28 करोड़ के जुर्माना राजस्व बकायेदार कमलेश चंदेल पर आबकारी विभाग मेहरबान, नियम कुचलकर थमाया चचाई शराब ठेका
खनिज विभाग को चूना लगाने वाले पर डीईओ की कृपा दृष्टि, शिकायत के खुलासे के बाद फोन उठाना छोड़ें
राजपत्र की धज्जियां उड़ाने वाले आबकारी तंत्र पर डिप्टी कमिश्नर के.सी. अवधिया ने लिया संज्ञान
इंट्रो :-अनूपपुर जिले में आबकारी विभाग और दागी ठेकेदारों के नापाक गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है जहां 28 करोड़ से अधिक का सरकारी राजस्व डकारने वाले डिफॉल्टर को खुली छूट दे दी गई। खनिज विभाग की 28.31 करोड़ की देनदारी दबाए बैठे रसूखदार ठेकेदार कमलेश सिंह चंदेल को आबकारी अफसरों ने चचाई शराब दुकान का ठेका प्लेट में सजाकर सौंप दिया। राजपत्र के स्पष्ट नियमों को दरकिनार कर किए गए इस फर्जीवाड़े ने पूरे आबकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर कालिख पोत दी है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जब जिम्मेदार जिला आबकारी अधिकारी खेमराज श्याम से जवाब मांगा गया, तो वे फोन रिसीव न कर सवालों से भागते नजर आए। वहीं मामले की गंभीरता भांपते हुए डिप्टी कमिश्नर के.सी. अवधिया ने इस पर संज्ञान ले लिया है।
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार ) :-जिले के ग्राम केल्हारी निवासी संतोष कुमार पानसरे द्वारा आबकारी आयुक्त ग्वालियर, कलेक्टर अनूपपुर और जिला आबकारी अधिकारी को साक्ष्यों सहित भेजी गई शिकायत ने आबकारी विभाग की पोल खोलकर रख दी है। शिकायतकर्ता ने पुख्ता कानूनी प्रमाण पेश करते हुए उजागर किया है कि शासन को अरबों की चपत लगाने वाले ठेकेदार को मदिरा ठेका देकर खुली साठगांठ की गई है। इस सनसनीखेज शिकायत के सामने आते ही जिले के प्रशासनिक गलियारों और शराब कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले दागी ठेकेदार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर अब सीधे तौर पर मिलीभगत के आरोप लग रहे हैं। शिकायत में मांग की गई है कि इस नियम विरुद्ध आवंटन को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। साथ ही शासकीय राजस्व को डुबोने वाले ठेकेदार के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
राजपत्र की कंडिका-15 को पैरों तले रौंदा, अयोग्य ठेकेदार पर आबकारी की खुली मेहरबानी
मध्य प्रदेश शासन के आबकारी विभाग द्वारा जारी राजपत्र क्रमांक 45 दिनांक 20 फरवरी 2026 के स्पष्ट नियमों को अनूपपुर में बेरहमी से कुचल दिया गया। राजपत्र के बिंदु क्रमांक-15 में दो-टूक लिखा है कि जिस भी व्यक्ति पर मध्य प्रदेश शासन का कोई भी राजस्व बकाया होगा, वह शराब ठेके के लिए सीधे तौर पर अयोग्य माना जाएगा। इसके बावजूद आबकारी अधिकारियों ने दागी ठेकेदार कमलेश सिंह चंदेल की आपराधिक बकायेदारी को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया। ठेकेदार की भारी-भरकम देनदारियों की तस्दीक किए बिना ही वर्ष 2026-27 के लिए कंपोजिट मदिरा दुकान चचाई का लाइसेंस जारी कर दिया गया। नियमों की यह खुली अनदेखी साबित करती है कि विभाग में नियमों से ऊपर ठेकेदार के पैसे का रसूख हावी रहा है। यह कृत्य सीधे तौर पर राज्य शासन की तय नीतियों पर करारा तमाचा और सरकारी राजस्व के साथ खुला खिलवाड़ है।
सोन नदी का सीना चीरकर किया था अवैध उत्खनन, कलेक्टर कोर्ट ने ठोका था 28.31 करोड़ का जुर्माना
