बिजुरी नगर पालिका में निर्माण कार्यों के 'रिवाइज' खेल पर उठे सवाल, नियमों को ताक पर रखकर अतिरिक्त भुगतान के आरोप- नगर में बना चर्चा का विषय
तय गाइडलाइन के विपरीत 30 से 70 फीसदी तक राशि बढ़ाने की शिकायत- शहडोल से लेकर भोपाल वल्लभ भवन तक पहुंची गूंज
जांच टीम ने दी दस्तक, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, इंजीनियर और संबंधित ठेकेदारों की मिलीभगत के गंभीर आरोपों के घेरे में विभागीय प्रक्रियाएं
इंट्रो : बिजुरी नगर पालिका में इन दिनों विकास कार्यों के नाम पर वित्तीय अनियमितताओं और विभागीय नियमों की सरेआम अनदेखी के बेहद गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर हो रही चर्चाओं और वरिष्ठ कार्यालयों में विधिवत दर्ज कराई गई शिकायतों के अनुसार, टेंडर आमंत्रण की प्रक्रिया से लेकर निर्माण कार्यों की वास्तविक गुणवत्ता और उनके अंतिम भुगतान में कथित तौर पर भारी हेरफेर की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ताओं का सीधा आरोप है कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) पवन साहू, इंजीनियर सुरेश साहू, देवल सिंह और संबंधित ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से शासन के पैसों का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है। हालांकि, इन सभी गंभीर आरोपों पर आधिकारिक पुष्टि और अंतिम जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
अनूपपुर(विजय जायसवाल ) :-अनूपपुर जिले के अंतर्गत आने वाले नगरीय निकाय बिजुरी में इस कथित प्रशासनिक व वित्तीय विसंगति की जड़ें काफी गहरी दिखाई दे रही हैं। मामले की संवेदनशीलता और व्यापकता को देखते हुए नगरीय प्रशासन विभाग शहडोल के उच्च अधिकारियों के कड़े निर्देश पर एक विशेष जांच दल ने हाल ही में बिजुरी का आकस्मिक दौरा किया है। इस उच्च स्तरीय जांच टीम ने जमीनी स्तर पर विभिन्न निर्माण कार्यों का भौतिक निरीक्षण कर महत्वपूर्ण तकनीकी दस्तावेज खंगाले हैं। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही नगर पालिका के जिम्मेदार महकमे और ठेकेदारों के खेमे में हड़कंप मचा हुआ है। अब क्षेत्र की जागरूक जनता और शिकायतकर्ताओं की नजरें पूरी तरह इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषियों पर क्या दंडात्मक कार्रवाई होती है।
क्या है पूरा मामला और 'रिवाइज्ड एस्टीमेट' का अनोखा खेल?
शिकायत में यह तकनीकी बिंदु प्रमुखता से उठाया गया है कि पहले ठेकेदारों द्वारा जानबूझकर 20%, 25% और 32% बिलो (कम दर) पर टेंडर डाल दिए जाते हैं ताकि ठेका हासिल हो सके। बाद में धरातल पर निर्माण कार्य को स्वीकृत एस्टीमेट के विपरीत और अत्यंत गुणवत्ता विहीन तरीके से अंजाम दिया जाता है। इसके पश्चात, आपसी सांठगांठ से 'रिवाइज्ड एस्टीमेट' के नाम पर मूल राशि को 30%, 50% और 70% तक बढ़ाकर अतिरिक्त पेमेंट करा लिया जाता है। आरोप है कि यह अतिरिक्त भुगतान जमीनी स्तर पर मूल एस्टीमेट के वित्तीय मापदंडों के अनुरूप भी नहीं होता, जो सीधे तौर पर नगर पालिका अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है।
नियमों की सरेआम अनदेखी और स्वीकृतियों का खुला उल्लंघन
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (UADD) की स्पष्ट मार्गदर्शिका के बावजूद बिजुरी नगर पालिका में स्थापित नियमों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगे हैं। शासकीय नियम यह स्पष्ट करते हैं कि यदि किसी कार्य की कुल स्वीकृत लागत में 10% से अधिक की वृद्धि संभावित होती है, तो उसे अनिवार्य रूप से राज्य शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग (UADD) को भेजा जाना चाहिए। वहां राज्य स्तर पर गठित सक्षम समिति (Finance Committee) द्वारा ही विस्तृत समीक्षा के बाद पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी जा सकती है, परंतु स्थानीय स्तर पर इन सभी अनिवार्य प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया।
बिना पुनरीक्षित स्वीकृति और अनुबंध के अवैध भुगतान का आरोप
विभागीय नियमों के तहत जब तक सक्षम स्तर से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति (Revised Sanction) औपचारिक रूप से प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक किसी भी प्रकार के अतिरिक्त कार्य या बढ़ी हुई मात्रा के लिए ठेकेदार को राशि का भुगतान करना पूरी तरह नियम विरुद्ध और अवैध माना जाता है। पुनरीक्षित वित्तीय स्वीकृति मिलने के पश्चात ही संबंधित ठेकेदार के साथ एक वैधानिक अनुपूरक अनुबंध (Supplementary Agreement) निष्पादित किया जा सकता है। आरोप है कि इन सभी बुनियादी नियमों, प्रक्रियाओं और एकीकृत दिशा-निर्देशों (SoR) को दरकिनार कर अवैध रूप से वित्तीय लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से भुगतान किए गए हैं।
ये प्रमुख निर्माण कार्य हैं अब उच्च स्तरीय जांच के दायरे में
अनूपपुर से लेकर भोपाल वल्लभ भवन तक जिन प्रमुख निर्माण कार्यों में व्यापक गड़बड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई है, उनमें वार्ड क्रमांक 10 (अलीनगर) में नाली एवं सड़क निर्माण में गुणवत्ता की घोर अनदेखी, वार्ड क्रमांक 12 की डीप्लेरिंग भूमि में बिना अनुमति सड़क निर्माण, गुलाब ग्राउंड में एस्टीमेट के सर्वथा विपरीत नाली निर्माण, वार्ड क्रमांक 6 में मंगल भवन निर्माण कार्य में कथित रूप से भारी वित्तीय अनियमितता तथा मौहरी से भक्ता सड़क निर्माण कार्य की भौतिक गुणवत्ता और उसकी वित्तीय स्वीकृति में की गई बड़ी गड़बड़ियों के गंभीर आरोप शामिल हैं, जिनकी गहराई से निष्पक्ष जांच की जा रही है।
निहित इंफ़्रा रीवा वार्ड 11 और 15 में घटिया नाली निर्माण -मिली भगत से भ्रष्टाचार को दे रहा अंजाम
नगर पालिका बिजुरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने की सरेआम लूट का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ जनता की गाढ़ी कमाई के 80 लाख को वार्ड क्र. 11 निहित इंफ़्रा रीवा भ्रष्टाचार की नाली में बेहद बेरहमी से बहाया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार ठेकेदार की मिलीभगत से शहर की बुनियादी व्यवस्था को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। निर्माण कार्यों में तकनीकी मापदंडों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि स्थानीय निवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर पहुँच चुका है। करोड़ों के महा-बजट का यह हश्र देखकर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और उसकी ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इनका कहना है
निर्माण कार्यों की शिकायत के आधार पर सैंपल कलेक्ट किया गया है जांच उपरांत की कुछ बता पाएंगे!
देवेंन्द्र कोल
कार्यपालन यंत्री नगरी प्रशासन शहडोल
अगले अंक में पढ़े किन-किन फर्मो में किया गया भ्रष्टाचार





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