बिजुरी नगर पालिका में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा विस्फोट,80 लाख का बजट नाले में बहा
ठेकेदार 'निहित इंफ़्रा रीवा' और नपा अधिकारियों की जुगलबंदी से जनता की गाढ़ी कमाई पर डाका
वार्ड 11 और 15 में घटिया निर्माण की खुली पोल, डिजिटल साक्ष्यों ने उड़ाए प्रशासन के होश
इंट्रो :- नगर पालिका बिजुरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने की सरेआम लूट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ जनता की गाढ़ी कमाई के 80 लाख को भ्रष्टाचार की नाली में बेहद बेरहमी से बहाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार ठेकेदार की मिलीभगत से शहर की बुनियादी व्यवस्था को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। निर्माण कार्यों में तकनीकी मापदंडों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुँच चुका है। करोड़ों के महा-बजट का यह हश्र देखकर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और उसकी ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अनूपपुर(विजय जायसवाल) :- नगर पालिका बिजुरी क्षेत्र को संवारने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम महा-बजट आवंटित किया गया था, जिससे शहर की सूरत पूरी तरह बदलनी थी। लेकिन धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है, जहाँ ठेकेदार 'निहित इंफ़्रा रीवा' और गैर-जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। वर्तमान में वार्ड क्रमांक 11 में चल रहा लगभग 80 लाख की लागत का नाली निर्माण कार्य तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा है। स्थानीय लोगों की जायज शिकायतों को दरकिनार कर खुलेआम घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी धन का खुलेआम दुरुपयोग साफ दिखाई दे रहा है।
डिजिटल साक्ष्यों ने खोली पोल, बिना बेस तैयार किए खड़ी की जा रही दीवार
निर्माण स्थल मे ठेकेदार तथा विभाग के तमाम दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। इस फोटो में यह साफ तौर पर देखा जा सकता है कि नाली के बेस को मजबूती देने के लिए अनिवार्य 40 एमएम गिट्टी का नामोनिशान तक नहीं है और छानबीन नाम मात्र के लिए डाला जा रहा है। तस्वीरें चीख-चीखकर गवाही दे रही हैं कि कैसे बिना कोई मजबूत बेस तैयार किए, सीधे कच्ची मिट्टी के ऊपर कंक्रीट का मिक्स डालकर लोहे का बेहद कमजोर और असुरक्षित ढांचा खड़ा किया जा रहा है। इंजीनियरिंग के बुनियादी नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर सिर्फ ऊपरी हिस्से पर सीमेंट की पतली परत चढ़ाकर लीपापोती करने का घिनौना खेल इस साइट पर धड़ल्ले से खेला जा रहा है।
वार्ड 15 का काला इतिहास ठेकेदार का पुराना और दागदार ट्रैक रिकॉर्ड
यह कोई पहला मौका नहीं है जब ठेकेदार 'निहित इंफ़्रा रीवा' द्वारा जनता के पैसों का इस तरह से बेखौफ होकर दुरुपयोग किया गया हो। इससे पहले वार्ड क्रमांक 15 से भी इस ठेकेदार के भ्रष्टाचार का एक ऐसा ही बड़ा और शर्मनाक कारनामा सामने आ चुका है, जहाँ इतनी घटिया नाली बनाई गई थी कि भारी जलभराव और तकनीकी खराबी के कारण नगर पालिका को हाल ही में लगभग 40 मीटर बनी-बनाई पक्की सड़क को जेसीबी मशीनों से पूरी तरह तोड़ना पड़ा था। स्थानीय निवासियों को उम्मीद थी कि इस भारी बदनामी और नुकसान के बाद ठेकेदार सुधरेगा, लेकिन भ्रष्ट तंत्र के वरदहस्त के कारण स्थिति आज भी वैसी ही बनी हुई है।
प्रतिशत के खेल में अंधी हुई तकनीकी टीम, एसी कमरों से हो रही कागजी मॉनिटरिंग
स्थानीय गलियारों और पुख्ता सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बेहद घटिया और स्तरहीन निर्माण के पीछे 'तय प्रतिशत' यानी मोटे कमीशन का गंदा खेल चल रहा है। चर्चा है कि ठेकेदार द्वारा संबंधित विभाग के जिम्मेदार तकनीकी अधिकारियों तक कथित तौर पर अग्रिम सुविधा शुल्क यानी रिश्वत पहुँचाई जा चुकी है। यही वजह है कि उपयंत्री और उनकी पूरी तकनीकी टीम काम शुरू होने से लेकर अब तक एक बार भी निर्माण स्थल का निरीक्षण करने नहीं पहुँचे हैं।
प्रशासनिक चुप्पी पर तीखे सवाल, क्या पहली बारिश भी झेल पाएगी यह 80 लाख की नाली?
इस धमाकेदार और बड़े खुलासे के बाद अब बिजुरी मुख्य नगरपालिका अधिकारी इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी पर जनता कई तीखे सवाल खड़े कर रही है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या उच्च अधिकारी 'निहित इंफ़्रा रीवा' के इस खुले भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराने की हिम्मत दिखाएंगे या फिर सरकारी नुकसान की भरपाई ठेकेदार से की जाएगी? बिना किसी गुणवत्ता प्रमाण पत्र के इस घटिया निर्माण के बिलों का भुगतान आखिर किस दबाव में करने की तैयारी चल रही है? यदि समय रहते इस पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो 80 लाख की यह नाली पहली बारिश भी नहीं झेल पाएगी और पूरी तरह धंस जाएगी।
इनका कहना है
इस मामले पर जल्द ही जाकर निरीक्षण करूंगा!
देवेंन्द्र कोल
कार्यपालन यंत्री नगरी प्रशासन शहडोल

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