकर मजदूर, छात्र और मध्यमवर्गीय परिवारों को रोजमर्रा की खरीदारी में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खुले पैसों की समस्या के कारण हर दिन दुकानों पर विवाद और गहमागहमी की स्थिति निर्मित हो रही है। स्थानीय प्रशासन की लंबी चुप्पी के चलते व्यापारियों की यह मनमानी अब पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है।
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार) :-जिले के शहरी इलाकों और ग्रामीण हाट-बाजारों में स्थिति दिन-प्रतिदिन बेहद गंभीर और चिंताजनक होती जा रही है। किसी भी दुकान पर ₹1 या ₹2 का सिक्का लेकर पहुंचने वाले ग्राहक को सीधे अपमानित कर लौटा दिया जाता है। छोटे आकार और विभिन्न डिजाइनों के सिक्कों को लेकर स्थानीय स्तर पर मनगढ़ंत अफवाहें फैला दी गई हैं। बैंक और थोक व्यापारियों द्वारा सिक्के न लेने का झूठा बहाना बनाकर फुटकर व्यापारी अपनी मनमानी चला रहे हैं। जिला प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिबंधात्मक आदेश या जांच अभियान शुरू नहीं किया गया है। जनहित में अब यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन तुरंत हस्तक्षेप कर मुद्रा के इस अघोषित बहिष्कार को रोके।
खुले पैसों पर मनमानी- सिक्कों के बदले जबरन टॉफी थमाने का नया चलन
बाजार में खरीदारी के दौरान व्यापारियों का दोहरा रवैया खुलेआम देखने को मिल रहा है। जब किसी ग्राहक को बाकी पैसे लौटाने होते हैं, तो दुकानदार नकदी देने के बजाय जबरन टॉफी या गुटखा पाउच थमा देते हैं। इसके विपरीत, जब वही ग्राहक सामान की एवज में ₹1 या ₹2 का सिक्का भुगतान करता है, तो उसे लेने से साफ मना कर दिया जाता है। सिक्के को "बंद हो गया है" कहकर लौटाने से आए दिन दुकानों पर खरीदारों और विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हो रही है। इस जबरन थोपी गई व्यवस्था से रोजमर्रा की जरूरी चीजें खरीदने वाले आम नागरिकों का बजट और समय दोनों खराब हो रहे हैं।
अफवाहों पर टिका बहिष्कार- आरबीआई के सभी सिक्के पूरी तरह वैध और सुरक्षित
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने कई परिपत्रों में स्पष्ट किया है कि विभिन्न आकार, डिजाइन और धातुओं में जारी सभी सिक्के पूरी तरह वैध हैं। सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा ₹1 और ₹2 के किसी भी सिक्के के चलन पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। इसके बावजूद जिले के बाजारों में भ्रामक प्रचार और अफवाहों के दम पर सिक्कों का अवैध बहिष्कार किया जा रहा है। छोटे सिक्कों के बंद होने की झूठी खबरें फैलाकर व्यापारी अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ रहे हैं। यदि समय रहते जागरूकता और सही जानकारी का प्रसार नहीं हुआ, तो यह भ्रम अन्य छोटे सिक्कों तक भी तेजी से फैल जाएगा।
कानूनी शिकंजा देश की वैध मुद्रा अस्वीकार करना गैर-कानूनी और दंडनीय अपराध
कानूनी और बैंकिंग जानकारों के अनुसार भारत सरकार द्वारा जारी वैध मुद्रा को स्वीकार करने से मना करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) और करेंसी रेगुलेशन एक्ट के तहत ऐसा कृत्य राष्ट्रीय मुद्रा के अपमान के दायरे में दर्ज किया जा सकता है। दोषी पाए जाने पर संबंधित दुकानदार या व्यापारी के खिलाफ दंडात्मक प्रकरण और चालानी कार्रवाई का स्पष्ट प्रावधान है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के तहत बैंकों को भी अनिवार्य रूप से सिक्के जमा करने का नियम है। बैंकों द्वारा सिक्के लेने में आनाकानी करना भी इस समस्या को बढ़ावा देने का एक मुख्य कारण बन रहा है।
प्रशासनिक जवाबदेही- मुनादी, जांच दल और दोषी दुकानों पर सीलिंग की दरकार
पड़ोसी जिलों और अन्य क्षेत्रों की तर्ज पर अनूपपुर जिला प्रशासन को भी इस मनमानी पर तत्काल कड़ा रुख अपनाना होगा। जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लाउडस्पीकर से मुनादी कराई जाए। प्रशासन को विशेष उड़नदस्ता (फ्लाइंग स्क्वाड) गठित कर औचक निरीक्षण करना चाहिए और सिक्के लौटाने वाली दुकानों को सील करना चाहिए। साथ ही, लीड बैंक अधिकारी (LDM) के जरिए सभी बैंक शाखाओं को सिक्के अनिवार्य रूप से जमा करने के सख्त आदेश दिए जाएं। जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस अघोषित प्रतिबंध को समाप्त कराने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाना अनिवार्य है।

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