प्राप्त साक्ष्यों और शासकीय आदेशों के अनुसार ठेकेदार कमलेश सिंह चंदेल के पास अनूपपुर की रेत खदान चचाई आबाद खसरा नं. 0-1/304, रकबा 5 हेक्टेयर का ठेका था। ठेकेदार ने मुनाफे की हवस में स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर भारी पोकलेन व एक्सकेवेटर मशीनों से नदी का सीना चीरते हुए व्यापक पैमाने पर अवैध उत्खनन किया था। खनिज निरीक्षक की जांच रिपोर्ट पर कलेक्टर न्यायालय अनूपपुर में प्रकरण क्रमांक 41/बी-121/2017-18 दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद तत्कालीन कलेक्टर ने 04 अक्टूबर 2019 को ठेकेदार पर 28 करोड़ 31 लाख 70 हजार रुपये का ऐतिहासिक अर्थदंड अधिरोपित किया था। आदेश जारी होने के वर्षों बीत जाने के बावजूद आज तक ठेकेदार कमलेश चंदेल ने यह राशि खनिज विभाग के सरकारी खाते में जमा नहीं कराई। इतने बड़े सरकारी बकायेदार को शराब का नया ठेका थमा देना आबकारी विभाग की संदिग्ध कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
धनबल के आगे बौना साबित हुआ सिस्टम, शराब ठेका तत्काल निरस्त कर वसूली की मांग
शिकायतकर्ता ने पुरजोर शब्दों में आरोप लगाया है कि 28 करोड़ से अधिक का डाका डालने वाले ठेकेदार ने अपने रसूख से आबकारी तंत्र को अपनी मुट्ठी में कर रखा है। शराब नीति के नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक बकायेदार को मालामाल करने का यह खेल जिले की प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा तमाचा है। शिकायत के साथ 2019 के कलेक्टर कोर्ट के आदेश, आबकारी राजपत्र और चचाई दुकान आवंटन के पुख्ता दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। शासन के राजस्व को चूना लगाने वाले ठेकेदार के खिलाफ अब जिले भर में आक्रोश गहराने लगा है। शिकायत में शासन से दो-टूक मांग की गई है कि नियम विरुद्ध दिए गए चचाई शराब दुकान के लाइसेंस को बिना किसी देरी के तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। इसके साथ ही दोषी ठेकेदार से 28.31 करोड़ रुपये की बकाया राशि की कुर्की और वसूली की कठोर प्रक्रिया शुरू की जाए।
सवालों से भागे डीईओ खेमराज श्याम, डिप्टी कमिश्नर ने लिया संज्ञान तो सिंडिकेट में मची खलबली
इस पूरे मामले पर जब जिला आबकारी अधिकारी (डीईओ) खेमराज श्याम का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो वे सवालों से बचते हुए नजर आए। बार-बार फोन लगाने के बावजूद डीईओ खेमराज श्याम ने कॉल रिसीव करने की जहमत नहीं उठाई, जिससे विभाग की चुप्पी गंभीर मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। इसके बाद जब इस पूरे फर्जीवाड़े से आबकारी डिप्टी कमिश्नर के.सी. अवधिया को अवगत कराया गया तो उन्होंने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया। डिप्टी कमिश्नर श्री अवधिया ने मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए साफ किया कि नियमों की अनदेखी कतई बर्दाश्त नहीं होगी और पूरे प्रकरण की तथ्यात्मक जांच कराई जाएगी। उच्चाधिकारी द्वारा संज्ञान लेते ही फोन से दूरी बनाने वाले जिम्मेदार आबकारी अमले और ठेकेदार कमलेश चंदेल के होश उड़ गए हैं। अब देखना होगा कि शासन का 28 करोड़ दबाए बैठे ठेकेदार और जिम्मेदार अफसरों पर गाज कब गिरती है।

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