जिला पंचायत सीईओ के आदेश को डीपीसी कार्यालय ने दिखाया ठेंगा, शिक्षा विभाग में प्रशासनिक मनमानी चरम पर
प्राथमिक शाला मलेकी शिक्षक-विहीन होने की कगार पर, अधिकारियों की खींचतान में मासूमों का भविष्य दांव पर
नियमों की अनदेखी और परस्पर विरोधाभासी आदेशों से स्कूल में लटक सकता है ताला, उठ रही निष्पक्ष जांच की मांग
इंट्रो :-अनूपपुर जिले के शिक्षा विभाग में उच्चाधिकारियों के आदेशों की खुलेआम अनदेखी कर प्रशासनिक अराजकता का नया अध्याय लिखा जा रहा है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) द्वारा जारी स्पष्ट और लिखित निर्देशों को दरकिनार कर विभाग के मातहत अपनी मनमानी चलाने में मशगूल हैं। अधिकारियों के बीच अधिकार क्षेत्र की रस्साकशी और कागजी दांव-पेंच का सीधा खामियाजा ग्रामीण अंचल के स्कूलों और नौनिहालों को भुगतना पड़ रहा है। प्राथमिक शाला मलेकी में शिक्षक की पदस्थापना को लेकर उपजे भ्रम ने पूरी शिक्षण व्यवस्था को ही ठप कर दिया है। जब जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी के आदेश फाइलों में दफन हो जाएं, तो निचले अमले की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। यह पूरी स्थिति बच्चों के बुनियादी शिक्षा अधिकार पर सीधा कुठाराघात साबित हो रही है।
अनूपपुर(प्रकाश सिंह परिहार) :-जिले के पुष्पराजगढ़ विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक शाला मलेकी में शिक्षण व्यवस्था प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। कार्यालय कलेक्टर (समग्र शिक्षा) अनूपपुर द्वारा आदेश क्रमांक 1/94 2915/2026 दिनांक 10/04/2026 को जारी किया गया था। जिला पंचायत सीईओ के इस आदेश में प्राथमिक शिक्षक दीपक त्रिवेदी को उनके मूल दायित्वों के साथ जनपद शिक्षा केंद्र पुष्पराजगढ़ में एमआरसी का अस्थाई प्रभार दिया गया था। आदेश का स्पष्ट आशय यह था कि विद्यालय में बच्चों का शिक्षण कार्य बाधित न हो और कार्यव्यवस्था भी चलती रहे। लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक संवेदनहीनता के चलते इस संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ दिया गया। नतीजतन, स्कूल में पढ़ाई का माहौल पूरी तरह से बेपटरी हो चुका है।
डीपीसी कार्यालय का विरोधाभासी आदेश और प्रक्रियात्मक चूक
सीईओ जिला पंचायत के स्पष्ट आदेश को दरकिनार करते हुए जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) अनूपपुर ने 28/07/2026 को नया पत्र जारी कर दिया। राज्य शिक्षा केंद्र के हवाले से शिक्षक दीपक त्रिवेदी की पूर्णकालिक उपस्थिति जनपद शिक्षा केंद्र में दर्ज कराने का निर्देश दे दिया गया। इस पत्र के जारी होते ही सीईओ के मूल आदेश की पूरी तरह से अवहेलना हो गई और गहरा प्रशासनिक संशय पैदा हो गया। हैरानी की बात यह है कि इस पत्र की प्रतिलिपि न तो बीईओ को दी गई, न संकुल प्राचार्य गढ़ी को और न ही प्राथमिक शाला मवई को भेजी गई। यहां तक कि संबंधित शिक्षक को भी विधिवत सूचना नहीं दी गई, जिससे जमीनी स्तर पर भारी भ्रम फैल गया। यह प्रक्रियात्मक लापरवाही विभागीय कार्यशैली और पारदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है।
उहापोह में फंसी शिक्षक की उपस्थिति और ठप होता पठन-पाठन
विभागीय आदेशों के आपसी विरोधाभास और सूचना के अभाव का परिणाम यह हुआ कि शिक्षक की उपस्थिति ही सवालों के घेरे में आ गई। संबंधित शिक्षक न तो अपने मूल विद्यालय प्राथमिक शाला मवई में नियमित रूप से उपस्थित हो पा रहे हैं और न ही बीआरसी कार्यालय में उनकी स्थिति स्पष्ट है। इस प्रशासनिक असमंजस के कारण विद्यालय का दैनिक शैक्षणिक माहौल पूरी तरह से चरमरा गया है। शिक्षक की अनिश्चितता के चलते बच्चे केवल स्कूल आकर समय बिताने को विवश हैं। विभागीय तालमेल की भारी कमी का सीधा असर बच्चों के सीखने की क्षमता और उपस्थिति पर पड़ रहा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सरकारी दावा यहां अफसरों की हीलाहवाली के आगे दम तोड़ता नजर आ रहा है।
विद्यालय शिक्षक-विहीन होने का संकट और तालाबंदी की आशंका
प्राथमिक शाला मलेकी में यदि शिक्षक को पूरी तरह से बीआरसी में संबद्ध कर दिया जाता है, तो विद्यालय पूरी तरह शिक्षक-विहीन हो जाएगा। ऐसी विषम परिस्थिति में प्राथमिक स्तर के छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह ठप हो जाएगी। वर्तमान में यदि संस्था के प्रधानाध्यापक किसी शासकीय बैठक, प्रशिक्षण या आकस्मिक अवकाश पर जाते हैं, तो स्कूल में ताला लगाने की नौबत आ जाती है। एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले इस विद्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था का कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। 'सब पढ़ें, सब बढ़ें' का नारा प्रशासनिक उपेक्षा के चलते यहां खोखला साबित हो रहा है। नौनिहालों के भविष्य को इस तरह बंद दरवाजों के हवाले छोड़ देना शिक्षा तंत्र की गंभीर विफलता को दर्शाता है।
अभिभावकों में गहराता आक्रोश और उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिक्षा तंत्र की इस घोर लापरवाही को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक अभिभावकों में गहरा असंतोष और रोष व्याप्त है। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक खींचतान और अफसरों की मनमानी में उनके बच्चों का भविष्य बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। अभिभावकों ने जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि सीईओ के आदेश की अनदेखी करने के मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही परस्पर विरोधाभासी पत्र जारी कर भ्रम की स्थिति पैदा करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर जवाबदेही तय हो। ग्रामीणों ने प्राथमिक शाला मवई में नियमित व सुचारू शिक्षण सुनिश्चित करने हेतु तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई से हो रहे इस खिलवाड़ पर तुरंत रोक लगे।

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